बिल्डर अनिल सिंह: हरि अनंत हरि कथा अनंता!

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-विनायक विजेता-

पटना। एक्जीविशन रोड स्थित एक मंदिर की जमीन पर कब्जा को लेकर फिर से सुर्खियों में आए पाटलिपुत्र बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड के एमडी और बिहार के दबंग बिल्डरों में से एक अनिल सिंह की दबंगर्ठ की कहानी ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता’ वाली है जिस दबंगई का कोई अंत नहीं दिख रहा। अनिल सिंह की दबंगई के कारण ही बिहार से सबसे पुराने उद्योगपति द्वारिका प्रसाद साबू (डीपी साबू) की कुछ वर्ष पूर्व सदमें से मौत हो गई।

साबू एक्जीविशन रोड स्थित लॉली सेन एंड कंपनी, होटल रिपब्लिक व साबू चैंबर्स के मालिक थे। बिहार में महेन्द्रा मोटर्स की प्रथम एजेंसी डीपी साबू के पास ही था। नवम्बर 2001 में बिल्डर अनिल सिंह ने एक्जीविशन रोड स्थित डीपी साबू की दो माले तक बनी ‘साबू चैंबर्स’ को छह माले तक विस्तार के लिए एक डीपी साबू और उनकी कंपनी से एक इकरारनामा किया।

इस इकरारनामें के अनुसार चार माले का विस्तार के बाद इसमें बने फ्लैट में 44 प्रतिशत की भागेदारी डीपी साबू और शेष 56 प्रतिशत की भागेदारी पाटलिपुत्र बिल्डर की तय हुई। इसके अलावा बिल्डर को 80 लाख रुपये भी डीपी साबू को देने थे। अनिल सिंह ने तब 41 लाख रुपये और 7-7 लाख रुपये के छह त्रैमासिक पोस्ट डेटेड चेक डीपी साबू को दिए थे।

इसके अलावा अनिल सिंह ने किराए पर इसी चैंबर में साबू का एक बड़ा फ्लैट ‘पाटलिपुत्र’ बिल्डर का कार्यालय खोलने के नाम पर लिया जिसका उसने कभी किराया भूगतान ही नहीं किया और उसपर भी कब्जा जमा लिया। बिल्डर अनिल सिंह द्वारा दिए गए सभी पोस्ट डेटेड चेक को 21 फरवरी 2002 से लेकर 22 दिसम्बर 2003 तक बारी बारी से बैंको में जमा किया गया तो सभी चेक डिजॉनर हो गए। खुद को ठगा जाने का महसूस करते ही डीपी साबू ने इस मामले में थाना-पुलिस और न्यायालय की शरण भी ली। यहां तक कि वह तत्कालीन डीजीपी आनंद शंकर से मिलकर उन्हें अपनी व्यथा सुनायी पर बिहार के कई बड़े और धुरंधर राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों से गहरे तालुक्कात रखने वाले अनिल सिंह के खिलाफ आवाज उठाने वाले वृद्ध उद्योगपति डीपी साबू की आवाज नक्कारखाने में तूती के समान ही साबित हुई ही तब प्रकिार स्वरुप अनिल सिंह ने पर्दे के पीछे रह बोरिंग कैनाल रोड स्थित उनकी एक भूखंड सहित कई भूखंडों पर कब्जा जमा लिया और उन्हें धमकी भी देने लगा जिस मामले में तब डीपी साबू द्वारा एसके पूरी थाने में अनिल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी थी पर उस मामले की भी लीपापोती हो गइ्र। अनिल सिंह द्वारा दिए गए इसी जख्म के सदमें से साढ़े तीन वर्ष पूर्व डीपी साबू की मौत हो गई।

पटना साहिब के भाजपा सांसद शत्रुध्न सिन्हा, भाजपा सांसद मनोज तिवारी सहित कई्र राजनेताओं और बिहार के कई्र पुलिस अधिकारियों से गहरे तालुक्कात रखने वाले अनिल सिंह पर जालसाजी, दबंगई और मनी लांड्रिंग के लगभग एक दर्जन मामले दर्ज है। अपने काले कारनामों को दबाने और सरकार और नौकरशाहों पर दवाब बनाने के उद्देश्य से अनिल सिंह ने पटना से एक क्षेत्रीय न्यूज चैनल ‘आर्यन न्यूज’ की शुरुआत भी की जिसमें कई नामी-गिरामी पत्रकारों को अप्वाईंट किया गया पर कालांतर में अनिल सिंह के करतूतों को जानकर कई पत्रकारों ने नौकरी छोड़ दी तो कईयों ने समय पर वेतन ही मिलने के कारण आर्यण को गुट बॉय कह दिया।

रहा सहा कसर 2014 में तब पूरा हो गया जब इडी ने मनी लॉउंड्रीग के आरोप में पाटलिपुत्र बिल्डर और आर्यन न्यूज चैनल के फ्रेजर रोड स्थित महाराजा कांपलेक्स में एक साथ छापेमारी कर भादवि की धारा-420 व 484 के तहत मुकदमा दर्ज किया।

