सन्मार्ग में वापसी के बाद बावरे हो रहे हैं बैजू बाबा

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सन्मार्ग रांची में बैजनाथ मिश्र की वापसी के चंद रोज भी नहीं बीते कि डायरेक्टर प्रेमके साथ उनका शीतयुद्ध शुरू हो गया है. कारण है सूचना आयुक्त का मनोनयन. बैजनाथ मिश्र सूचना आयुक्त रह चुके हैं और इस पद पर अपने किसी चहेते का मनोनयन चाह रहे हैं. लेकिन जिन चार लोगों पर सहमति बनी है उनमें उनका चहेता शामिल नहीं हो पाया है. उनमें एक राजेश श्रीवास्तव हैं जो डायरेक्टर प्रेमके घनिष्ट मित्र और राज्य में विपक्ष के नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह के करीबी हैं.
बैजू बाबा उनका नाम विवादित बनाकर कटवाना और अपने करीबी को उस पद पर लाना चाह रहे हैं. इसके लिये गुपचुप तरीके से व्यूह रचना कर रहे हैं. प्रेम चाहते हैं कि उनके अखबार से राजेश श्रीवास्तव को मदद मिले जबकि बैजू बाबा राजेश की ही नहीं उनके पिता और उनके पूर्वजों तक की खुलेआम आलोचना कर रहे हैं. दूसरी तरफ अन्य संगठनों को उनके विरुद्ध भड़का रहे हैं. बैजू बाबा का दरअसल यही असली रूप है. रांची के मीडिया जगत में वे अपने संपादन कला के कारण नहीं बल्कि सेटिंग-गेटिंग की प्रवृति और क्षमता के कारण जाने जाते हैं. वे कुछ वर्ष पहले तक रांची एक्सप्रेस में सहायक संपादक थे.
जब हरिनारायण सिंह प्रभात खबर छोड़कर हिन्दुस्तान के संपादक बन गये और प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश को उनके विकल्प के रूप में किसी ऐसे पत्रकार की जरूरत पड़ी जिसकी झारखंड सरकार में पैठ हो तो उनके ध्यान में बैजू बाबा आये और उन्हें स्थानीय संपादक बना दिया. इस प्रकार बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा और बाबा संपादक बन गये. उस वक्त भी वे व्यक्तिगत पकड़ बनाने का काम करते थे. इसी की बदौलत सूचना आयुक्त बन गये. सन्मार्ग में भी वे अखबार पर कम और अपने करीबी लोगों को इच्छित पद पर बिठाने की कोशिशों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
अपनी पिछली पारी में वे यह काम जरा पर्दे में रहकर करते थे इस बार मान-मनौव्वल के बाद वापसी के कारण अहम ब्रह्मास्मि वाले भाव में आ गये हैं. वे प्रबंधन की कोई परवाह नहीं कर रहे. वे अपने आपको संस्थान की मजबूरी समझ रहे हैं.
             अंदर की खबर यह है कि सन्मार्ग में हरिनारायण सिंह के जाने के बाद जब संपादक का पद खाली हो गया तो प्रेम ने न्यूज-11 के संपादक दिलीप श्रीवास्तव नीलू को लाने का प्रयास किया था लेकिन नीलू इसके लिये हरी झंडी देने में हिचकिचा रहे थे. इधर न्यूज-11  नीलू जी बैजू बाबा को पचा नहीं पा रहे थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि एक वरिष्ठ पत्रकार जिसकी खबरों में कोई दिलचस्पी नहीं, कम्पूटर का ज्ञान नहीं उसका क्या उपयोग करें. दफ्तर में बैठकर राजनीति करने और सेटिंग-गेटिंग करने के एवज में मोटी रकम क्यों डी जा रही है. सीइओ अरूप चटर्जी भी दरअसल बैजू बाबा को जगह देकर कोई पुराना ऋण उतार रहे थे.
इस स्थिति में बैजू बाबा की विदाई करीब थी. बिल्ली के भाग्य से एक बार और छींका टूटा कि नीलू जी ने सन्मार्ग में जाने में टाल-मटोल की. बैजू बाबा ने अपने लोगों से प्रेमको सलाह दिलवानी शुरू की कि उन्हें मनाकर वापस ले जाया जाये. प्रेम ने ऐसा किया भी. बस बाबा का काम बन गया. अब उन्हें घर से लाने पहुंचाने के लिये एक लग्जरी गाड़ी मिल गई है. वे सुबह में एक बार आधे घंटे के लिये रिपोटर्स मीटिंग में आते हैं जिसमें कोई स्टोरी आइडिया या खोजी खबर पर कोई बात नहीं होती. सबसे उनका कार्यक्रमपूछा जाता है और हंसी मजाक के साथ मीटिंग संपन्न हो जाती है. शाम को डेस्क के साथ मीटिंग भी इसी तर्ज पर होती है.
बाबा की दिलचस्पी सिर्फ उन्हीं खबरों में होती है जिनसे उनका कुछ स्वार्थ जुड़ा होता है. सिद्धांत खूब बघारते हैं. सारे ब्यूरोक्रेटस और नेताओं को भ्रष्ट करार देते हैं और खुद उनकी हालत यह है कि सूचना आयुक्त के पद से हटने के एक साल बाद भी सरकारी बाडीगार्ड रखे हुए हैं जबकि इसका कोई प्रावधान नहीं है. राज के नौ बजते ही घर चले जाते हैं. प्रथम पृष्ठ का लीड क्या बन रहा है. कौन सी खबर कहां जा रही है इससे उन्हें कोई मतलब नहीं रहता. वेतन में विलंब के कारणों के संबंध में प्रेम उन्हें सबकुछ बता चुके हैं और यह भी कि एक बड़ा पेमेंट आनेवाला है इसके बाद वेतन नियमित हो जायेगा. लेकिन बैजू बाबा कर्मियों को समझाने की जगह प्रबंधन के विरुद्ध भड़काने का काम कर रहे हैं. उनका यह रूप किसी को पसंद नहीं आ रहा है. पता चला है कि नीलू जी से फिर नये सिरे से बात हो रही है और बाबा सुधरे नहीं तो कोई हैरत नहीं कि उन्हें एक बार फिर बाहर का रास्ता देखना पड़ जाये.
—एक पत्रकार की कलम से
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2 comments

