बाड़मेर के कथित भाजपाईयों के खिलाफ रिपोर्टिंग की सजा पटना में मिली

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आखिर बाड़मेड़ (राजस्थान) के ‘दुर्ग’ के विश्वास के किले को ध्वस्त कर ही दिया बिहार ने। जी हां हम बात कर रहे हैं बाड़मेर के उस युवा, उत्साही और निर्भीक पत्रकार व न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ के बेबाक रिपोर्टर दुर्ग सिंह राजपुरोहित की….

पटना (विनायक विजेता)। आजतक बिहार को सिर्फ देश के मानचित्र में ही देखने वाले दुर्ग सिंह को पटना में दायर एक मुकदमे में बाड़मेर से गिरफ्तार पटना लाकर बेऊर जेल भेज दिया गया। दुर्ग पर पटना के दीघा निवासी एक ऊपरी पहुंच वाले बाहुबली बालू ठेकेदार संजय सिंह के कर्मचारी राकेश पासवसन ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मजदूरी के पैसे हड़प लेने, मारपीट करने और जातिसूचक शब्द के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कोर्ट में एक परिवाद पत्र दायर किया था

पटना की विशेष अदालत ने इस संदर्भ में बीते 9 जुलाई को दुर्ग के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। इस मामले में साजिश की बू यहीं से आती है कि ऐसे किसी आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का वारंट अमल के लिए संबंधित थाने को भेजा जाता है

लेकिन दुर्ग की गिरफ्तारी का वारंट सीधे बाडमेर पुलिस को भेजा गया। बाडमेर पुलिस ने रविवार की देर रात बाडमेर से दुर्ग सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सड़क मार्ग से पटना लाकर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया।

इस मामले में सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि कोर्ट में पेशी के दौरान दुर्ग ने यह आरोप लगाया कि बाड़मेर के कुछ भाजपा नेताओं जिनके गलत कार्यो के खिलाफ वह लिखते रहें हैं, उन सबने पटना में संवैधानिक पद पर आसीन एक भाजपा नेता, जो बराबर बाडमेर की यात्रा करते रहे हैं, उनके सहयोग- इशारे पर यह फर्जी मुकदमा कराया गया।

दुर्ग का दावा है कि पटना क्या वो आज तक कभी बिहार नहीं आए। वह सिर्फ देश के मानचित्र पर ही बिहार को देखते रहे हैं।

इधर गुरुवार को कोर्ट पहुंचे दुर्ग के पिता और भारतीय सेना में कार्यरत उनके भाई ने दावा किया कि अगर इस मामले कि परिवादी और दोनों गवाह से पूछताछ और उनका बयान कराया जाए तो असलियत सामने आ जाएगा।

हालांकि दुर्ग के परिजनों का पटना पुलिस के अधिकारियों पर पूरा भरोसा है कि वो एक ईमानदार और बेबाक युवा पत्रकार के साथ न्याय करेंगे।

इधर पटना के एसएसपी मनु महाराज ने कहा कि चूकि यह मामला सीधे कोर्ट में दायर हुआ था और अगर न्यायालय आदेश देगी तो पटना पुलिस इस मामले की गहराई से जांच करेगी।

दुर्ग सिंह को राजस्थान सीमा सहित कई मामलों में बेबाकी से रिपोर्टिंग करने के लिए जाना जाता है उन्हें अपनी रिपोर्टिंग के लिए एक अंतराष्ट्रीय पुरस्कार तथा सम्मान सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

अपने शिकायत में वादी ने जिस दिन के घटना का उल्लेख किया है उस दिन दुर्ग बाडमेर में एक समारोह में थे, जिसकी वीडियो रिकार्डिंग भी मौजूद है।

एक युवा और बेबाक पत्रकार के साथ घटी इस तरह की घटना से पूरे देश की पत्रकारिता जगत स्तब्ध है पर बिहार के पत्रकार, यहां के पत्रकार संगठन, समाजिक संगठन और राजनेता इस मामले पर चुप्पी साधे बैठे हैं।

अगर बिहार के किसी लाल या किसी पत्रकार को किसी दूसरे राज्य में इसी तरह के फर्जी मुकदमे में फंसा दिया जाएगा तो क्या तब भी बिहार के पत्रकार संगठन और उसके पदधारक चूप बैठे रहेंगे?

बहरहाल अब इस मामले में पटना के तीन वरीय पुलिस पदाधिकारी की तिकड़ी जोनल आईजी नैयर हसनैन, डीआईजी राजेश कुमार और एसएसपी मनु महाराज से ही न्याय की उम्मीद की जा सकती है।

इस मामले में एक चौकाने वाली बात यह भी है कि इस मामले के परिवादी नालंदा जिले के टेटुआ गांव निवासी राकेश पासवान ने मीडिया के सामने यह भी कबूल किया है कि ‘वह किसी दुर्ग सिंह को नहीं जानता वह न तो कभी बाडमेर गया है न ही इस नाम के किसी व्यक्ति पर उसने कोर्ट में कोई मुकदमा किया है।’

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार राकेश के मीडिया में आए इस बयान के बाद जब राकेश की पुन: खोज की गई तो उसका कोई पता नहीं चल पा रहा, जो किसी भयंकर साजिश की ओर साफ इशारा कर रहा  है।

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