बात सुबोधकांत और अर्जुन मुंडा की

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लगता है कि झारखंड की राजनिति दिशीहीन हो गई है। भाजपा, झामुमो, आजसू, राजद, जदयू हो या कांग्रेस, झाविमो, राजद समेत अन्य दल। व्यक्तिगत स्वार्थ की जमीन पर किसी भी दल के नेतृत्व में कोई स्पष्ट नजरिया नहीं दिखती है। भाजपा-कांग्रेस जहां दिल्ली से संचालित होती है, वहीं राजद, जदयू पटना से। झामुमो, झाविमो और आजसू की कमान रांची के ही स्वंभू दिग्गज के हाथ में है। यदि हम इन राजनीतिक दलों का आंकलन करें तो हमाम में सब नंगे ही नजर आते हैं।

बहरहाल, झारखंड के रांची संसदीय सीट से जीते कांग्रेस के इकलौते सांसद सुबोधकांत सहाय को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। मीडिया का एक बड़ा तबका इसे कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में श्री सहाय की कथित संलिप्तता की परिणति बता रहे हैं। अब सच क्या है ? राम जाने। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वे एक मंत्री के रुप में विफल रहे। उन्होंने आम झारखंडी तो दूर पार्टी कार्यकर्ता से लेकर अपने रांची संसदीय सीट के लोगों से कटे-कटे रहे। इसका खामियाजा उन्हें हटिया विधान सभा के उप चुनाव में देखने को मिली। जब साम-दंड-भेद की अथक राजनीति के बाबजूद बतौर पार्टी प्रत्याशी उनके भाई सुनील सहाय अपनी जमानत भी नहीं बचा पाये। जबकि यह कांग्रेस का गढ़ और वीनिंग सीट थी।

इधर, झारखंड के भाजपाई सीएम अर्जुन मुंडा विकास-विकास का खेला कर रहे हैं। सरकारी विज्ञापनों के गुलाम मीडिया उन्हें काफी सुर्खियां दे रही है। मुंडा जी कई बार सड़क-यात्रा पर निकले। फिर भी सड़कों की दुर्दशा में कहीं भी कोई सुधार देखने को नहीं मिला। मुंडा जी ने रांची के कई व्यस्तम इलाकों में यातायात की सुविधा के लिये कई फ्लाई ओवर ब्रीज बनाये जाने की घोषणा की है। लेकिन पिछले तीन सालों में रांची की महात्वाकांक्षी लाइफ लाइन योजना “रिंग रोड” तीन फीट भी आगे नहीं बढ़ी है और करोड़ों रुपये से जहां-तहां बनी सड़क हवा-पानी में उड़-घुल रही है। अगर रिंग रोड बनाने का काम पूरा हो जाता तो रांची को यातायात की समस्या से यू हीं मुक्ति मिल जाती क्योंकि बाहर का आवागमन भी बीच राजधानी रांची से होकर ही गुजरती है। मुंडा जी की प्रायः हर घोषणा की यही विपरित स्थिति है।

उल्लेखनीय है कि मुंडा सरकार झामुमो-आजसू-जदयू की सांठगांठ से चल रही है। इस गठवंधन के बारे में झाविमो के बाबूलाल मरांडी की चर्चा याद आ जाती है। मरांडी के अनुसार इन लोगों को झारखंड की जनता से कोई मतलब नहीं है। यहां अभी सब सरकार चलाने के लिये “एमओयू” किया हुआ है। जिस दिन इन लोगों का मतलब सध जायेगा, सब गोतियारी खत्म।  …………… मुकेश भारतीय

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