बंद हो अखबार के हॉकरों द्वारा बिना बिल दस रुपये की वसूली

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rajeshरांची से प्रकाशित-प्रसारित होने वाले समाचार पत्रों की एसएमडी टीम, उच्च प्रबंधन और संपादकीय के वरिष्ठजनों से एक निवेदन. एक अपील.
इन दिनों रांची में हॉकर अखबार के नियमित क्रेताओं (फिक्स्ड कस्टमर और एडवांस्ड एनुअल बुकिंग वालों) से बिल के अतिरिक्त दस रुपये प्रति माह ले रहे हैं.

ranchi_newsवह कहते हैं अखबार मालिक हमारा कमीशन नहीं बढ़ा रहा है, तो हम आप से लेंगे. यह उचित नहीं है. मैंने एक अखबार के दफ्तर में फोन किया. जवाब में एसएमडी के अधिकारी ने कहा हां, वो पैसे ले रहे हैं. मैंने कहा-आप उन्हें इससे मना करो. जवाब मिला-नहीं, मना नहीं कर सकते.

फिर मैंने कहा- आप कीमत में मंथली दस रुपये बढ़ा लो, उन्हें दे दो. फिर जवाब मिला- नहीं, सभी अखबार मालिकों ने हॉकर से कह दिया है कि तुम्हें कस्टमर एक्सट्रा पैसे देता है तो ले लो. यह ट्रेड का मामला है.

इसलिए, निवेदन है कि यह बिना बिल के दस रुपये प्रति माह की वसूली बंद हो. आप अखबार की कीमत बढ़ा लें. जिसे नहीं लेना होगा, नहीं लेगा. लेने वाला लेता रहेगा. लेकिन, ट्रेड के नाम पर हॉकरों को नियमित कस्टमर से इस उगाही की छूट उचित नहीं है.

rajesh…..Rajesh Roy   — with Amar Kant and 11 others.

Rajesh Roy, Mritynjoy Chhandogy, Kumar Bhawesh and 14 others like this.

Brijendra Dubey ab iske liye kiya kya jaaye bhai……….kuchh salah bhi dijiye

4 hrs · Like · 1

Rajesh Roy सलाह यही है कि दस रुपये कीमत बढ़ा दें जो हॉकर को बढ़े कमीशन के रूप में मिले. नहीं तो आज हॉकर दस रुपये की छूट पाए हैं प्रबंधन से. कल बीस मांगेंगे, क्रमिक बढ़ते हुए नौबत मारपीट तक जाएगी. इसे रोका जाना चाहिए.

3 hrs · Like

Dependra Singh Kejriwal ji isme madad kar sakte hai

3 hrs · Like · 1

Brijendra Dubey baat me to dam hai bhai

3 hrs · Like · 1

Rajesh Roy भाई Dependra Singh जी, मदद तो इसमें प्रधानसेवक नरेंद्र मोदीजी सही तरीके से कर सकते हैं. लेकिन वे करेंगे नहीं न. क्योंकि, उन्हें करना है नहीं. वो तो चुनावी जुमला सेवक हैं.

3 hrs · Like

Raj Kumar Jha अभी तक तो ऐसा नहीं हुआ है, परंतु इस बार के बिल में कुछ गड़बड़ है। पता करते हैं !

2 hrs · Like · 1

Rajesh Roy सर, ये बिल के अतिरिक्त है. आप हॉकर से पूछेंगे तो पूरी कहानी बता देगा. श्री Raj Kumar Jha सर.

2 hrs · Edited · Like · 1

Imran Ali रांची में हॉकर यह पम्फलेट भी अखबार के साथ घरों तक पहुंचा रहे हैं।

1 hr · Like · 1

Manoj Priyadarshi Rajesh bhai, ye bhi corruption ka ek roop hai.jo media har waqt kisi ke corr. Ka exclusive ke tag ke sath parosne ki koshish me laga rhta hai wahi ab corrup. Ki khuli choot de rha hai.isme hawker se jyada media malik jimmedar hain . Aur jab malik he isme unvolve hai to ye corruption aur customers pe jyadati jari rahegi

54 mins · Like · 1

Rajesh Roy भाई Imran Ali मैंने घर पर बोल दिया है कि यदि ये दस रुपए देने ही पड़ेंगे, तो मंथली सब्सक्रिप्शन बंद कर दे. अखबारों में ऐसा रहता क्या है जो पढ़ना जरूरी हो. टीवी-रेडियो़-इंटरनेट और न्यूज एप्स पर खबरें उपलब्ध हैं. अखबार वालों-हॉकरों को सोचना चाहिए कि आखिर दोनों ही की कमाई मंथली सब्सक्रिप्शन से है. मेरे जैसे हजारों लोग होंगे जो पेपर बंद करा लेंगे. फिर कमीशन और विज्ञापन की दरों पर – बाबाजी का….

37 mins · Like · 1

Imran Ali Rjesh Roy जी, जी, मैं तो यह मानता हूं कि हॉकरों की मजबूरी को भी समझना चाहिए। हॉकरों के खिलाफ मोर्चा खोलने से बेहतर है कि पत्रकार प्रजाति के हम जैसे जीवों को उनके लिए भी आवाज उठानी चाहिए। अखबार मालिक हर दिन लाखों-करोड़ों में खेलें और बेचारे हॉकर मंथली दस रुपए के लिए भी आप-हम जैसे बुद्धिजीवियों का विरोध सहें, यह ठीक नहीं है। उनका विरोध करने, सब्स्क्रिप्शन बंद करने से बेहतर है कि उन्हें भी उनका हक दिलाएं। उनके भी बच्चे हैं, उन्हें भी भूख लगती है, उनकी भी जरूरतें हैं और वो भी महंगाई की मार झेलते हैं, वह भी हमसे-आपसे कहीं ज्यादा। हम और आप फेसबुक पर बकैती करने के लिए ढाई सौ-पांच सौ रुपए का डाटा पैक भरवाकर उसे हफ्ते भर में ही स्वाहा कर देते हैं, मगर घर तक पूरी दुनिया को पहुंचाने वाले हॉकरों को मंथली दस रुपए अतिरिक्त देने में कंजूसी क्यों। हां, विरोध करना है, तो अखबार मालिकों, मैनेजमेंट का करें (अगर हिम्मत है, तो), जिन्होंने अपने पत्रकार-गैर पत्रकार कर्मचारियों को मजीठिया देने से तो मुंह मोड़ ही लिया है, और अब हॉकरों का भी शोषण करने पर उतर आए हैं। पर वे मालिकान इतने भी गरीब नहीं हैं कि हर हॉकर को मंथली दस रुपए का अतिरिक्त कमीशन दे सकें। विरोध करना है, तो अखबार मैनेजमेंट, मालिकों के इस रवैया का करें, हॉकरों का नहीं।

10 mins · Like

Rajesh Roy इमरानजी, आप प्रबंधन को कहिए बिल में दाम जोड़े. मैंने स्पष्ट लिखा है अखबारवाले वो दस रुपये हॉकर को कमीशन में दें. यह नहीं चल सकता कि आप कहें अखबार इतने रुपये में ही देंगे और आप हॉकर को पैसे दो. आप घर तक पहुंचाने की गारंटी नहीं दे सकते तो परचून की तरह दुकान सजाकर बैठिए, मुझे या जिसे जरूरत होगी आकर खरीदेगा. बस.

3 mins · Edited · Like

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