पुलिस के गाल पर रमा का तमाचा

Share Button

आज के प्रायः  सभी स्थानीय अखबारों में पूर्व मेयर रमा खलको के निचली अदालत में सरेंडर किये जाये की खबर सुर्खियों में है।  ” नोट फॉर वोट ” मामले के मुख्य आरोपी रमा ने एक मजे की बात कही है।  रमा का कहना है कि वह कोई फरार नहीं थी बल्कि, वह तो रांची में ही थी।

अब सबाल उठना लाजमि है कि न्यायालय के कड़े रुख के बाबजूद हाथ पर हाथ रख कर पुलिस अब तक क्यों बैठी थी। एक तरफ जहां रांची पुलिस के सूरमा जहां रमा की सरगर्मी से तलाश किये जाने तथा वारंट तामील कर जगह-जगह छापामारी करने के ढिंढोरे पीट रही थी,दूसरी तरफ रमा रांची में ही कैसे बिचरन कर रही थी। आखिर रांची पुलिस किस दृष्टि-दोष की शिकार है ? संभव है कि कल हॉर्स ट्रेडिंग मामले में फंसी सीता सोरेन आदि या कृषि घोटाले के आरोपी नलिन सोरेन सरीखे लोग भी यही कहेगें कि वे कहीं फरार न थे… वे तो रांची या अपने क्षेत्र की दिनचर्या में लिप्त थे।

वेशक इस तरह की घटनाओं से पुलिस प्रशासन की जगहंसाई होनी स्वभाविक है। लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश भी पनपता है कि पुलिस वीआपी और आम आदमी को अलग-अलग चश्में से देखती है। राष्ट्रपति शासन में इस तरह के चरित्र का प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये कम खतरा भी नहीं है।

Share Button

Relate Newss:

जय हो मोटर साइकिल भगवान
संतो के महासंगम का अनूठा नजारा
सोना के वजाय चूड़ियों के टुकड़े और लोहे की कीलें
इसे पुलिसिया गुंडागर्दी नहीं तो क्या कहेगें ?
चाल चलन बड़े घरानो जैसा !
अपनी साख खोती जा रही है रांची यूनिवर्सिटी
संकीर्ण मानसिकता को बढ़ावा देते अभद्र कपड़े
नमो मंत्र का जबरन स्टीकर चिपकाया, संजय सेठ व अन्य पर मुकदमा !
केजरीवाल सरकार के इस्तीफा पर सबाल
रांची हाई कोर्ट के ताजा फैसले से उठे कई सबाल
झारखंड में ‘सरकार’ है पुलिस मुख्यालय
हार्सट्रेडिंग मामलाः सीबीआई ने खंगाले नेताओं के 35 ठिकाने
विरोधियों की बौखलाहट का फल है खगड़िया की घटना
वाजपेयी बोलें तो भारत रत्न वापसः अमर्त्य सेन
बेटियों को लेकर क्यों क्रूर हो रहे हैं हम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
loading...