न्यूज़11 चैनल की कलंक कहानीः एक भुक्तभोगी की जुबानी

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राज़नामा.कॉम ( मुकेश भारतीय)। एक पुरानी कहावत है कि घर का भेदिया लंका ढाहे। अगर विभीषण न होता तो सोने की लंका न जलता और रावण न मरता। आज मित्र ने कुछ ऐसे ही सूचना दी। फेसबुक पर अपने एकांउट में फिलहाल साधना न्यूज चैनल में कार्यरत कुंदन कृतज्ञ ने रांची के ही न्यूज़11 चैनल के बारे में जिस तरह की पोल खोल रहे हैं, उसे राजनामा.कॉम उनकी ही शब्दों में हु-ब-हु सामने रख रहा है। इसमें कितनी सच्चाई है, राम जाने। हो सकता है कि किसी दुर्भावनावश इसे एक पक्षीय स्वरुप में ढाला गया हो।  लेकिन इससे इतना तो तय लगता है कि इसमें मीडिया हाउस को शर्मसार कर देने वाला एक बड़ा खेला अवश्य है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिये। क्योंकि अगर यह सच है तो हम ऐसी मीडिया को रखैल या वेश्या कहें तो उसका भी अपमान होगा।…..

“”””……… दो अगस्त, 2009 दिन रविवार, वीकली ऑफ का दिन हुआ करता था, आज भी वीकली ऑफ ही होता है….. अरूप का फोन आया कि किसी जरूरी काम से वह मिलना चाहता है….. भारी बरसात और छुट्टी होने कि वज़ह से मैंने साफ साफ़ मना कर दिया| थोड़ी देर में फोन दुबारा आया कि वह सहाय जी( रविन्द्र सहाय, जिन्हें हम आज भी प्यार से चाचा बुलाते हैं) के साथ मेरे घर आ रहा है, चाय बनवा के रखने का अनुरोध हुआ| बरसात में घर बैठे कुछ मित्रों के साथ चाय पिने का मज़ा मै भी खोना नहीं चाहता था, सो, चाय भी तैयार हो गयी |

घर आने के बाद अरूप ने सीधे सीधे सूचना दी कि वह झारखण्ड टीवी( केबल न्यूज़ चैनल) को खरीद रहा है और उसे एयरटेल के लीज लाइन से पूरे रांची में चलाएगा और सीधा सीधा निमंत्रण उसके द्वारा खरीदे जा रहे चैनल में जुड़कर काम करने की थी, इस ऑफर के साथ साथ कई तर्क भी थे, मसलन…. कब तक दुसरे मालिकानो के साथ काम करोगे, हमारे साथ जुड़ जाओ यह अपना चैनल होगा, हम सब मिलकर काम करेंगे, नयी कंपनी को नए मुकाम तक पहुंचाएंगे हमलोग मिलकर | मैंने और सहायजी ने मिलकर एकसुर में ही अरूप के इस प्रस्ताव को नकार दिया, क्योंकि हमलोग सेटेलाइट चैनलों में काम करने के बाद किसी ग्राउंड चैनल में काम करने को लेकर बिलकुल ही उत्साहित नहीं थे|

अपने इस प्रस्ताव को खारिज होता देख उसने तुरत में दूसरा प्रस्ताव दे दिया की इन परिस्थितियों में वह जल्द ही एक सेटेलाइट चैनल शुरू करेगा | बहुत जल्द ही ( दो से तीन दिनों के अन्दर) उसने कन्फर्म किया कि “प्रणाम न्यूज़” के नाम से नया चैनल शुरू होने जा रहा है| हम लोगों को एक सितम्बर, 2009 से योगदान करने के लिए प्रणामी बिल्डर्स के मालिक विजय अग्रवाल के द्वारा साईंन किया हुआ ऑफर लेटर मुझे और एक और सहकर्मी को मिल भी गया | 

उसके बाद शुरू हुआ पुराने मित्रों को “प्रणाम न्यूज़” से जोड़ने और जुड़ने का सिलसिला | कई मित्र आये जिसमे सर्वाधिक मित्र आये साधना न्यूज़ से जिसमे, मधुरशील, राकेश सिन्हा, राजीव रंजन, सहाय जी, ओमकार मिश्रा, आदित्य वर्मा, उमेश, अशोक अश्क( बोकारो), जीतेंद्र सिंह ( देवघर), राकेश सिन्हा( लोहरदगा), प्रिंस( सिमडेगा) तथा अजय एवं संतोष झा( पटना) प्रमुख रहे | कौशल एवं जीतेंद्र( जमशेदपुर) भी सहारा छोड़ कर पहुंचे, कई मित्र तो ऐसे थे जिन्होंने ऑफर लेटर लेकर भी अरूप के साथ जुड़ना मुनासिब नहीं समझा, उस समय तो उनकी नादानियों पर तकलीफ हुआ करता था, पर ऐसा नहीं मालूम था कि नादान वो नहीं हैं, वो हम सबों से ज्यादा समझदार हैं| एक शेर है न कि हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था…..मेरी कश्ती भी वहीँ डूबी जहाँ पानी ही कम था….| 