  1. BHAI MUKESH

    BAHUT HO GAYA SIRF SANMARG KI BURAI KE ALAWA AUR KOI NEWS NAHI AAPKE PASS, KOI PURANI KUNNSH NIKAL RAHE HAI KYA

  2. प्रिय संजय सिंह जी,
    मेरी राजनामा.कॉम की किसी भी अखबार या मीडिया हाउस से व्यक्तिगत खुन्नस नहीं है। जो सूचनायें भेजी जाती है उसे प्रेषक द्वारा पत्रकारहित में अनुरोध किया जाता है। आपके खुन्नस के आरोपों के प्रतिउत्तर में उदाहरणार्थ जानकारी दे रहा रहा हूं…जो सूचना समाचार के साथ भेजी गयी है-
    ” narayan …… charkunar@gmail.com , 12 अगस्त (6 दिनों पहले)
    भाई मुकेश भारतीय जी
    अखबार के अन्दर पत्रकारों की पीड़ा को आप स्वर देते रहे हैं इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं लेकिन आपसे अनुरोध है कि कृपया खबर के साथ सोर्स का खुलासा न करें एक पत्रकार लिखकर खबर दाल दें आप तो जानते हैं कि अखबार के प्रबंधक कितने क्रूर होते हैं. उन्हें जरा भी भनक मिल गयी कि विरोध में ख़बरें कहाँ से जा रही हैं तो वे उत्पीडन पर उतर जायेंगे. ”
    …सबसे बड़ी बात की इस संबंध में प्रबंधन या संपादकीय विभाग द्वारा संपर्क करने पर कोई पक्ष भी नहीं दिया जाता है।

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