पूर्व भाजपा सांसद शहनवाज हुसैन से कुख्यात शहाबुद्दीन के रहे हैं गहरे ताल्लुकात

  • वर्ष 2000 में कश्मीरी आतंकी की भांजे के नामांकन के लिए की थी पैरवी

  • बाद में इन्हीं आतंकियों से कश्मीर से मंगाए थे एके-47 व अन्य हथियार

  • आतंकियों के बच्चे पढ़ रहे शहाबुद्दीन के सिवान स्थित मेडिकल कॉलेज में

  • केन्द्रीय खुफिया एजेंसी ने वर्ष 2003 में गृह मंत्रालय को सौंपी थी रिपोर्ट

अपने फेसबुक वाल पर पटना से वरिष्ठ पत्रकार विनायक विजेता

पटना। वर्ष 2002 में पटना से प्रकाशित एक हिन्दी मासिक के संपादक कुणाल एवं वर्ष 2016 में सिवान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या सहित 45 संगीन मामलों में आरोपित पूर्व बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन का भाजपा सांसद शहनवाज हुसैन से गहरे संबंध रहे हैं। इसका खुलासा किया था कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के सक्रिय आतंकी मुश्ताक अहमद ने।

वर्ष 2002 में अत्याधुनिक हथियारों के साथ जम्मू- कश्मीर के कुलगांव में गिरफ्तार मुश्ताक अहमद ने खुलासा किया था कि शहाबुद्दीन के कई कश्मीरी आतंकियों और हिजबुल मुजाहिदीन के डिवीजनल कमांडर फारुक मिर्चल (बाद में पुलिस मुटभेड़ में मारा गया) से भी थे। शीर्ष खुफिया एजेंसी द्वारा सरकार को तब सौंपी गई एक गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया है कि तब हिजबुल मुजाहिदीन के कुपवाड़ा डिवीजन कमांडर मुश्ताक अहमद आगा ने असगर नामक एक आतंकी जिसकी राजनैतिक पैठ भी थी से यह आग्रह किया था कि वह उमर अब्दुल्ला से पैरवी कर उसकी भांजे का एडमिशन बांग्लादेश के एक मेडिकल कॉलेज में करा दे। इस पर असगर ने तत्कालीन सांसद शहाबुद्दीन से अपना परिचय होने की बात कहकर उनसे बात की। इसके कुछ दिनों बाद अशरफ, असगर और मुश्ताक नामक तीनों आतंकी शहाबुद्दीन के

दिल्ली के मीणा बाग स्थित सरकारी आवास पर पहुंचे जहां से शहाबुद्दीन ने शहनवाज हुसैन से बात कर इन आतंकियों की भांजे के एडमीशन के लिए सिफारिश पत्र लिखवाया। यह तीनों आतंकी तब शहाबुद्दीन के सरकारी आवास पर 4-5 दिन रुके थे। इसके दो माह के बाद शहाबुद्दीन के कहने पर इन आतंकियों ने फल से लदे एक ट्रक में क्रिकेट के कीट बैग में 2 एके-47, एक पिस्टल और कुछ मैगजीन लेकर आजादपुर सब्जी मंडी पहुंचे जहा एक मारुति जेन कार से आए शहाबुद्दीन ने खुद इन हथियारों को रिसीव किया।

इस घटना के दो माह बाद शहाबुद्दीन श्रीनगर पहुंचे और वहां आतंकी अशरफ के घर आतंकी असगर और फारुक मिर्चल के साथ बैठक कर अपनी पार्टी की रक्षा के लिए कुछ छोटे हथियार की मांग की। जनवरी 2001 में फलों से लदे ट्रक में दो बक्सों में यह हथियार दिल्ली भेजे गए। इन बक्सों को दिल्ली के पास मुरथल में उतारना था जहां के एक होटल में चार पांच साथियों के साथ रुके शहाबुद्दीन ट्रक के आने का इंतजार कर रहे थे। ट्रक के आने के बाद शहाबुद्दीन इन हथियारों और मुश्ताक को साथ लेकर एक कार से अपने आवास चले गए। बाद में शहाबुद्दीन ट्रेन द्वारा खुद ही इन हथियारों को लेकर सिवान चले आए। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि शहाबुद्दीन का संबंध भारत के मोस्ट वांटेड दाउद इब्राहीम से भी है।

2001 में हज यात्रा के दौरान शहाबुद्दीन ने मीका (सऊदी अरब) में दाऊद से मुलाकात कर लंबी बात की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुपवाड़ा में सक्रिय दर्जनों आतंकियों के बच्चे शहाबुद्दीन के सिवान स्थित मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं और वो शहाबुद्दीन के संपर्क में है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब प्रतापपुर में शहाबुद्दीन और उनके समर्थकों की पुलिस के साथ मुटभेड़ हुई थी तब वहां कई आइएसआई एजेंट भी मौजूद थे जिन्होंने भी पुलिस पर फायरिंग की थी।

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