प्रशासन को ठेंगा दिखा अवैध होटल निर्माण के विस्तार में मस्त है राजगीर का यह कथित जर्नलिस्ट

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क्या वाकई कोई कुछ नहीं बिगाड सकता ?

         -: मुकेश भारतीय :-

नालंदा की पावन धरती का स्वर्ग यानि प्राकृतिक मनोरम वादियों से आच्छादित राजगीर को छोटे-बड़े सफेदपोश अतिक्रमणकारी लील ही नहीं रहे हैं बल्कि, शासन-प्रशासन और सरकार को यह खुली चुनौती देते दिख रहे हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।

गौर से देखिये इस भवन को। यह राजगीर गेस्ट हाउस होटल है। इसका मालिक शिवनंदन प्रसाद है, जो खुद को कथित जर्नलिस्ट बताता है। लेकिन क्या कोई मीडियाकर्मी इतनी हिमाकत कर सकता है कि सरकारी भूमि पर आलीशान होटल ही न बना ले अपितु, भूमि नापी और प्रशासनिक आदेश-निर्देश के बाबजूद आगे का निर्माण कार्य जारी रखे? ऐसे लोग जर्नलिस्ट के बजाय सफेदपोश ही अधिक कहलायेगें। वेशक ये सीधे तौर पर जिला प्रशासन को खुली चुनौती दे रहे हैं।

यह बात आयने की तरह बिल्कुल साफ हो गई है कि कथित जर्नलिस्ट शिवनंदन प्रसाद की राजगीर गेस्ट हाउस होटल मलमास मेला सैरात भूमि पर निर्मित है। मलमास मेला सैरात भूमि प्लॉट नंबर 5092, जिसकी कुल रकबा करीब 25 एकड़ है, उसकी सरकारी नापी में राजगीर गेस्ट हाउस होटल का पूरा भू-भाग निहीत है।

सबसे बड़ी बात कि जहां एक तरफ राजगीर में पूरा सरकारी महकमा नगर पंचायत चुनाव में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ उसका लाभ उठा कर उक्त अवैध होटल के उपर दूसरे तल्ले का पक्का निर्माण हो रहा है। जैसा कि तस्वीरों से साफ स्पष्ट है।

जिला प्रशासन को चाहिये कि इस हिमाकत के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था करे ताकि कोई राजगीर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत से इस तरह के खिलवाड़ करने की जुर्रत न करे।

जानकार बताते हैं कि प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर ने पूर्व डीएम कार्तिकेय साहेब के कार्यकाल में राजगीर के सफेदपोश अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिये थे। उस आलोक में कार्रवाई भी आगे बढ़ी लेकिन, उनके स्थान पर डीएम त्यागराजन साहब के पदभार संभालने सारी कार्रवाई जहां थी, वहीं थम गई। इससे दबंग अतिक्रमणकारियों के हौसले और भी बुलंद नजर आ रहे हैं। ऐसे में वर्तमान वर्तमान डीएम की छवि प्रभावित होना लाजमि है।

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