पुरुष प्रवेश निषेध आवासीय बालिका विद्यालय में पढ़ा रहे हैं छात्र शिक्षक

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4राजधानी रांची के ओरमांझी प्रखंड संसाधन केन्द्र भवन में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में पुरुषों का प्रवेश निषेध हैं। नियम भी यही है कि ऐसे किसी भी विद्यालय में बिना लिखित इजाजत के कोई पुरुष प्रवेश नहीं कर सकता। यहां तक कि बालिकाओं से वार्डन द्वारा जारी लिखित आदेश या पहचान पत्र के अभिभावक  भी नहीं मिल सकते।

लेकिन यह सब सिर्फ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ओरमांझी में दीवार लेखन तक ही सीमित है और हकीकत कुछ और हीं बयां करती है। यहां जब चाहे कोई भी यूं ही प्रवेश कर सकता है।

यह आवासीय विद्यालय पिछले एक दशक से प्रखंड संसाधन केन्द्र भवन में चल रहा है। इस भवन में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी का कार्यालय भी है। वहां कई पुरुषकर्मी कार्यरत तो हैं ही, विभिन्न कार्यों से पुरुष शिक्षकों का आना जाना लगा रहता है। इससे इतर वार्डन समेत  अन्य अनुबंधित शिक्षक, गार्ड आदि के रिश्तेदार दिन-रात आते-जाते रहते हैं।

सबसे बड़ी दिलचस्प पहलु एक आरटीआई के जबाब से सामने आई है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ओरमांझी की वार्डन अनीता तोपनो के हस्ताक्षर से यह सूचना दी गई है कि इस विद्यालय में अनुबंधित एवं अंशकालिक कुल 15 शिक्षकों में  4 पुरुष शिक्षक अपनी सेवा दे रहे हैं। सभी पुरुष शिक्षक अंशकालिक हैं, जिसे विद्यालय प्रबंधन समिति एवं वार्डन ने मिल कर अपनी मर्जी से रखा है।

सूचना के अनुसार अंशकालिक पुरुषों में वि. विधुमोन विक्की, भुनेशवर महतो, राजमोहन महतो एवं प्रेमनाथ महतो शामिल है। यहां पर उल्लेखनीय है कि एक शिक्षिका के स्थान पर उसका सेवानिृत शिक्षक बाप पिछले तीन सालों तक  पढ़ाता रहा है तथा विद्यालय में कार्यरत एक पुरुष लेखापाल बालिकाओं के साथ गलत हरकतों के कारण स्थानांतरित हो चुका है।

यही नहीं, यह विद्यालय पहले ओरमांझी के एक बेहतर भवन में संचालित था लेकिन, 21वीं सदी के विज्ञानी शिक्षा के दौर में वहां भूत-भूत का हौव्वा खड़ा कर मध्य विद्यालय चकला परिसर स्थित प्रखंड संसाधन केन्द्र में स्थानानतरित कर दिया गया।

इस संबंध में आश्वस्त जानकार सूत्र बताते हैं कि तब तात्कालीन वार्डन एवं कुछ बालिकाओं से रात अंधेरे कुछ पुरुष लोग मिलने आते थे। जिसकी जानकारी आसपास के लोगों को हो गई थी और कोई बड़ी अनहोनी होने का खतरा था। तात्कालीन पुरुष नाईट गार्ड का अचानक नौकरी छोड़ना  आज भी रहस्य बना हुआ है।

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