नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर रांची ने रच दिया इतिहास

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झारखंड की राजधानी रांची अवस्थित पहाड़ी मंदिर पर रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने बटन दबाकर देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया। तिरंगा फहरते ही ग्लाइडर से पुष्प वर्षा भी हुई। मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित पहाड़ी मंदिर कमेटी के सैकड़ों सदस्य उपस्थित थे।

मोरहाबादी मैदान में हुआ  मुख्य समारोह

parikarइसके बाद मुख्य समारोह मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में हुआ। यहां रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समारोह को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संबोधित किया।  

यहां हजारों बच्चों और लोगों की उपस्थिति में रक्षा मंत्री ने डिफेंस यूनिवर्सिटी का ऑनलाइन शिलान्यास किया। पूरा शहर उत्सवी माहौल में दिखा। इससे पूर्व, सड़कों पर बच्चों की टोली कॉर्निवल के रूप में मोरहाबादी मैदान तक पहुंची।

 एक नजर में पहाड़ी मंदिर

pahari mandirभगवान शिव का यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था के साथ देशभक्तों के बलिदान के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां 15 अगस्त और 26 जनवरी को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से फहराया जाता है। यहां यह परम्परा 1947 से ही चली आ रही है।

पूरी रात चली ट्रायल

तिरंगे के ट्रायल ने कई बार दिल धड़काया। ट्रायल शुक्रवार को पूरी रात चली। लेकिन, पहाड़ी बाबा के लिए अहले सुबह बजने वाले घंटे की आखिरी ध्वनि जैसे ही थमी, तिरंगा अपने स्थान पर जाकर फिट हो गया। इसे देखकर मौजूद इंजीनियर, स्टाफ और समिति के लोग हैरान रह गए। सबने बाबा को प्रणाम किया।

मोटर में आ गई तकनीकी खराबी

ट्रायल के दौरान उर्मिला आरसीपी कंस्ट्रक्शन के मो. अरमानुद्दीन, वालमोंट के मो. शब्बीर, मुस्तफा, पुरुषोत्तम समेत अन्य लोग मौजूद थे। ट्रायल शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे शुरू हुआ। सभी काम में जुटे थे। तभी रात करीब 12:30 बजे मोटर में तकनीकी खराबी आ गई। पहले तो सभी परेशान हो गए, लेकिन जब पता चला कि खराबी मामूली है, तब सबने राहत की सांस ली। पहाड़ी मंदिर सुरक्षा समिति के प्रमुख हेमेंद्र प्रताप सिंह रात डेढ़ बजे मशीन ठीक करने के लिए आवश्यक औजार लेकर आए।

 बज रहा था मंदिर का घंटा

san_flag_morhabaटीम फिर काम में जुट गई। करीब 45 मिनट बाद झंडा आगे बढ़ा। रात ढाई बजे पता चला कि झंडे की रस्सी मंजिल से तीन मीटर छोटी पड़ गई है। फिर वही बेचैनी। अब क्या होगा। काफी सोच-विचार के बाद रास्ता निकला। सुबह 4:45 बजे फिर झंडे को ऊपर चढ़ाना शुरू किया। झंडा कुछ ही ऊपर चढ़ा था कि एक अलग सी आवाज आने लगी। ऐसा महसूस हुआ कि मोटर में कोई गड़बड़ी हुई है, जिससे फिर आवाज आ रही है। जांच में पता चला कि मशीन नहीं, मंदिर का घंटा बज रहा है। सबने चैन की सांस ली। जैसे ही घंटे की अंतिम ध्वनि थमी, तिरंगा मास्टहेड के नीचे जाकर फिट हो गया।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को है लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के मौके पर शनिवार को ही गणतंत्र दिवस सा नजारा दिखा। पूरा शहर देशभक्ति के जुनून में डूबा रहा। सुबह से ही लोगों की आंखें पहाड़ी मंदिर की ओर टकटकी लगाए थीं। मोरहाबादी स्थित फुटबॉल स्टेडियम में तो मानो देशभक्तों का कारवां ही उतर गया हो। मौका था रांची में देश के सबसे लंबे तिरंगे के ध्वजारोहण का।

रक्षा मंत्री ने भी कहा, आज ही लग रहा गणतंत्र दिवस है

सुबह से ही नन्हें-मुन्ने बच्चे हाथों में तिरंगा झंडा लेकर कॉर्निवल के रूप में स्टेडियम में जुटने लगे थे। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के पहुंचते ही सभी ने अपनी सीट से उठकर उनका अभिवादन किया। बच्चों और लोगों के उत्साह को देखते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर को भी बोलना पड़ा कि आज ही गणतंत्र दिवस सा नजारा लग रहा है।

कहीं ढोल तो कहीं झूमर पर तिरंगे का सम्मान

पहाड़ी मंदिर पर फहराए जाने वाले तिरंगे का लाइव टेलीकास्ट स्टेडियम में हो रहा था। खचाखच भरे स्टेडियम में लगभग 20 हजार लोगों की निगाहें एलईडी स्क्रीन पर टिकी थीं। जैसे ही रक्षा मंत्री ने झंडा फहराने के लिए बटन दबाया, तालियों की गड़गड़ाहट और ढोलक के साथ झूमर की धुन पर बच्चों ने डांस कर तिरंगे काे सम्मान दिया।

घुड़सवार और ग्लाइडर आकर्षण का केन्द्र

स्टेडियम के अंदर दो घोड़े पर तिरंगा लेकर चल रहे घुड़सवार आकर्षण का केन्द्र बने हुए थे। मैदान के चारों ओर घुड़सवार अपनी पीठ से तिरंगा लगाकर लोगों का स्वागत कर रहे थे। एक ओर एनसीसी का एयर फ्लाइंग शो भी लोगों में अचरच भर रहा था। एयर फ्लाई शो में ग्लाइडर के दो मॉडल ने जब उड़ान भरी तो लोगों की निगाहें वहीं थम सी गई। जैसे-जैसे रफ्तार तेज हुई उत्सुकता बढ़ती गई। भारतीय विमान जब हवा में लहराया तो पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा।

 मोरहाबादी में मेले सा माहौल

देश के सबसे ऊंचे तिरंगे को फहराने के मौके पर रांची शहर में गजब सा उत्साह दिखा। हर रोड, नुक्कड़ पर एक ही चर्चा कि हमारे देश का सबसे ऊंचा तिरंगा रांची में लहराने जा रहा है। हर कोई सीना चौड़ा कर रांची जिला प्रशासन और पहाड़ी मंदिर विकास समिति का धन्यवाद करते नहीं थक रहा था। मोरहाबादी में तो मानों लोगों का रेला उमड़ पड़ा हो। हर ओर भीड़। लेकिन पूरी तरह अनुशासित। कतारबद्ध होकर स्टेडियम के अंदर जाते बच्चे और बड़ों की अदब बता रही थी कि देश का सम्मान सबसे बड़ा है।

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