पिंजड़ा बंद हुआ ‘तोता’, मधु कोड़ा कुनबा को मिला ‘क्लीन चिट’

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CBI

राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय)।   भारत सरकार की उच्च जांच-कार्रवाई एजेंसी सीबीआइ एक पिंजड़ा बंद तोता मात्र है या फिर कुछ और। झारखंड के एक बड़े राजनेता ने इस बाबत राजनामा.कॉम को दिये अपने साक्षात्कार में कहा था कि दरअसल सीबीआइ भी अन्य प्रांतीय पुलिस-तंत्र की तरह ही काम करती है। दायें मुड़, बायें मुड़, पीछे मुड़, आगे बढ़ और सलामी ठोक की तर्ज पर उसकी कार्रवाईयां होती है। लूटखंड का पर्यावाची बने झारखंड राज्य में सीबीआइ की कार्यशैली हास्यास्पद और भी दिख रही है।

वर्ष 2008-2009 के बीच हुये राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाला के मामले में तात्कालीन मुख्यमंत्री (प्रभार उर्जा मंत्री) मधु कोड़ा एवं उनके निकटतम सहयोगी बिचौलिया व्यवसायी बिनोद सिन्हा 3 बर्ष से अधिक जेल में रहे और फिलहाल दोनों जमानत पर हैं। लेकिन रांची हाई कोर्ट में कल सीबीआइ ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कोड़ा और इनके सहयोगी विनोद सिन्हा, पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह, आइबीआरसीएल के कई अफसर आदि आरोपियों को क्लीन चिट दे दिया है। जाहिर है कि सीबीआई की यह क्लीन चीट उसकी कार्यशैली-कार्रवाई पर कई सबाल खड़े करती है।

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इतना तो तय है कि वर्ष 2008-2009 के बीच हुये राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में व्यापक पैमाने पर अनियमियता बरती गयी और कमीशनबाजी का खुला खेल हुआ। जो सीबीआइ कल तक आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत होने का दावा कर रही थी, अचानक उसने सभी आरोपियों को क्लीन चिट कैसे दे दी ?

अगर इस घोटाले में उपरोक्त सारे आरोपी पाक-साफ हैं तो फिर दोषी कौन लोग हैं। क्या यह मान लिया जाये कि वर्ष 2008-2009 के बीच राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में कोई घपला-घोटाला नहीं हुआ था और सीबीआई को इसे परखने में 4 साल लग गये ! या फिर वह  किसी  ‘अज्ञात शक्ति’ के इशारे पर किसी को जब चाहे फंसाती  है और जब चाहे किसी को बचा जाती है। जांच व्यवस्था  के नाम पर उसके कार्य मात्र दायें मुड़, बायें मुड़, पीछे मुड़, आगे बढ़ और सलामी ठोक जैसी परेड करने से इतर कुछ नहीं है है।

खबर है कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाला मामले में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को क्लीन चिट मिल गई है। कोड़ा के अधिवक्ता के अनुसार दिल्ली सीबीआइ ने कोड़ा और इनके सहयोगी विनोद सिन्हा, पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह, आइबीआरसीएल के कई अफसर आदि आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश किया है। अपनी क्लोजर रिपोर्ट में सीबीआइ ने कहा है कि जांच में कोड़ा या अन्य आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य जांच में सामने नहीं आया है, इसलिए इस मामले की जांच बंद कर दिया जाये।

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कोड़ा के वकील के मुताबिक सीबीआइ ने 24 अक्टूबर 2013 को सीबीआइ कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। लेकिन अवकाश होने के कारण यह मामला सोमवार को कोर्ट खुलने के बाद सामने आया।

उल्लेखनीय है कि करीब 500 करोड़ रुपये से पलामू, लातेहार, गढ़वा सहित कुछ जिलों में ग्रामीण विद्युतीकरण किया जाना था। आरोप था कि इस मामले में गलत ढंग से एक कंपनी आइबीआरसीएल को काम का ठेका दिया गया। इसके एवज में आरोपियों को आइबीआरसीएल द्वारा लाभान्वित करने की भी बात कही गई थी। इस मामले की जांच पूर्व में निगरानी ब्यूरो कर रही थी। लेकिन मामले में बहुत दिनों तक जांच के बाद भी वह कुछ नहीं कर सकी थी।

बाद में अर्जुन मुंडा सरकार ने इस मामले में सीबीआइ जांच की अनुशंसा की थी। करीब एक साल से ज्यादा समय तक जांच के बाद सीबीआइ को भी कोई साक्ष्य हासिल नहीं हुआ। इस मामले में कोड़ा करीब साढ़े तीन साल जेल में रहे थे। वर्तमान में वे इस मामले में जमानत पर हैं। 

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