पत्रकार को फंसाने वाली मुखिया के खिलाफ यूं फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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राजनामा.कॉम। सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर पंचायत की मुखिया सावित्री मुरमू को बनकाटी गांव में प्रवेश करने पर ग्रामीणों ने रोक लगा दी है।

इतना ही नहीं ग्रामीणों ने मुखिया फंड से होने वाले विकास योजनाओं को भी गांव में खर्च करने पर रोक लगा दी है। इसको लेकर ग्रामीणों ने पूरे गांव में पोस्टरबाजी की है।

बनकटी गांव में आज पूर्व विधायक सह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अनंत राम टुडू के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने आज बैठक की, जिसमें पूरे गोविंदपुर पंचायत के गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

सभी ने मुखिया सावित्री मुरमू द्वारा पत्रकार वीरेंद्र मंडल एवं उसके पिता रामपद मंडल को झूठे मामले में फंसाए जाने का विरोध किया, और कहा एक जनप्रतिनिधि को ग्रामीणों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए।ग्रामीणों का कहना था कि उनका पुलिस प्रशासन पर से विश्वास उठ गया है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा है कि सरायकेला पुलिस प्रशासन ने मुखिया को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया है।

पूर्व मुखिया ने वर्तमान मुखिया पर ग्रामीण भावनाओं का अपमान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुखिया गांव का सरकार होता है ग्रामीण जनता के दुख दर्द का सबसे पहला साथी मुखिया ही होता है। ऐसे में एक मुखिया द्वारा ग्रामीण को झूठे केस में फंसा कर जेल भेजना निश्चित तौर पर हैरान करने वाली है।

पूर्व विधायक अनंत राम टुडू ने सरायकेला पुलिस को पूरे मामले में दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर कोल्हान के डीआईजी से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे उन्हें काफी निराशा है। वैसे ग्रामीण अब और बड़े आंदोलन के मूड में नजर आ रहे हैं।

ग्रामीण सूत्रों की अगर मानें तो वे बहुत जल्द मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की योजना बना रहे हैं। उससे भी अगर मामला नहीं सुलझता है तो वे रांची में धरना देने की भी योजना बना रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों बनकटी गांव में ग्रामीणों और मुखिया के समर्थकों के बीच घटिया सड़क निर्माण को लेकर विवाद हो गया था। जिसका कवरेज करने पत्रकार वीरेंद्र मंडल को ग्रामीणों ने बुलाया था, लेकिन मुखिया के समर्थकों ने वीरेंद्र मंडल के पिता राम पद मंडल के साथ हाथापाई शुरू कर दी।

हाथापाई करने वालों में मुखिया प्रतिनिधि मेम लता महतो एवं उनके पति नरे राम महतो की बड़ी भूमिका थी। अपने पिता को पीटता देख वीरेंद्र मंडल बीच-बचाव करने गया इस पर मुखिया भड़क उठी।

जबकि अपने पिता को सुरक्षित हटाकर पत्रकार सबसे पहले राज नगर थाना में मुखिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पहुंचा, लेकिन सरायकेला पुलिस प्रशासन की निजी अदावत के कारण पुलिस ने मुखिया को मोहरा बनाकर उस पर एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवा दिया और दोनों पिता-पुत्र को जेल भेज दिया।

इतना ही नहीं इस पूरे मामले में ग्रामीणों का पक्ष नहीं लिया गया जबकि ग्रामीण चीख चीख कर कहते रहे कि पत्रकार और उसका पिता निर्दोष है, लेकिन सरायकेला पुलिस ने ग्रामीणों की एक न सुनी।

वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने संबंधी आदेश का भी पालन सरायकेला पुलिस ने नहीं किया।

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