नीतीश-लालू का खूंटा उखाड़ने के फेर में दांव लगे मोदी

Share Button
Read Time:6 Minute, 16 Second

देश के किसी भी प्रधानमंत्री ने शायद ही पहले कभी किसी विधानसभा चुनाव में अपने आपको इस तरह नहीं झोंका जैसे नरेंद्र मोदी ने बिहार में झोंका है। उन्होंने एक तरह से बिहार में अपनी प्रतिष्ठा को ही दांव पर लगा दिया है।

modi amitचुनाव की तारीखें घोषित होने से पहले ही तीन बड़ी रैलियों के जरिए चुनाव प्रचार शुरू कर चुके मोदी की कुल 22 चुनावी रैलियों का कार्यक्रम बना था, लेकिन बाद में तय हुआ कि वे सूबे के लगभग सभी जिला मुख्यालयों पर यानी करीब 40 रैलियों को संबोधित करेंगे। इस धुआंधार प्रचार के दो ही मतलब निकलते हैं। या तो उन्हें इस बार भी बिहार में लोकसभा चुनाव जैसी लहर का भरोसा है या फिर वे मान रहे हैं कि मुकाबला कांटे का है।

वजह जो भी हो, बिहार का चुनाव पूरी तरह सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी का एकल शो बन गया है। उनके अलावा अगर भाजपा के किसी और नेता का थोड़ा-बहुत जलवा है तो वह है मोदी के सिपहसालार अमित शाह का। उनकी कमान में भाजपा और संघ परिवार के कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग और भाजपा के बाकी तमाम नेता अप्रासंगिक हो गए हैं।

सुशील मोदी, राजीव प्रताप रूढ़ी, राधामोहन सिंह, मंगल पांडेय, नंदकिशोर यादव आदि भाजपा के तथाकथित राज्य स्तरीय नेता ही नहीं बल्कि राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अनंत कुमार, रविशंकर प्रसाद और दलित-महादलित-अतिपिछड़ा राजनीति के स्वयंभू चैंपियन रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुमार कुशवाह आदि जितने भी बड़े नामधारी नेता हैं वे सब भी सैनिकों की जमात का हिस्सा भर हैं।

किसिम-किसिम की जातियों वाले बिहार को जीतने के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने महंगे हाईटेक चुनावी साधनों और संगठनात्मक मशीनरी के जरिए लड़ाई को ऐसा बना दिया है कि उनको चुनौती दे रहे महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव तिनकों की तरह हेलिकॉप्टर लिए यहां से वहां उड़ रहे हैं। उनके पास न तो पर्याप्त साधन हैं और न ही सुगठित संगठनात्मक ढांचा। उन्हें उम्मीद है तो सिर्फ अपने मौन मतदाता से।

नरेंद्र मोदी को इस बात का अच्छी तरह अहसास है कि बिहार में जीत या हार दोनों उन्हीं के खाते में दर्ज होगी। इसलिए वे अपनी कोशिशों में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं। मोदी के लिए बिहार की जीत एक ऐसा मील का पत्थर होगी जिससे वे ऐसे सर्वशक्तिमान हो जाएंगे कि क्या भाजपा, क्या सहयोगी दल, क्या संघी सूरमा, क्या मीडिया और क्या मंत्रिमंडलीय चेहरे सबके सब साष्टांग करते दिखेंगे।

इसलिए यह मुमकिन है कि मोदी-शाह की जोड़ी ने सामान्य जीत की संभावना को रिकार्डतोड़ जीत में बदलने का मिशन बनाकर ही इस तरह अपने आपको चुनाव में झोंका हों। अगर बिहार में कल्पनातीत जीत मिल गई तो उससे उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल में भी मोदीत्व की हवा बनेगी, जहां आने वाले दो साल के भीतर विधानसभा के चुनाव होने हैं।

