न्यूज़ चैनलें बन रही है जोकरय का अड्डा

Share Button

mediaकोई जन आंदोलन हो या मनोरंजन की दुनिया की कोई घटना या फिर देश-दुनिया की कोई अन्य खबर, उसे लोगों तक पहुंचाने और उसके सही मायने बताने में मीडिया की भूमिका अहम होती है. लेकिन जब चौथा स्तंभ कहा जानेवाला मीडिया ही टीआरपी चे चक्कर में पत्रकारिता को ताक पर रख कर सनसनीखेज और सस्ती खबरों को परोसने लगे तो पत्रकारिता का मतलब क्या रह जायेगा.

भूत-प्रेत या बाबाओं की खबरों से निजात मिलती है तो राजनीतिक-सामाजिक खबरों को किसी तमाशे की तरह सामने रख दिया जाता है. हर खबर को ब्रेकिंग न्यूज की तरह चलाने की प्रवृति परवान चढती जा रही है.

किसी घटना के बाद अगर खबर को  राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में या फिर घटना क्यों महत्वपूर्ण है, इसे देखने-समझने की कुलबुलाहट देखने वाले में है तो वह झूंझला सकता है कि सीमित जानकारी में कोई रिपोर्टर और एंकर कैसे घंटों निकाल देते हैं. 

जाहिर है जब समझ का दायरा खबरों को परोसने के तरीके से लेकर खबर को खबर न समझकर उसे तमाशे जैसा रखने-दिखाने में जा सिमटा हो, तब पत्रकारिता का मतलब बचेगा कहां.

सेकंड और मिनट को गूंथते हुए हर आधे घंटे की प्रोग्रामिंग की सफलता उसे के मत्थे चढती है जो लगातार सनसनाहट भरा स्वाद खबरों के जरिए परोसता रहे; जिसमें मनोरंजन का तङका हो, जिसमें रिपोर्टर की जोकरई या एंकर की नासमझी भी देखने वालों में उत्सुकता जगा दे, तो भी चलेगा. जब ऐसी प्रवृति होगी तो न्यूज चैनल का आलोचना होना लाजमी है. आज देश को वाकई एक ऐसे राष्ट्रीय स्तर के न्यूज चैनल की जरूरत है, जो सही मायने में खबरों की पङताल करे और निष्पक्ष रूप से खरी खबर दिखाये.

किसी खबर पर जनमत तैयार करने की स्थिति पैदा करे. जो सरकार पर निगरानी का काम भी करे और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में चेक ऐंड बैलेंस की भूमिका में रहे, जिसे देखने वाले उसे विश्वसनीय माने और देश में उसकी साख हो.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...