इसी बीच अरूप कि पैदाइश आदतों कि वज़ह से विजय अग्रवाल इस चैनल से अलग हो गए और इस प्रोजेक्ट और विजय अग्रवाल द्वारा लगाए गए पैंतीस लाख रुपये पर पूरी तरह से अरूप का कब्ज़ा हो गया | जैसे ही विजय अग्रवाल इस प्रोजेक्ट से अलग हुए तो इस प्रोजेक्ट से जुड़े विनोद सिन्हा, जी हाँ आप सब सही समझ रहे हैं वही विनोद सिन्हा जो पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के सहयोगी हुआ करते थे | विनोद सिन्हा रात में दस बजे के बाद नित्य दिन मंगल टावर आया करता था और हो रहे काम की प्रगति को देखा करता था, इसी बीच कई बार विनोद सिन्हा से प्रोजेक्ट को लेकर बात हुई, मसलन, कौन सा कम्प्यूटर लेना है, रूटीन स्टाफ के लिए कैसी कुर्सी होगी, कैंटीन कैसा होगा, एक बात यहाँ जरूर बताना चाहूँगा, विनोद सिन्हा जैसा मालिक अगर किसी संस्थान का हो तो वहां के स्टाफ कभी तकलीफ में नहीं आ सकते, वो अपने स्टाफों के लिए हमेशा चिंतित रहता था, ऐसे में ” प्रणाम न्यूज़” बदलकर हो गया ” न्यूज़ 11″| तब तक विनोद सिन्हा ने इस प्रोजेक्ट पर लगभग पचास से साठ लाख खर्च दिए थे |

 इसी बीच सत्रह अक्टूबर को दीवाली थी, विनोद सिन्हा ने अपने प्रतिनिधि से सभी लोगो की सैलरी का डिटेल मंगवाया, और अरूप को कहा की सब लोगो को एक एक महीने की सैलरी बोनस में दे देना और रात में ही पैसे कैश में भिजवा दिया, दीवाली से एक दिन पहले आठ लोगो को मिला पांच पांच हज़ार का तोहफा, बाकी बचे पैसों से अरूप ने अपनी दीवाली मनाई| 
ऐसे में मैं एक अहम् व्यक्ति का जिक्र जरूर करना चाहूँगा, जिनके बिना यह आप बीती अधूरी रहेगी, वो हैं मनोज श्रीवास्तव,जिन्होंने अपनी अच्छी खासी नौकरी और गृहस्थी छोड़ दी और चले आये रांची न्यूज़ 11 के चैनल हेड बनकर| हमलोगों के पोपा बाबा, जब हम सब परेशान होते तो एक साथ बैठकर भगवान् शंकर की पूजा करते प्रसाद चढाते और मज़े की बात उस पूजा में हमें कष्ट पहुंचाने वाला प्राणी भी हमारे साथ ही बैठकर भक्ति करता था|

29 अक्टूबर , 2009 रात दस बजे का समय रहा होगा, हम सब अपने अपने घर जाने की तैयारी कर ही रहे थे की कहीं से अरूप को खबर आयी की कल सुबह इनकम टैक्स का छापा पड़ने वाला है, फिर क्या था, पूरी रात काली हो गयी, रात के ढाई बजे मंगल टावर के नीचे हम सब मिलकर सभी कागजों की होली जला रहे थे, रातों रात कम्प्यूटर शिफ्ट किये गए, मोनिटर छोड़ दिया गया, केवल सीपीयु बदल दिए गए| 30 अक्टूबरकी सुबह बीती, 31 अक्टूबरकी सुबह बीती, कुछ भी नहीं हुआ, सुबह में हम सभी कांफ्रेंस कॉल पर मजा लेते रहे, लेकिन एक नबम्बर को वही हुआ जिसे सभी जानते हैं, छापा पड़ा और बड़े धूम से पड़ा ऐसा पड़ा की जोर का झटका जोर से लगा | विनोद सिन्हा लापता हो गए, और न्यूज़ 11 को शुरू होने से पहले ही लोगों ने ख़त्म मान लिया| आनन् फानन में चौदह नबम्बर को चैनल लौंच कर दिया गया, कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा | 

