पटना बम ब्लास्ट को लेकर दोहरा मापदंड दिखा रही है बिहारी मीडिया

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patna-bom-blast1राजनामा.कॉम। पटना ब्लास्ट के बाद पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए पाकिस्तानी संगठन से लेनदेन करने वाले पवन, विकास, गणेश प्रसाद व गोपाल गोयल को गिरफ्तार कर लिया.

इस मामले में लखीसराय के डीएसपी सुबोध कुमार बिस्वास ने कहा कि ये लोग पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के सम्पर्क में थे और इन्हें पाकिस्तान से मोटी रकम भेजी जाती थी और इन पैसों का उपयोग युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए करते थे.

यह मामला कितना गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन महीने में पाकिस्तान से एक करोड़ रपुये का ट्रांजेक्शन किया गया है. लखीसराय के डीएसपी का कहना है कि बैंकों में पाकिस्तान से पैसे दिये जाने के बाद इसकी सूचना एसएमएस के जरिये गोपाल गोयल को दी जाती थी जिसमें इस बात का उल्लेख किया जाता था कि कितने पैसे किसे पहुंचाना है.

पटना ब्लास्ट में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी है. लेकिन इस मामले में अखबारों और चैनलों की चुप्पी  हैरतअंगेज है।   इस पक्ष को मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग मूर्खता कह सकता है क्योंकि उनका यह तर्क होगा कि पटना, रांची से गिरफ्तार किये गये मुसलमानों को मीडिया ने आतंकवादी घोषित कर दिया तो विकास, पवन, गणेश और गोपाल को आतंकवादी क्यों नहीं कहा जा सकता, जबिक इनकी गिरफ्तारी कथित आईएम के पकड़े गये आरोपियों के इनपुट पर हुई है .

यहां  उजैर और तहसीन अखतर या कोई और मुस्लिम तब तक आतंकवादी नहीं कहे जा सकते जब तक कि उनके खिलाफ कोई ठोस सुबूत एनआई इकट्ठी नहीं कर लेती. रही बात विकास, पनव, गणेश और गोपाल की गिरफ्तारी की तो इस मामले में अखबारों और चैनलों ने जिस अंदाज में लिया है उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

पहला- अगर लखीसराय से पकड़े गये इन आरोपियों का संबंध अगर इस्लाम धर्म से होता तो क्या मीडिया का रवैया इतना ही नर्म और खामोश होता? दूसरा-क्या वे उनकी गरिफ्तारी की घोषणा मुस्लिम आतंकवादी के तौर पर नहीं करते?

हिंदुस्तान ने इस खबर को महज हवाला का धंधा मानते हुए खबर बनायी है. जागरण ने अपने अलग अलग एडिशन में इस खबर को अलग अलग तरह से लिया है. हां पटना एडिशन में लिखा है कि लखीसराय से आतंकी खातों का संचालन होता था. पर उसका भी ज्यादा ध्यान इस खबर को हवाला से जोड़ने भर की कोशिश भर है.

जबकि जागरण ने लखीसराय के एडिशन में शीर्षक दिया है “पाक आतंकी के चार मददगार गिरफ्तार” जबकि हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने हिंदी एडिशन का अनुवाद भर किया है. प्रभात खबर ने इस खबर का शीर्षक दिया है कि पाक से आये पैसे की जांच शुरू.

सवाल है कि किसी अखबार ने इन चार आरोपियों को आतंकवादी नहीं बताया है. पत्रकारिता धर्म भी यही है कि बिना साबित हुए किसी को आतंकवादी कैसे कहा जा सकता है. लेकिन इन अखबारों का यही व्यवहार क्या गैर हिंदुओं की गिरफ्तारी के वक्त था? नहीं. नहीं था.

कुल मिला कर अखबारों ने एनआईए की इस बड़ी सफलता को ऐसे देने की कोशिश की है जैसे इसका कोई संबंध पटना ब्लास्ट से हो ही नहीं. जबकि एनआईए ने लखीसराय पुलिस को अपने इनपुट के आधआर पर कार्रवाई करने को कहा था. तब जा कर इन चारों की गिरफ्तारी हुई थी. (साभारः नौकरशाही.कॉम)

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