पीएम मोदी के सामने डरते-कांपते पंजाब केसरी के मालिक!

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राज़नामा.कॉम। जब किसी अखबार का मालिक संपादक बन जाए और फिर संपादक बन कर नेता तो उसकी क्या औकात रह जाती है, यदि इसका सौ फीसदी आंकलण करना हो तो  जरा पीएम नरेन्द्र मोदी के सामने डरते-कांपते दैनिक पंजाब केसरी के अश्वनि कुमार चोपड़ा का दर्शन कर लीजिए।

जी हां, यह जनाब वही चोपड़ा साहेब हैं, जो अपने संपादकीय लेखों में सदैव लंबी-लंबी हांकने और पाठकों को मूर्ख बनाने में कभी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते रहे हैं।

MODI_CHOPRA_PANJAB KESRIजाहिर है कि  जब अख़बारों-चैनलों के मालिक-संपादक लोग अपनी पूरी उर्जा लोकसभा-राज्यसभा की सीट और पद्मभूषण आदि के लिये खर्च करते हुए इस चित्र में दिखाई मुद्रा में जा पहुंचें हों, उस परिस्थिति में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खम्भा कैसे माना जा सकता है?

वर्तमान सत्ताधीश के दरबार में मीडिया के मालिकान किस रूप में हैं, कितने हैं और क्या छाप-दिखा रहे हैं, यह तस्वीर नमूना मात्र है।  जिसे देखकर इतना तो कहा ही जा सकता है कि- उफ़… ये बिकाउ मीडिया, पत्रकारिता अब किस तरह दलाली, सत्ता, पावर, बिजनेस में कनवर्ट हो गई है।

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