बीच सड़क पर गुम मानवता की कसक

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RANCHIआज सुबह जैसे ही घर से रांची शहर के लिये निकलने लगा कि मेरे बेटे ने कहा कि पापा केक लेते आइयेगा।कल 28 फरवरी को उसका जन्म दिन है। रांची पहुंचने के बाद आवश्यक काम निपटाया और शहर का दिल माने जाने वाले फिरायालाल चौक पहुंचा। मेरे साथ मेरे एक मित्र मनोज सिंह, जो दैनिक रांची एक्सप्रेस में संवाददाता हैं, वे भी साथ थे।

शहीद चौक और फिरायालाल चौक के बीच मुख्य डाकघर के ठीक सामने  डिवाईडर की दूसरी तरफ एक वयस्क आदमी लगभग सड़क पर वेहोशी की हालत में पड़ा था। उसके मुंह से ढेर सारा पीला रंग का झाग निकल रहा था। वह मिरगी का रोगी भी हो सकता था लेकिन मुंह से झाग की मात्रा औऱ स्थिर शरीर से प्रतीत हो रहा था कि उसके पेट में जहर के प्रचुर अंश है।

चूकि दोस्त मनोज के साथ मैं मोटरसायकिल पर था कि इसलिये उसके संदर्भ में कुछ निर्णय लेने के पहले फिरायालाल गोलंबर के पास पहुंच गया। वहां मैंने देखा कि एक पुलिस गाड़ी खड़ी है और उसमें बैठ पान चबाते अफसर से तैनात पुलिसकर्मी कुछ हिसाब-किताब कर रहा है। तब मैं और मनोज  उस पुलिस अफसर को सड़क पर पड़े वयस्क की हालत बताई औऱ मदद का अनुरोध किया।

लेकिन उस अफसर ने यह कहकर बड़ी वेरुखी से अपना पल्ला झाड़ लिया कि “यह कोतवाली थाना क्षेत्र के अधीन है । उस थाने में फोन कीजिये “। जब मैंने कहा कि मेरे पास कोतवाली थाना का नंबर नहीं है तो दो टूक जबाब मिला- किसी से ढूंढ लीजिये। फिर वे साहब अपनी पुलिस गाड़ी से आगे बढ़ गये।

यह दीगर बात है कि उस पेट्रोलिंग पुलिस वाहन में वायरलेस सेट लगे थे। पुलिसकर्मी से लेकर अफसर तक के हाथ में वॉकीटॉकी के साथ मोबाईल भी सुशोभित थे। यह घटना आज 27 फरवरी, दोपहर बाद करीब ढाई बजे की है।

सबसे दुःखद बात तो यह है कि पूर्णतः रनिंग रोड पर वह वयस्क वेसुध पड़ा था और उसके आसपास फुटपाथ पर कई लोग अपनी दुकानें भी सजाये थे। उन सबों की आंखों की पथरई कम न थी कि फिरायालाल चौक के पास के सदर अस्पताल में भी कोई लाचार को पहुंचा सके। शायद  पुलिस की तरह उन्हें भी अपने धंधे के नुकसान की चिंता अधिक थी। ऐसे में आते-जाते लोगों की क्या गरज पड़ी थी कि कोई मदद को रुके ?

अब मुझे मेरी आत्मा कचोट रही है कि वह न जाने कौन कहां का लाचार उस हालत में पड़ा था और मैं भी सामने से गुजरता चला गया। पूरे रास्ते से लेकर अब घर तक उसकी टीस मार रही है। उसकी  हालत और कंक्रीट के जंगलियों के हालात के बीच खुद की मानवता को तलाश रहा हूं। 

……..……….. मुकेश भारतीय

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