आकर्षण का केन्द्रः बनी ममता बनर्जी की किताबें-पेंटिंग्‍स

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Mamtaपुस्तक मेले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लिखी गईं किताबें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कविता और निबंध के रूप में लिखी गई उनकी पांच नई किताबों को ब्रिक्री के लिए रखा गया है। किताबों के अतिरिक्त ममता की पेंटिंग्स भी इस मेले का आकर्षण हैं। 1995 से लिखती आ रहीं ममता की अभी तक 40 पुस्‍तक आ चुकी हैं।

एक पोलोके एक झोलोक और भाबनार साथी नामक पुस्तक लघु निबंधों और कविताओं के रूप में हैं। एक अन्य किताब शे नेई में उन लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्हें ममता बनर्जी अपने जीवन में खो चुकी हैं। उनकी पसंदीदा 100 कविताओं का संग्रह पाचंदेर कोबिता में है। वहीं अर्थ सांग के रूप में ममता की 70 कविताओं का संग्रह और उनकी 70 पेंटिंग्स का मंगलवार को विमोचन होगा।

दिल्ली स्थित रोली बुक्स द्वारा प्रकाशित कविताओं को नंदिनी सेनगुप्ता ने बांग्ला से अंग्रेजी में अनुवादित किया है। पेंटर शुवप्रसन्ना ने कहा कि कुछ चुनिंदा कविताओं और पेंटिंगों को इसमें शामिल किया गया है। उन्होंने को बताया, ‘इनमें से कुछ ममता द्वारा सड़कों पर देखी गई कुछ चीजों और आम आदमी के समक्ष आने वाली समस्याओं या प्रकृति के बारे में हैं।’

लोगों के समक्ष आने वाली समस्याएं, मानवाधिकारों का उल्लंघन, राजनीतिक विरोध और बयान ममता की कविताओं का आम तत्व रहे हैं। राजनेता के रूप में व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद ममता बनर्जी नियमित तौर पर लेखन करती रही हैं। पिछले कुछ सालों से पुस्तक मेले के हर संस्करण में उनकी किताबों का विमोचन होता रहा है। ममता द्वारा लिखी गई किताबों की संख्या 40 है। ममता की पहली पुस्तक 1995 में आई थी।

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