प्रिंट मीडिया मालिकों के लिए फिर यूं खास रही पंजाब

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“पंजाब की पहचान आज सिर्फ साइकिल उत्पादन और हौजरी प्रॉडक्ट्स जैसे बिजनेस के लिए ही नहीं रह गई है, बल्कि न्यूजपेपर रीडरशिप में भी यह लगातार अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा रहा है। यहां अखबार के पाठकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है …”   

राज़नामा.कॉम डेस्क। इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की तीसरी तिमाही के अनुसार, उत्तर भारत के टॉप पांच मार्केट में पंजाब भी शामिल है। उत्तर भारत में 42.9 प्रतिशत टोटल रीडरशिप और 16.5 प्रतिशत एवरेज इश्यू रीडरशिप  के साथ आईआरएस चार्ट में पंजाब ने अपनी मजबूत स्थिति कायम कर रखी है।

उत्तर भारत में आईआरएस की टॉप फाइव मार्केट की लिस्ट में जिन अन्य राज्यों ने अपना नाम दर्ज कराया है, उनमें दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड शामिल हैं।

मार्केट लीडर्स इन न्यूजपेपर्सः पंजाब में अखबारों ने टोटल रीडरशिप और एवरेज इश्यू रीडरशिप दोनों ही मामलों में ग्रोथ दर्ज की है। क्षेत्र के प्रमुख अखबार ‘पंजाब केसरी’ की एवरेज इश्यू रीडरशिप के आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है।

इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार जहां इस अखबार का एआईआर 936000 था, वह तीसरी तिमाही में बढ़कर 950000 हो गया है।

दूसरी ओर, दैनिक भास्कर की ग्रोथ भी काफी अच्छी रही है। पहली तिमाही में इस अखबार की टोटल रीडरशिप 1857000 थी, जो दूसरी तिमाही में 1924000 और तीसरी तिमाही में बढ़कर 216700 हो गई है।

इसी तरह अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप भी लगातार तीन तिमाहियों में 4,93,000 से 5,00,000  और फिर इससे बढ़कर 5,96,000 हो गई है।   

अब दैनिक जागरण की बात करें तो इस क्षेत्र में पहली तिमाही में अखबार की टोटल रीडरशिप 1819000 थी जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 1922000 और तीसरी तिमाही में 1971000 हो गई।

वहीं, दैनिक जागरण की एवरेज इश्यू रीडरशिप पहली तिमाही में 446000 थी और दूसरी तिमाही में इसमें मामूली गिरावट के साथ यह 436000 हो गई थी, लेकिन तीसरी तिमाही में इसने फिर अपनी स्थिति मजबूत की और तीसरी तिमाही में यह 466000 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

आखिर क्या है इसकी वजहः पंजाब केसरी अपनी ग्रोथ का श्रेय अपनी नई पहल को देता है, जो उसने प्रॉडक्शन में शुरू की हैं। अखबार के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित चोपड़ा का कहना है, ‘हम डिजिटल का विस्तार कर रहे हैं।

पंजाब केसरी में प्रिंट और डिजिटल की ग्रोथ एक-दूसरे की पूरक हैं और इससे हमारी पहुंच बढ़ी है। टेक्नोलॉजी में नए-नए प्रयोग करने से उत्पादकता में बढ़ोतरी के साथ क्वालिटी भी बेहतर हुई है।’

चोपड़ा के अनुसार, ‘हमने हाल ही में अपनी सभी 13 प्रॉडक्शन यूनिट्स में प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को बदल दिया है, जिससे हमें अपनी क्वालिटी और ग्रोथ बढ़ाने में काफी मदद मिली है। सभी लोकल पुलआउट्स भी अब मेन न्यूजपेपर का हिस्सा हैं।’

इसके साथ ही चोपड़ा का यह भी कहना है, ‘उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की तुलना में जहां पर हिंदी की ज्यादा रीडरशिप है, पंजाब में अंग्रेजी, हिंदी और अंग्रेजी की रीडरशिप काफी ज्यादा है।’