यहाँ से शुरू होती है अरूप की असली कहानी, झूठ, फरेब, धोखा, दगाबाजी, छल-प्रपंच, साम, दाम, दंड और भेद | दुनिया में जितने ऐब किसी इंसान में हो सकते हैं अरूप में सब दिखे, कुछ महिला कर्मचारियों को जबरन काम के नाम पर कोलकाता ले जाना, मतलब निकल गया तो ठीक नहीं तो वही से उस महिला कर्मचारी की छुट्टी| ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले, एक बार मैं उसके साथ मुंबई गया एक विज्ञापन एजेंसी से डील करने, हम ठहरे थे रांची के ही एक प्रसिद्ध उद्योगपति के गेस्ट हाउस में, वहां मुंबई में संवाददाता के पद के लिए एक सज्जन आये, अरूप ने सीधा पूछा, कोई लेडी रिपोर्टर रखे हो या नहीं, उसने जवाब दिया, हाँ, सर है एक| रात में लेकर आना उसे गेस्ट हाउस में, रात में वैसा ही हुआ, जैसा अरूप ने सोचा था, वो संवाददाता आया उस लेडी रिपोर्टर के साथ, पर गया अकेले, रात में दो बजे तक अरूप की मीटिंग चली दुसरे कमरे में जो अन्दर से बंद था| 

मुंबई से हम लौटे,हाथ में कुछ था तो नहीं लेकिन अरूप ने बड़ी ही चालाकी से कुछ ख़ास कंपनियों के विज्ञापन फिल्म का बीटा टेप हासिल कर लिया था | रांची वापस लौटने के बाद उन विज्ञापन फिल्मों का प्रसारण शुरू हो गया और मार्केट में खबर फैलाई गयी कि मुंबई से दस लाख रुपये महीने का विज्ञापन फ़ाइनल हुआ है, कितनीं सटीक प्लानिंग थी अरूप कि, मुंबई से नहीं कम से कम झारखण्ड में तो चैनल को अच्छा विज्ञापन प्राप्त हो |

इसी बीच एक अच्छी फिमेल एंकर कि जरूरत महसूस कि गयी और इसके लिए एक एंकर को ढूंढ निकाला गया,लेकिन अरूप ने ना जाने उसे क्या क्या ऑफर कर दिया,खुद से पिक – अप और ड्रॉप कि सुविधा तथा ना जाने क्या, क्या…. क्योंकि अरूप कि लालची नज़रों ने उसे बहुत काबिल करार दिया था| अगले दिन उस एंकर ने साफ़ साफ़ तो नहीं लेकिन ढके छुपे शब्दों में मना कर दिया, तब कहीं मधुरशील ने उसे समझा बुझा कर ज्वाइन कराया, आज भी वो एंकर वहां कार्यरत हैं| इस बीच हम सभी को,सभी का मतलब सभी कर्मचारियों को सैलरी के नाम पर कभी पांच हज़ार तो कभी दो हज़ार तो कभी बाबा जी का घंटा थमा दिया जता रहा | सैलरी कि समस्या आने लगी तो अचानक से एक दिन आउटपुट के सात- आठ लोग कुछ पैसे हाथ लगते ही रन डाउन का सारा डिटेल डिलीट कर के निकल गए, उनके प्रतिशोध का यह तरीका हमें काफी नागवार गुज़रा था, लेकिन बाद में समझ आया कि वेबसी में इंसान क्या कर जाएगा यह किसी को नहीं पता होता है|

उनके जाने के बाद तो सिलसिला शुरू हो गया , मधुरशील ने अचानक से आना बंद कर दिया फिर एडिटर -इन- चीफ़ के पद पर लाये गए एक भद्र इंसान श्री सुशील भारती को भी बहुत ही निराशाजनक परिस्थितियों में जाना पड़ा | अरूप को अब पैसे कि किल्लत सताने लगी थी और वो अपने करीब के लोगों से झूठ पर झूठ बोलता जा रहा था | मार्केटिंग टीम में कुल छः लोग रांची में और दो लोग पटना में थे, उन सबों कि सैलरी के लिए मेरा अरूप से रोज का विवाद होना शुरू हो गया, इसी बीच खबर आये कि आर्थिक तंगी के हालात से गुजरते हुए मेरी टीम के एक लड़के ने आत्म हत्या का प्रयास किया, उसके असफल प्रयास के लिए आज भी मैं ईश्वर का शुक्रिया अदा करता हूँ|

