बड़कागांव गोली कांडः पुतला दहन जुलूस के बीच सीएम ने दिये जांच के आदेश

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हजारीबाग। बड़कागांव पुलिस गोली कांड एवं रैयतों की झड़प के बाद सीएम रघुवर दास का पुतला दहन जुलूस निकाला गया। उधर सीएम ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुये कहा है कि दोषियों को किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जायेगा।

barkagaon-police-crime2उल्लेखनीय है कि  झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव के चिरूडीह में एनटीपीसी के विरोध में चल रहे कफन सत्याग्रह के दौरान पुलिस बल व आंदोलन कर रहे लोगों के बीच हुई झड़प के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए की गयी पुलिस कार्रवाई में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गयी है, जबकि एक व्यक्ति अति गंभीर रूप से घायल है।

घायलों की कुल संख्या आठ बतायी जाती है. इस घटना में सात पुलिस वाले भी घायल हुए हैं. दोनों पक्षों में झड़प आज तड़के आंदोलन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को पुलिस हिरासत में लिये जाने के बाद शुरू हुई। विधायक समर्थकों ने उन्हें पुलिस के कब्जे से छुड़ा लिया और भीड़ पथराव करने लगी।

उसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की। गोलीबारी में मारे गये लोगों का नाम मोहम्मद मेहताब, अभिषेक कुमार राय व रंजन कुमार राय है।

गंभीर रूप से घायल राजेश को अन्य घायलों के साथ रांची रेफर किया गया है, जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. अमेरिका के दौरे पर गये मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना जतायी है और जांच का आदेश दिया है।
घटनास्थल पर तनाव तब बढ़ा जब विधायक निर्मला देवी को पुलिस बल ने अपने कब्जे में ले लिया, जिनके नेतृत्व में पिछले 15 दिन से आंदोलन चल रहा था। उनके व 150 अन्य लोगों के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज की गयी थी।

ग्रामीण सीओ के नेतृत्व में हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया, जिसके बाद लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आंदोलन को उग्र होता देख पुलिस ने अंतत: फायरिंग की, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गयी, जबकि आठ लोग घायल हो गये।. आंदोलनकारियों ने सीओ की गाड़ी को आग लगी थी। हिंसा में एएसपी व सीओ भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। झारखंड पुलिस ने इस संबंध में विस्तृत बयान जारी किया है।

barkagaon-police-crime1हजारीबाग के बड़कागांव मेें हुई हिंसा पर झारखंड पुलिस ने अपना पक्ष रखा है और विस्तार से बताया है कि हालात क्यों बिगड़े और इसके लिए जिम्मेवार कौन है। झारखंड पुलिस के प्रवक्ता ने बयान जारी किया है, जो इस प्रकार है : 

विधायक निर्मला देवी और उनके पति योगेंद्र साहू अपने समर्थकों के साथ पकड़ी-बड़कागांव माइनिंग एरिया में 15-16 सितंबर से माइनिंग रोकने की मांग को लेकर धरना पर बैठे थे। हजारीबाग के एसपी व डीसी ने व्यक्तिगत रूप से धरनास्थल पर पहुंचकर उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई भी बात मानने से इनकार कर दिया।

इस बीच 28 सितंबर को एनटीपीसी कर्मी मशीन लगाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान विधायक और उनके  समर्थकों ने रोकने की कोशिश की गयी। एनटीपीसी प्रशासन ने वैकल्पिक रूट बनाने की कोशिश की, जिससे मशीन उस इलाके में लगायी जा सके।
पांचवीं मशीन लगाने के दौरान विधायक समर्थकों ने फिर रोका। कल एनटीपीसी का काम स्थगित कर दिया गया। एनटीपीसी ने बड़कागांव पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की। आज स्थिति को बिगड़ते देख मजिस्ट्रेट और पुलिस को तैनात किया गया। निदेशक डीआरडीए, सीओ बड़कागांव, एडिशनल एसपी, एसडीपीओ पुलिसकर्मी के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
प्रशासन की टीम ने विधायक को हिरासत में ले लिया। रास्ते में ढंढाकिला गांव के समीप  पुलिस वाहन को भीड़ ने रोक लिया और विधायक को छुड़ाने की कोशिश की. एसपी और मजिस्ट्रेट पीछे वाले वाहन में थे। भीड़ ने अधिकारियों को बाहर निकालने और अपने साथ ले जाने की कोशिश की।
डीआरडीए के निदेशक  को बचा लिया गया, लेकिन एडिशनल एसपी और सीओ को अगवा कर लिया गया। भीड़ ने अधिकारियों के साथ मारपीट की। भीड़ की इस मारपीट से अधिकारी बेहोश हो गये। इस बीच बड़कागांव थाने से पूरी स्थिति पर एसपी और डीडीसी घटना पर नजर बनाये हुए थे।
हालत को बेकाबू होते देख रैप और क्राउड कंट्रोल यूनिट को बुलाया गया. भीड़ को चेतावनी दी गयी। आसू गैस और रबर बुलेट के उपयोग के बावजूद भीड़ नहीं मानी। आत्मरक्षा में प्रशासन को गोली चलानी पड़ी। इस दौरान चार ग्रामीणों के मारे जाने की खबर है वहीं प्रशासन के सात लोग घायल गो गये हैं।
ग्रामीणों की पिटाई से कुलदीप कुमार (एडिशनल एसपी), शैलेश कुमार सिंह (सीओ), किशुन सान (सीओ), अजय कुमार प्रमाणिक (जिला बल) को मेडिका में इलाज के लिए लाया गया।

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