मुश्किलें में पूर्व पीएम, जेटली ने कहा-ईमानदार हैं मनमोहन

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कोल ब्लॉक घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की परेशानी बढ़ती जा रही है। ओड़िशा में 2005 में तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े एक मामले में सीबीआइ के स्पेशल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आरोपी के तौर पर समन जारी किया है।

सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने पूर्व पीएम के अलावा उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख, मेसर्स हिंडाल्को और उसके दो शीर्ष अधिकारियों को भी मामले में आरोपी के रूप में समन किया। इन सभी से आठ अप्रैल को पेश होने के लिए कहा गया है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि मनमोहन सिंह को 2005 में तालाबीरा-2 (ओड़िशा) कोल ब्लॉक आवंटन में मेसर्स हिंडाल्को को ‘समायोजित’ करने के लिए आपराधिक  षड्यंत्र में शामिल किया गया था।

jetliराज्यसभा में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि “मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर हमें कोई शक नहीं है। हम भी इस फैसले से काफी शॉक हैं। इस सम्मन से हम बहुत सदमे में हैं। मैं आपको बता दूं कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है।”

विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पराशर ने अपने 73 पृष्ठ के आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आराधिक षड्यंत्र की रूपरेखा हिंडाल्को के अफसर शुभेंदु अमिताभ, डी भट्टाचार्य, कुमार मंगलम बिड़ला व मेसर्स हिंडाल्को द्वारा तैयार की गयी थी जिसे तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारख और बाद में तत्कालीन पीएम व कोयला मंत्री मनमोहन सिंह को संलिप्त करके आगे बढ़ाया गया।

हालांकि, सचिव पारख और मनमोहन सिंह अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे, लेकिन मेसर्स हिंडाल्को को किसी भी तरह से तालाबीरा- दो कोल ब्लॉक में समायोजित करने का सामूहिक प्रयास किया गया। उस आपराधिक षड्यंत्र का केंद्रीय सामूहिक उद्देश्य था जिसकी सभी को जानकारी थी।

manइस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा, “जाहिर तौर पर मैं दुखी हूं लेकिन यह जीवन का हिस्सा है। मैंने हमेशा कहा है कि मैं कानूनी पड़ताल के लिए तैयार हूं। विश्वास है कि सच सामने आयेगा और मुझे सभी तथ्यों के साथ अपने पक्ष को रखने का मौका मिलेगा। देश की न्याय प्रक्रिया का मैं सम्मान करता हूं। निष्पक्ष मुकदमे में मैं अपनी बेगुनाही साबित करूंगा”

क्या हो सकती है सजाः इस मामले में दोषी पाये जाने पर आरोपियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है क्योंकि, अदालत ने आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी कर्मचारी,  बैंकर,  व्यापारी या एजेंट द्वारा अमानत में खयानत अपराधों का भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत संज्ञान लिया है।

इनको मिला समन : पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के अलावा  कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख, हिंडाल्को, हिंडाल्को के अधिकारियों शुभेंदु अमिताभ व डी भट्टाचार्य को भी आरोपी के तौर पर समन किया।

कौन-कौन सी धाराएं : आइपीसी की धाराओं 120 बी (आपराधिक साजिश) और 409 (किसी लोकसेवक या बैंकर, व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून (पीसीए) के प्रावधानों के तहत छह आरोपियों को कथित अपराधों के लिए सम्मन किया है. दोषी ठहराये जाने पर आरोपियों को अधिकतम आजीवन कारावास की हो सकती है।

क्या है मामलाः साल 2005 में जब बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को ओड़िशा के तालाबीरा द्वितीय और तृतीय में कोल ब्लॉक आवंटित किये गये थे, तो कोयला मंत्रालय का प्रभार मनमोहन  सिंह के पास था।

आरोप है कि तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारेख ने हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटित न करने के अपने निर्णय को एक महीने में बदल दिया था और ऐसा करने के लिए उसने कोई कारण नहीं बताया था।

इस मामले में कुमार मंगलम बिड़ला व पीसी पारेख के खिलाफ सीबीआइ ने अक्तूबर 2013 में मामला दर्ज किया था।

पहली बार नहीं :  यह पहली बार नहीं है जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को किसी आपराधिक मामले में आरोपी के रुप में सम्मन किया गया है। दिवंगत प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव को भी एक आरोपी बनाया गया था। तीन अलग अलग आरोपपत्र दाखिल किये गये थे जिसमें झामुमो सांसद रिश्वत मामला भी शामिल था। यद्यपि वह सभी में बरी हो गये थे।

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