यहाँ आकर उस अरूप के ऊपर से मेरा रहा सहा विश्वास जाता रहा और हमारे बीच कि दूरियां बढती गयी| न्यूज़ -11 का एक गेस्ट हाउस हुआ करता था, लालपुर थाना के सामने| वहाँ मनोज श्रीवास्तव, राकेश सिन्हा, अफरोज जी तथा कुछ और लोग रहते थे, वहां से भी खबरें आने लगी कि अरूप जी दोपहर में कुछ महिला कर्मचारियों के साथ वहां देखे जाते हैं, कई बार सुनते सुनते एक दिन इस खबर कि पुष्टि भी हो गयी और आश्चर्यजनक तौर पर वह खबर सच निकल गयी | अपने पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए उसने इधर उधर हाथ पैर मारना शुरू किया और इसी बीच उसकी मुलाकात हो गयी हैदराबाद के एक बड़े बिजनेसमैन से, बड़ा तो वोह वाकई में बहुत था | वो झारखण्ड आया था, स्कूलों में कंप्यूटर लगाने के लिए और अरूप ने उसे समझा दिया चैनल में भागीदार बनने का रास्ता |

तय हुआ कि कोलकाता से एक बांग्ला चैनल कि शुरुआत की जायेगी नाम होगा, “न्यूज़-11 बांग्ला”, इस सिलसिले में वोह अक्सर कोलकाता आने जाने लगा, कभी वोह किसी महिला कर्मचारी के साथ जाता तो कभी दुसरे के साथ | उनके प्रस्थान करने के अगले दिन तक अगर उस महिला कर्मचारी को हटाने का फरमान अगर नहीं आता तो समझ जाना था कि वापस लौटने के बाद उस कर्मचारी का वेतन जरूर बढेगा और प्रमोशन भी होगा, ऐसे में कई महिला कर्मचारियों ने अपनी नौकरी खोयी और कईयों ने तो पता नहीं क्या पाया| जिनकी नौकरी जाती थी उनके लिए दुःख भी होता था और साथ ही साथ उनके लिए सम्मान भी बढ़ जाता था |

कोलकाता में तो ऐसा भी हुआ कि धनबाद की एक महिला कर्मचारी की पोस्टिंग हो गयी और अरूप को दूसरा आशियाना मिल गया| फिर दो- तीन महीने के बाद पता नहीं क्यों, अचानक से वोह मोहतरमा अपनी नौकरी छोड़ कर चली गयी, या फिर शायद निकाल भी दिया गया हो, कुछ पक्का मालूम नहो हो पाया| उस हैदराबादी मुर्गे ने कोलकाता में दो घंटे के अन्दर एक शानदार गेस्ट हाउस की व्यवस्था कर दी और अरूप को इस्तमाल करने के लिए टोयोटा कंपनी की ब्रांड नयी फोर्चुनर गाडी खरीद कर दी, आज भी अरूप उसी गाडी में घूमता नज़र आएगा, अरूप की पत्नी को उसके बेटे के जन्म दिन के मौके पर छह लाख रुपये का डायमंड नेकलेस उपहार के तौर पर दिया, न्यूज़-11 के कर्मचारियों के लिए भी कई अच्छे प्लान थे उसके पास, लेकिन कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती, अरूप ने वही किया जो उसकी फितरत है, खम्भा देखा नहीं की टांग उठा दिया, आज भी उस हैदराबादी से कानूनी लड़ाई चल रही है, वो फोर्चुनर भी सब – जुडिस मामला बन गया है|कितनी अच्छी खबर है, न्यूज़ 11 का मालिक चोरी की गाडी में घूमता है – सच है तो दिखेगा ….| 

इस कलंक कथा के कुछ अध्याय बीच में छोड़ कर मैं हाल की एक घटना के बारे में बताना चाहूँगा | जैसा की पहले अध्याय में मैंने लिखा था, कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा…भानुमती ने कुनबा जोड़ा| न्यूज़ 11 की शुरुआत हुयी थी एक किराये के लाइसेंस पर और इसकी अपलिंकिंग की गयी थी एसेल श्याम के ट्रांसपोंडर से | दोनों( लाइसेंस और ट्रांसपोंडर) का किराया था बारह लाख रुपये मासिक| इसके एवज में भुगतान किया जाता था किश्तों में, इसलिए कभी एसेल श्याम तो कभी लाइसेन्स वाली कम्पनी की ओर से चैनल का प्रसारण कुछ समय के लिए बंद करवा दिया जाता था, पुनः प्रसारण तब शुरू होता था जब उनके अकाउंट में कुछ पैसे जमा करवा दिए जाते थे |