अनिल सिंह की पहुंच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि धोखधड़ी के मामले में दर्ज कोतवाली थाना कांड संख्या-775/2013 में जब अनिल सिंह के जमानत आवेदन को उच्च न्यायालय ने निरस्त कर छह सप्ताह के अंदर उन्हें निचली अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया। इस आदेश के आलोक में अनिल सिंह ने सरेंडर तो कर दिया पर अपनी पहुंच के बल पर जेल जाने के दूसरे दिन ही पीएमसीएच के कैदी वार्ड में आराम फरमाने को पहुंच गए।

दो वर्ष पूर्व अनिल सिंह ने ‘आर्यन न्यूज’ को अचानक बंद कर दिया जिसके कारण दर्जनों पत्रकार सड़क पर आने को विवश हो गए। अभी एक्जीविशन रोड में जहां पर पाटलिपुत्र एक्जोटीका नामक एक शानदार होटल बनाया है कभी उस जमीन पर पंजाब नेशल बैंक का एक्जीविशन रोड ब्रांच हुआ करता था जिस बैंक के तत्कालीन मैनेजर और खजांची से अनिल सिंह के गहरे संबंध थे। नौ वर्ष पूव्र एक्जीविशन रोड स्थित एचडीएफसी बैंक से पंजाब नेशल बैंक के इसी शाखा में जमा कराए गए लगभग नौ करोड़ रुपये रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। इस घटना के कुछ ही माह बाद पीएनबी की वह शाखा वहां से हट गई्र और उस जमीन पर अनिल सिंह का आधिपत्य हो गया।

एचडीएफसी बैंक के गायब हुए रुपये मामले की भी अगर पुलिस गंभीरता से जांच करती तो एक बड़ा खुलासा हो सकता था पर पुलिस ने सारे मामले में लीपापोती कर दी। विवादित जमीन को औने-पौने दाम में खरीदने व किमती भूखंड पर जबरन कब्जा करने के फन में माहिर अनिल सिंह ने कुछ वर्ष पूर्व फ्रेजर रोड के गुरुद्वारा गली स्थित सिख समूदाय से आने वाले एक होटल मालिक के होटल और जमीन पर भी जबरन कब्जा करने के उद्देश्य से वहां चढ़ाई्र व फायरिंग की थी जिस मामले में भी उसपर कोतवाली थाने में मामला दर्ज है। अनिल सिंह ने राज्य व राज्य के बाहर के कई लोगों से फल्ैट देने के नाम पर करोड़ो रुपये वर्षों से ले रखे हैं पर वैसे लोग जब अपने पैसे लौटाने का तकादा करते हैं तो अनिल सिंह पुलिस विभाग में अपनी पहुच के बलबूते पीड़ितों पर ही रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज करा देता है।

हालिया उदाहरण दिल्ली के एक व्यवसायी की है जिसने अनिल सिंह से अपने रुपये वापस कराने हेतु अपने मित्र व सांसद साधू यादव का सहारा लिया। साधू यादव ने जब पैसे वापस करने के लिए अनिल सिंह पर दवाब डाला तो अनिल सिंह ने साधू यादव पर हि कोतवाली थाने में रंगदारी मांगने की प्राथमिकी दर्ज करा दी।

विज्ञापन के लोभ में अनिल सिंह के हाथों बिकाऊ बन चुकी बिहार और राजधानी पटना से प्रकाशित होने वाले और खुद को नंबर वन बताने वाले समाचार पत्र भी अनिल सिंह के काले कारनामों को छापने से परहेज करते रहे हैं जबकि घटने के बजाए अनिल सिंह के कारनामों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। सूत्र बताते है कि अनिल सिंह की पहुंच का एक कारण उसके रियल इस्टेट व्यवसाय में कई नौकरशाहों, माओवादी नेताओं, कुख्यात अपराधियों, कालाधन रखने वाले नेताओं का लगा करोड़ो रुपया है।

सूत्र बताते हैं कि कभी अपराध की दुनिया में एक बड़ा नाम रखने वाले और बेऊर जेल से ही स्थानीय निकाय का चुनाव लड़कर जीत हासिल करने वाले एक एमएलसी का भी काफी रुपया अनिल सिंह के रियल इस्टेट व्यवसाय में लगा है। चर्चा है कि बिल्डर अनिल सिंह का मनोबल बीते 14 वर्षे में तब से बढ़ा जब से नीतीश सरकार सत्ता में आयी। स्थानीय निकाय के हुए पिछले चुनाव में अनिल सिंह ने आरा-बक्सर निर्वाचन क्षेत्र से एूएलसी पद के लिए भागय भी आजमाया था जिस चुनाव में उन्हें बुरी तरह मुह की खानी पड़ी।

बहरहाल राज्य में एक बार फिर से सुशासन का दावा करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उनकी सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए अनिल सिंह लगातार चुनौती बन रहा है अब देखना यह है कि अनिल सिंह के खिलाफ सरकार या पुलिस कोई कड़ी कार्यवाई कर दिवंगत डीपी साबू की आत्मा को शांति पहुचाने सहित अनिल सिंह से पीड़ित लोगों के जख्मो पर मरहम लगाती है या हर बार की तरह अनिल सिंह ‘चांदी की जूती की चमक’ के आगे बेचारा ही बनी रहती है।

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