“बाबा” को दबोचने सन्मार्ग पहुंचे “बब्बर”

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राज़नामा.कॉम, मुकेश भारतीय। झारखंड की राजधानी रांची की पत्रकारिता में एक से एक धुरंधर भरे पड़े हैं, जो बिल्डरों- माफियाओं के इशारों पर नाचते फिर रहे हैं। ऐसा ही ताजा उदाहरण है- न्यूज़11 चैनल के एडीटर इन चीफ हरिनारायण सिंह का अचानक एक बिल्डर-माफिया प्रेम शंकरण की रहनुमाई में प्रकाशित दैनिक अखबार सन्मार्ग पहुंचना।

कहते हैं कि मधु कोड़ा के लूटराज में डूबकी लगाने वाले आला पत्रकार हरिनारायण सिंह पत्रकारिता के सेक्रेट बाबा यानि प्रधान संपादक बैजनाथ मिश्र को दबोचने के लिये सन्मार्ग पहुंचे हैं। चूकि श्री सिंह का श्री मिश्र की अपेक्षा वित्तीय राज प्रबंधन काफी मजबूत है, इसलिये उनका भारी पड़ना लाजमि ही है।

उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व इस अखबार के संचालक प्रेम शंकरण जो “कोड़ा राज” के दौरान दिन दूनी और रात चौगूनी रफ्तार से काली कमाई की है, अचानक मैनेज मास्टर के नाम से मशहुर संपादक रजत कुमार गुप्ता की जगह श्री मिश्र को प्रधान संपादक की जिम्मेवारी सौंप दी थी। जिसे श्री गुप्त नहीं झेल पाये और अखबार छोड़ दिया था। ताजा खबर है कि श्री सिंह के सन्मार्ग ज्वाइन करते ही श्री मिश्र भी अखबार की लग्जरी कार की जगह अपनी डायरी बैग समेट ऑटो पकड़ घर का रास्ता धर लिये हैं। हांलाकि कुछ लोगों का मानना है कि न्यूज़11 चैनल और दैनिक सन्मार्ग,रांची दोनों के संचालन का मुख्य बागडोर अप्रत्यक्ष तौर पर हरिनारायण सिंह के ही हाथ में रहा है। सिर्फ दिखावे के लिये दैनिक हिन्दुस्तान से इस्तीफा देने के बाद उनकी ये आवाजाही होती रही है। सनद रहे कि जब दैनिक हिन्दुस्तान प्रबंधन ने मधु कोड़ा एंव उनके लूट टीम से अंदरुनी सांठगांठ जैसे  आरोपों को लेकर स्थानीय संपादक के पद से श्री सिंह को मजबूरन विदा किया तो उन्होंने न्यूज़11 चैनल के एडीटर इन चीफ के अलावे दैनिक सन्मार्ग, रांची के प्रमुख सलाहकार संपादक का पद भार भी एक साथ संभाला।

बात कुछ भी हो। बहरहाल, दैनिक सन्मार्ग में झारखंडी पत्रकारिता के बब्बर यानि पत्रकार हरिनारायण सिंह कितने दिनों तक टिके रहेगें,कहना बहुत मुश्किल है। क्योंकि झारखंड में इस अखबार के फ्रेंचाइजी संचालक/संपादक प्रेम शंकरण जिस तरह से धाकड़ पत्रकारों का रस चुस कर गुठली फेंकने का काम कर रहा है,वह उसकी उस कुंठा को दर्शाती है, जिसे कोड़ा राज के दौरान कभी इन पत्रकारों ने ही पैदा किया था। यह सर्वविदित है कि बिल्डर-माफिया प्रेम शंकरण “कोड़ा लूट कंपनी” का एक अहम सदस्य माना जाता रहा है और अपने हाई प्रोफाइल प्रबंधन के काले धन की बदौलत पत्रकारिता में जड़ें मजबूत करता जा रहा है। जिसे मोटी रकम के लालची संपादक-पत्रकार नहीं समझ पा रहे हैं।

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