इन परिस्थितियों से आजिज आकर एस्सेल श्याम ने मीडिया इलेवन पर चेक बाउंस का मुक़दमा करवा दिया| जिसमे नाम आया अरूप चटर्जी, श्रीमती अरूप चटर्जी और हरिनारायण सिंह का| तीनों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज होने के बाद अब जरुरत हुयी जमानत लेने की| इस शातिर दिमाग ने बड़ी ही चालाकी से दिल्ली वाले वकील के पास अपना और अपनी पत्नी का वकालतनामा भिजवा दिया और हरिनारायण सिंह का वकालतनामा नहीं पहुँच पाया|

 इसके पीछे एक सोची समझी साज़िश थी की अदालत से अरूप के गुनाहों की सज़ा में वोह तो साफ़ साफ़ बच जाए और फंस जाएँ हरिनारायण सर | यह तो उनकी किस्मत या संयोग ही था की जिस दिन कोर्ट में केस लगना था उसके एक दिन पहले ही हरिनारायण सर को वकील के द्वारा भेजा गया सन्देश प्राप्त हो गया| इसकी जानकारी मिलते ही हरिनारायण सर ने न्यूज़ 11 से हटने का फुल एंड फ़ाइनल फैसला कर लिया| वो ऑफिस से निकले और फ्लाइट लेकर सीधा दिल्ली कूच किये और जाकर जरुरी कारवाई को अंजाम दिया|

ऐसा नहीं करने पर अंदाजा लगाया जा सकता है की परिणाम क्या हो सकता था? जिस चेक को जारी करने से पहले उनसे किसी प्रकार का सलाह मशविरा नहीं किया गया उसमें खामख्वाह हरिनारायण सर पार्टी बना दिए गए थे | उस दिन जो वो मंगल टावर की सीढ़ियों से उतरे, फिर दुबारा उधर मुड कर नहीं देखा | जमानत लेने के बाद अरूप निश्चिंत हो गया की अब तो कुछ होने वाला नहीं, पर दो मार्च की सुबह लगभग सात बजे का वक़्त रहा होगा जब दिल्ली पुलिस की विशेष टीम इन्हें गिरफ्तार करने न्यूज़ 11 के ऑफिस पहुँच गयी| आनन् फानन में खबर अरूप को भिजवाई गयी, उसको तो काटो तो खून नहीं वाली स्थिति थी क्योंकि पुलिस के नाम पर हालत खराब हो जाती है उसकी | फिर जिस वकील ने जमानत दिलवाया था उस से संपर्क किया किया और कोर्ट के आर्डर की कोपी मेल मेल पर मंगवाई गयी|

तब जाकर दिल्ली पुलिस की टीम मानी और पांच हज़ार रुपये नजराना लेकर वापस गयी | अपने आप में एक इतिहास रच गया यह घटना, एक मीडिया हाउस का मालिक पुलिस को रिश्वत कहिये या नजराना देता है | मेरे इस लेख से बहुत लोगों को बुरा लग सकता है जो न्यूज़ 11 में कार्यरत हैं, लेकिन मेरा मकसद उनकी भावनाओं को चोट पहुंचाना नहीं है| मेरा मकसद है उन्हें आगाह करना, क्योंकि वो शख्स जब हरिनारायण सर के साथ धोखा कर सकता है तो बाकी लोग किस खेत की मूली हैं|

“न्यूज़-11 बांग्ला” खुलवाने के चक्कर में वोह हैदराबादी लगभग एक करोड़ रुपयों से हाथ धो बैठा था, वज़ह केवल एक ही थी, हैदराबादी सीधे ज्वाइंट अकाउंट से एसेल श्याम को पैसे देने के पक्ष में था, जब की अरूप चाहता था की वो पैसे पहले इसके ( प्रणामी कम्युनिकेशन) अकाउंट में डाले जाएँ, मतलब साफ़ था, वोह उन पैसों में चार चाँद लगाना चाहता था| वहीँ पर हैदराबादी को शक हुआ और उसने एक बन्दे को काम सीखने के बहाने यहाँ मंगल टावर में प्लांट करवा दिया | वोह बंद यहाँ कुछ दिन ही रहा, फिर क्या था’ दूध का दूध और पानी का पानी हो गया| आज भी कोलकाता में क्रिमिनल केस चल रहा है, जिसमें वो फोर्चुनर गाड़ी भी एक अहम् मुद्दा है| केस – वेस के मामले में अरूप बहुत बहादुर व्यक्ति है, सहारा समय के लिए काम करते करते ही इस पर कई केस लद चुके थे, जिसमे एक बंगाली लड़की को जबरदस्ती बांग्लादेशी लड़की साबित करने के कारण पश्चिम बंगाल सरकार ने एक मुक़दमा दायर कर रखा था, जिसके लिए एक बार यह पश्चिम बंगाल पुलिस के द्वारा रांची में गिरफ्तार भी किया जा चुका था, उस समय इसकी जान बचाई थी तत्कालीन एस एस पी श्री एम्. एस. भाटिया ने|

