जगन्नाथपुर सीटः ‘पंचमंगल’ के फेर में फंसी ‘मधु’ की ‘गीता’ !

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आसन्न झारखंड विधानसभा चुनाव में पश्चिमी सिंहभूम जिले की जगन्नाथपुर सीट सबसे हॉट सीट बन गई है। इस सीट को लेकर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है कि ‘मोदी वेब’ में गीता कोड़ा चुनाव जीतेगी या वे ‘पंचमंगली’ के फेर में फंस जायेगी।  

gita kodaइस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा दो बार विधायक रहे हैं। फलहाल उनकी पत्नी गीता कोड़ा जगन्नाथपुर से निर्दलीय विधायक हैं और वो एक बार फिर इसी सीट से भाग्य आजमा रही हैं। लेकिन इस बार गीता पांच मंगल के फेर में फंस गई हैं।

जगन्नाथपुर में 2 दिसबंर यानि मंगलवार को मतदान होना है और 23 दिसबंर यानि मंगलवार को मतगणना होगी।

इन दो मंगलवार के साथ तीन ऐसे मंगल भी हैं, जो गीता को हर तरफ से घेरने में कोई कसर नहीं छोड रहे हैं।

इन मंगल में पिछले बार झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ कर तीसरे स्थान पर रहे मंगल सिंह सुरेन भी शामिल है जो इस बार बीजेपी की ओर से दावेदारी पेश कर रहे हैं।

वहीं अगले मंगल के रुप में कांग्रेसी प्रत्याशी मंगल सिंह सिंकू है जो कि गीता के लिए काफी मुश्किलें पैदा कर रहे हैं।

जबकि तीसरे मंगल के रूप में जगन्नाथपुर के पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबेंगा हैं जो कि झामुमो प्रत्याशी के रूप में गीता को कडी चुनौती पेश कर रहे हैं।

geeta_madhuहालांकि जगन्नाथपुर सीट पर मधु कोड़ा का साल 2000 से कब्जा रहा है। साल 2005 में बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर कोड़ा निर्दलीय ही चुनावी मैदान में उतरे थे और निर्दलीय विधायक के रूप में मुख्यमंत्री बने थे। उसके बाद साल 2009 में मधु कोड़ा सिंहभूम के सांसद बने और उन्होंने विधानसभा में अपनी पत्नी गीता कोड़ा को चुनावी मैदान में उतार दिया।

बीते लोकसभा चुनाव में सिंहभूम सीट से मधु कोड़ा चुनाव नहीं लड़े और अपनी पत्नी गीता कोड़ा को मैदान में उतार दिया लेकिन काफी ऐड़ी-चोटी लगाने के बाबजूद वह चुनाव हार गई। उन्हें जहां कुल 215607 वोट मिले, वहीं उनके विरोधी  भाजपा प्रत्याशी लक्षमण गिलुआ कुल 303131 वोट लाकर विजयी हुये।

इसके पुर्व के चुनाव में मधु कोड़ा जेल में रहते हुये 256827 वोट लाकर विजयी हुये थे, वहीं उनके विरोधी कांग्रेस के बरकुवंर गगरई को 167154 वोट मिले थे।

पिछले विधानसभा चुनाव में गीता कोड़ा 25,740 वोट से विजयी हुई थी। उन्हें कुल 37,1145 वोट मिले थे जबकि उनके विरोधी भाजपा प्रत्याशी मात्र 11,405 वोट ही बटोर पाये थे।

इस बार पिछले 15 साल के विकास को लेकर तीनों मंगल गीता पर हमलावर रूख अपनाए हुए हैं, वहीं गीता अपने और अपने पति के कार्यों को लेकर चुनावी मैदान में विपक्षियों को जबाव देने में लगी है।

पिछली बार मधु कोड़ा के गिरफ्तार होने से गीता को फायदा मिला था, जिससे वो आसानी से सबको पछाड कर विधानसभा पहुंच गई।

बहरहाल इस बार परिस्थिति बिल्कुल अलग है। दो तिथिवार और तीन कदावार मंगल गीता को अमंगल करने में जुटे हैं।

अब ये देखना दिलचस्प होगा कि गीता कोड़ा  उन मंगलों का कैसे अमंगल कर पाती है या फिर खुद “पंचमंगली” का शिकार हो जाती है।  

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