वहीं, दैनिक जागरण के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर, प्रिंटर पब्लिशर और रेजिडेंट एडिटर निशिकांत ठाकुर का कहना है, ‘राज्य में पंजाबी की तुलना में हिंदी रीडरशिप ज्यादा है। लोगों का हिंदी अखबारों की तरफ ज्यादा झुकाव है। पंजाब में रीजनल न्यूजपेपर्स जैसे- जगवाणी की रीडरशिप ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है जबकि शहरी इलाकों में अजीत की रीडरशिप ज्यादा है।’

पंजाब के तीन प्रमुख शहरों-अमृतसर, जालंधर और लुधियाना में दैनिक भास्कर टॉप के अखबारों में शुमार है। दैनिक भास्कर के प्रवक्ता का कहना है, ‘हाल ही में जारी किए गए वर्ष 2019 की तीसरी तिमाही के आईआरएस सर्वे के नतीजों के अनुसार दैनिक भास्कर ही इकलौता अखबार है, जिसकी ग्रोथ में पिछली तिमाही की तुलना में 23 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

यह हमारे सर्कुलेशन को बढ़ाने और एडिटोरियल कंटेंट पर फोकस करने के साथ ही पाठकों से जमीनी तौर पर जुड़ने का परिणाम है। हमारे लिए पंजाब काफी प्रमुख मार्केट है और हम इस क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।’

पंजाब में अखबारों की ग्रोथ के ये हैं कारणः राज्य में अखबारों की रीडरशिप बढ़ने से इस माध्यम में एडवर्टाइर्स की संख्या भी बढ़ी है।

विशेषज्ञों की मानें तो राज्य में पिछले दो-तीन वर्षों में विज्ञापन की दरों में भी 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है और पिछले दिनों देश की कमजोर अर्थव्यवस्था के दौरान भी इसमें कोई कमी नहीं देखी गई है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के चौथे दौर के नतीजों के अनुसार, देश में दिल्ली और पंजाब के लोग ज्यादा अमीर हैं। ऐसे में स्वभाविक तौर पर लोगों को लुभाने के लिए एडवर्टाइजर्स पंजाब के अखबारों की ओर आकर्षित हुए हैं।

देश का 75 प्रतिशत साइकिल उत्पादन और साइकिल के कलपुर्जों का 80 प्रतिशत निर्माण पंजाब में हो रहा है। इसके अलावा ट्रैक्टर्स, स्पोर्ट्स गुड्स और एग्रीकल्चरल मशीनरी का निर्माण भी इस राज्य में सबसे ज्यादा हो रहा है।

ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात और प्रॉडक्ट के बारे में जानकारी पहुंचाने के लिए ये इंडस्ट्रीज अखबारों का सहारा लेती हैं।

मीडिया विशेषज्ञ अनीता नैय्यर का कहना है, ‘देश में चंडीगढ़ और लुधियाना जैसे शहरों की गिनती अमीर शहरों में होती है और यहां के लोगों की क्रय शक्ति ज्यादा है। ऐसे में ब्रैंड्स भी लोगों को लुभाने के लिए यहां के अखबारों पर विज्ञापन में ज्यादा खर्च करते हैं।

विज्ञापन का बिजनेसः विभिन्न ब्रैंड्स के एडवर्टाइजर्स ने पंजाब के अखबारों के लिए अपने दरवाजे खोल रखे हैं। लोकल प्लेयर्स जैसे ट्रैक्टर निर्माता आदि ने स्थानीय अखबारों का सहारा लिया है, वहीं नेशनल और इंटरनेशनल ब्रैंड्स अंग्रेजी अखबारों का सहारा ले रहे हैं।

चंडीगढ़ की एडवर्टाइजिंग एजेंसी ‘De Code’ के मार्केटिंग हेड विनय कौशिक के अनुसार, ‘अंग्रेजी पाठकों के लिए एडवर्टाइजर्स पंजाब में ट्रिब्यून को प्राथमिकता देते हैं, वहीं पंजाबी के लिए अजीत और हिंदी में पंजाब केसरी उनकी पहली पसंद है।

अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब  मल्टी प्लेयर मार्केट है और यहां अंग्रेजी, हिंदी और पंजाबी में कई विकल्प हैं। यहां चुनौती काफी कड़ी है, इसके बावजूद एडवर्टाइजर्स अखबारों में विज्ञापन पर काफी खर्च कर रहे हैं।

यही कारण है कि पिछले तीन साल में विज्ञापन की दरों में पांच से दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।’

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