उसके पहले भी इस पर एक संगीन मुकदमा खुद इसकी पत्नी ने आसनसोल कोर्ट में दायर कर रखा था जिसमें उसने ( श्रीमति अरूप) जान से मारने की आशंका जताई थी, गाहे बगाहे आज भी उस केस के सिलसिले में अरूप को आसनसोल कोर्ट में हाजिर होना होता है| अब अरूप की पत्नी की बात चली है तो एक हादसे के बारे में बताना चाहूँगा, उसके पहले एक जानकारी शेयर करना चाहूँगा, अरूप की पत्नी बेबी भाभी के बारे में, बहुत ही सक्षम, संस्कारवान, गुणी और सहनशील महिला हैं वो | जब भी अरूप से मारपीट होता वोह सीधे किसी ना किसी सहराकर्मी को फोन करती और मदद की गुहार लगाती, आज भी भुजंग जी( पूर्व ब्यूरो प्रमुख, सहारा समय, रांची) को राखी बांधती हैं और गाहे बगाहे मुसीबत के समय याद करती हैं|

 बात चल रही थी हादसे के बारे में, हुआ यूं कि न्यूज़ 11 में अमूमन मैं नौ- सवा नौ बजे तक दफ्तर पहुँच जाता था, एक सुबह जैसे ही ऑफिस में दाखिल हुआ कि लैंड लाइन फोन कि घंटी बजी, किसी दुसरे स्टाफ के अनुपस्थिति में जब फोने उठाया तो एक जानी पहचानी आवाज़ सुनाई दी, पूछा ” अरूप है?” मैंने भी सवाल के जवाब में सवाल किया ” भाभी?” उधर से उत्तर आया, ” हाँ, कौन? कुंदन जी” मैंने भी कहा” जी, भाभी” | तब शुरू हुआ चर्चा का दूस्र्ता दौर, ” आज कल अरूप बहुत लड़ाई करता है, क्या बात है?” मैंने कहा, ” मालूम नहीं; कुछ ख़ास ” बोली.” हाँ, पिछले डेढ़ महीने से घर में राशन का खर्चा नहीं दे रहा है, रोज रात में जाने कहाँ कहाँ से दारु पीकर आता है, सुबह में घर के लिए पैसा मांगो तो मारने दौड़ता है, मैं क्या करूँ? घर में बेटा है, ड्राईवर संतोष है और ना जाने कहाँ से कुत्ता भी लाकर रख दिया है, अब उनको तो भूखे नहीं रख सकती हूँ ” मैंने कहा” आता है तो बात करता हूँ” वो बोली” भैया, चर्चा भी मत करना, नहीं तो रात में आएगा और लड़ाई करेगा, वो आता है तो केवल मुझे बता देना” मैंने भी सकारात्मक जवाब देकर फोन रख दिया| अरूप अगले पांच मिनट में ऑफिस पहुँच गया, जब तक वो ऑफिस पहुंचता तबतक, भाभी का फोन तीसरी बार आ चुका था| जैसे ही वो ऑफिस में घुसा फोन चौथी बार बजा, इसके पहले कोई कुछ कहता या पूछता, अरूप ने फरमान जारी किया, “अगर मेरी वाइफ का फोन हो तो कह देना मैं ऑफिस में नहीं हूँ”| बेचारी नीतू, फोन उठाया और वैसा ही कहा जैसा उसे आदेश मिला था | बेबी भाभी का पूरे दिन दस से पंद्रह बार मेरे मोबाइल पर फोन आया, लेकिन मैं उनकी कोई मदद नहीं कर सका |