मोदी के अपने आपको इस तरह चुनाव में झोंक देने की दूसरी वजह बिहार की जमीनी हकीकत भी हो सकती है। मोदी यह जानते हैं कि जातीय समीकरण में नीतीश कुमार-लालू प्रसाद यादव का समीकरण भले ही मुखर नहीं है मगर मारक जरूर है। तमाम चुनावी सर्वे भी बिहार में कांटे की लड़ाई बता रहे हैं। ऐसे में यदि चूके और महागठबंधन को बहुमत मिल गया तो नरेंद्र मोदी का ग्राफ पैंदे पर होगा और उनके चक्रवर्तीय मंसूबों को गहरा झटका लगेगा।

अमित शाह क़े खाते में भी दिल्ली के बाद यह दूसरी नाकामी दर्ज होगी और वे असफल सेनापति करार दिए जाएंगे। पार्टी में उनके खिलाफ दबे असंतोष के स्वर उठने लगेंगे। मुमकिन है कि इस सिनेरियो की चिंता ने भी मोदी और शाह को करो या मरो के संकल्प के साथ मैदान में उतरने को बाध्य किया हो।

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि है कि लालू-नीतीश के खिलाफ जिस तरह के बोल मोदी-शाह बोल रहे है वह करो-मरो के इस संकल्प के चलते ही है। यदि उन्हें अपनी जीत का अतिविश्वास होता तो गोमांस, शैतान, चाराखोर-चाराचोर, लुटेरे जैसे शब्द उनके मुंह से नहीं निकलते। अमित शाह को नरेंद्र मोदी की जाति नहीं बतानी पड़ती और यह भी कहने कि जरूरत नहीं पड़ती कि मोदी देश के पहले पिछड़े प्रधानमंत्री हैं। जो भी हो, लड़ाई कितनी शिद्दतभरी है, यह मोदी की चिंता और चपलता से साफ झलक रहा है।

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Share Button

Relate Newss:

देश में एक बड़ी तबाही लेकर आ रहा है 'फैलीन' महाकाल !
इन तीन बड़े मीडिया संगठनों से यूं नाराज है सुप्रीम कोर्ट
सुशील मोदी ले जाएं नीतीश को, अपनी बहन की शादी कराएं :राबड़ी देवी
अजीत जोगी ने  किया इंडियन एक्सप्रेस के उपर मानहानि का मुकदमा
कोर्ट सरेंडर के पहले पीएम और राष्ट्रपति से मिलेगी विधायक निर्मला देवी
व्यंग्य का नया मैदान है सोशल मीडिया !
चीफ जस्टिस के पत्र से शर्मशार हुई सरकार
लफुआ, लम्पट, पत्रकार और मैनेजमेंट !
धनबाद प्रेस क्लब का निर्णय-300 रुपये दें और सदस्य बनें
काश रामजीवन बाबू की 'संचिका' को चिदम्बरम तक समझ पाते!
चंडी पुलिस के निकम्मेपन खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की जरुरत
खुलासे के साथ भूमिगत हुआ ‘केसरी गैंग’ का रिंग मास्टर
भड़काऊ खबरें प्रसारित करने वाले सुदर्शन चैनल के मालिक सुरेश चह्वाणके के खिलाफ मुकदमा
आजसू नेत्री हेमलता की मुश्किलें बढ़ी, पटना डीएसपी ने सही ठहराया आरोप
गुमला में माफियाओं को मिला सोने का खजाना!
कोई नहीं ले रहा ललमटिया कोल खदान के विस्थापितों की सुध !
अब नीतिश संग किसान रैली कर पीएम मोदी को ललकारेगें हार्दिक पटेल
600 Volunteers, Over 1000 artists and 60,000+ strong audience in one mega show
पीएम मोदी को पीछे छोड़ बिगबी बने ट्वीटर के बादशाह
प्रिंट मीडिया मालिकों के लिए फिर यूं खास रही पंजाब
महामहिम का KGBV छात्राओं से आह्वान- स्पोटलेस बनो
प्रबंधन एवं मार्केटिंग में निपुण नरेन्द्र मोदी !
पत्रकार प्रताड़ना को लेकर यूं मुखर हुए पूर्व विधायक अनंत राम टुडू
ATM की लाइन में हार्टअटैक से वह तड़पकर मर गया लेकिन लोग लाइन में खड़े रहे !
न्यूज वेब साइट पोर्टल को फर्जी कहने वाले की करें शिकायत, वे सीधे नपेगें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...