इसबीच, न्यूज़ 11 में आतंरिक तौर पर कई बदलाव हुए….. मसलन श्री हरि नारायण सिंह ने संस्था ज्वाइन किया, उन्हें पद दिया गया एडिटर-इन- चीफ | उनको ज्वाइन करवाने का मकसद सिर्फ और सिर्फ एक ही था किसी तरह से पोलिटिकल, बिजिनेस, सरकारी महकमे में चैनल कि साख को भुनाया जाए, जिसमे मौजूदा हालात में उनसे ज्यादा बढ़िया विकल्प नहीं हो सकता था |
मैंने विज्ञापन का सोर्स बढाने के लिए पटना के एक विज्ञापनदाता से बात की, वो बहुत ही उत्साहित नज़र आया, हालाँकि पटना क्या समस्त बिहार में कहीं भी इस चैनल का प्रसारण नहीं होता था | इस दौरान करते कराते मेरा सैलरी का बकाया बढ़कर लगभग डेढ़ लाख रूपया हो गया था |

 सोलह मार्च, 2010 को दो हज़ार रुपये अडवांस लेकर मैं पटना गया, उस विज्ञापनदाता से मुलाकात करने, सत्रह मार्च को मीटिंग चल ही रही थी कि मेरी पत्नी का फोन आया,” माँ नहीं रहीं!!!!!!!” मेरी माँ जो पिछले दो साल से किडनी कि समस्या से जूझ रही थी, वो गुज़र गयी थी!!!!! भला हो उस विज्ञापनदाता का जिसने आनन् फानन में एक गाडी का इंतज़ाम करवाकर मुझे रांची भेजने का इंतज़ाम किया, रात सवा दस बजे मैं रांची घर पर पहुँच…… पूरे रास्ते सभी का फोन आया,क्या मित्र, क्या शत्रु, क्या सगे सम्बन्धी , सांत्वना देने, ढाढस बंधाने……नहीं आया तो अरूप का फोन….. बीस मार्च को हारकर मैंने अरूप को फोन किया, बोला कुछ पैसा चाहिए था, जरुरी है| अरूप ने बड़ी सहजता से पूछा ” कितना???” मैंने बोला” कम से कम दो महीने कि सैलरी का भुगतान कर देते तो अच्छा होता!!!!” बोला “ठीक है” | पैसे मांगने के आठ दिनों के बाद, अट्ठाईस मार्च को एकाउंट वाले असित दा लेकर आये, बीस हज़ार रुपये!!! इन पैसों को देते समय जितना वो शर्मिन्दा महसूस कर रहे थे उसका एक हिस्सा भी अगर वो( अरूप) शर्मिन्दा महसूस करता तो उस समय मैं उसे गालियाँ नहीं देता| उस दिन ही मैंने फैसला ले लिया था, ज्यादा दिन तक यहाँ रहने वाला नहीं था मैं…..|

ठगी, धोखाधडी, विश्वासघात, साज़िश ये सभी शब्द अरूप के सामने बौने नज़र आते है, इसकी खासियात यह है की यह अपनों के साथ जिस शातिराना अंदाज़ में विश्वासघात करता है उतनी ही सफाई से यह दूसरों के साथ भी सलूक करता है | झारखण्ड में कई गाड़ियों के पीछे आपको लिखा मिल जाएगा” सटले त गेले बेटा”, वही हाल अरूप का भी है, इसके पीछे भी लिखा है”सटले त गेले बेटा”, लेकिन हम आम इंसान ही हैं की नहीं पढ़ पाते हैं| हैदराबादी की कहानी निपट चुकी थी, ऐसे में उसने तलाश शुरू की नए मुर्गे की| और विश्वास करिए, उसे एक नया मुर्गा मिल भी गया| वो भी शहर की एक जानी मानी हस्ती, जी हाँ उनका नाम है श्री विनय प्रकाश, जो मालिक हैं होटल ली लैक के | अरूप और विनय जी के साथ समझौता हुआ, मीडिया इलेवन में पार्टनरशिप को लेकर|

इस सौदे से उत्साहित विनय जी ने लगभग साठ लाख रुपये मीडिया इलेवन के अकाउंट में जमा करवा दिए, श्री दीपक अम्बष्ठ जी उनके प्रतिनिधि के तौर पर न्यूज़ 11 के ऑफिस में बैठने भी लगे | मज़ा तो तब आ गया जब उस समझौता पत्र पर अरूप अपना औटोग्राफ देने से कतराने लगा | अभी शादी पूरी भी नहीं हुयी थी की तलाक हो गया, विनय जी अपने पैसों के लिए दबाव बनाते रहे, पैसा नहीं मिलने की सूरत में कानूनी लड़ाई की नौबत आ गयी |

तब इस कानूनी लड़ाई से सबको बाहर निकाला शहर के दुसरे ठग ने जिसके खिलाफ अभी अभी माननिय मुख्यमंत्री ने एसआईटी की घोषणा की है, उनका नाम है जयंत दलाल नंदी | नंदी जी ने तब उन पैसों की गारंटी ली पर उन पैसों का भुगतान आज तक नहीं हुआ | उसी समय रातों रात नंदी ने पूरे शहर में होर्डिंग और बैनर लगवा दिया” संजीवनी का है यह नारा, न्यूज़ 11 है परिवार हमारा” नंदी ने जिस तेजी से रातों रात यह सब किया, उसी तेजी से अरूप ने रातों रात न्यूज़ 11 के नाम पर कालिख पुतवा दिया, अपने ही चैनल के नाम पर काला रंग से पेंटिंग करवा दिया |

सबसे मज़े की बात तो यह जब दैनिक हिन्दुस्तान ने 26 अप्रैल के अपने अंक में पृष्ठ दो पर अरूप का एक तरफ़ा बयान प्रकाशित भी कर दिया | उस बयान में कई विरोधाभास खुद में हैं, मसलन ढाई करोड़ के समझौते में ढाई लाख का चेक बाउंस करने से समझौता रद्द नहीं हुआ करता है, अभी हाल ही में संजीव नंदी के फ्लैट पर जो गाड़ियां पुलिस छापे में पाई गयी है उसमें सफ़ेद रंग की पजिरो गाडी किसकी है, उसने अगर पुलिस विभाग में नंदी के खिलाफ शिकायत की थी तो फिर नामकुम में संजीवनी के लोगों द्वारा की गयी गोली बारी में वो उसी पुलिस विभाग में पैरवी क्यों कर रहा था??? जो चैनल विज्ञापन नहीं मिलने की वज़ह से माननीय मुख्यमंत्री के खिलाफ निगेटिव खबर चला और दिखा सकता है तो फिर उसने संजीवनी के खिलाफ खबर आज तक क्यों नहीं चलायी, इस से उसका दुहरा लाभ होता , चैनल की साख एक अच्छे चैनल के तौर पर बनती और विज्ञापन मिलता सो अलग, लेकिन अरूप का फायदा संजीवनी के बारे में निगेटिव खबर दिखाने से नहीं होने वाला था, उसका ध्यान था इस से भी बड़े फायदे पर |

कहा तो यहाँ तक जा रहा था की अरूप ने संजीवनी में पार्टनरशिप कर लिया था, संजीवनी में उसका आना जाना बढ़ गया और वहां उसके बैठने के लिए अलग से व्यबस्था भी कर दिया गया था | हर फिल्म की भांति इस फिल्म का भी अंत उसी तरह से हुआ जैसा अपेक्षित था, सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या ??? 
धनबाद से एक कंपनी का संचालन होता है नाम है उसका रेनबो ग्रुप, जिसके मालिक हैं रमानी साहब, अरूप की पुरानी वाकफियत है रमानी साहब से, काम है उनका एक नॉन बैंकिंग फाईनांस कंपनी का संचालन, यहाँ से प्रेरणा लेते हुए तब अरूप ने भी एक ऐसी ही संस्था की परिकल्पना की और उसका नाम रखा केयरविजन इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड एग्रोटेक लिमिटेड |
अब इसके आगे पढ़िएगा कि कैसे और क्या काम करता है केयरविजन इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड एग्रोटेक लिमिटेड, कौन कौन है इस संस्था के पीछे, इस संस्था के द्वारा जिन पैसों की वसूली की जा रही है वो पैसे कहाँ जा रहे हैं, कौन है वो व्यक्ति जिसने अरूप को उस के घर होने वाली इनकम टैक्स छापे की खबर एडवांस में दी थी, आयकर विभाग का वो कौन अधिकारी है जो न्यूज़ 11 के द्वारा प्रायोजित टूर पर बाबा भोले के दर्शन करने गया था, किसके नाम की धमकी दी जाती थी गिरिडीह के टीएमटी व्यवसायियों को, आर के अग्रवाल जो राज्य सभा चुनाव के उम्मीदवार थे, जिनके सवा दो करोड़ रुपये आयकर विभाग ने पकडे थे, उनके साथ क्या नाता है अरूप चटर्जी का, क्या बताते हैं दोनों के टेलीफोन डिटेल.. ?

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