नीतीश कुमार को अपने ही रिकार्ड को तोड़ने की होगी चुनौती

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21 जनवरी को तय हो जाएगा कि नीतीश का ग्राफ चढ़ा या उतरा। 2017 में 11,292 कि.मी लम्बी मानव श्रृंखला बना बनाया था रिकार्ड। तब राजद कार्यकर्ता व समर्थक भी दे रहे थे उस अभियान का साथ। इस बार 2.50 लाख नियोजित शिक्षक भी करेंगे इसका बहिष्कार।

-: विनायक विजेता :-

पटना। 21 जनवरी 2017 की तरह मानव श्रृंखला फिर से बनाने के लिए पूरे राज्य में सरकारी डुगडुगी पीटने का सिलसिला शुरु हो गया है।

सरकारी खर्चे पर आगामी 21 जनवरी को फिर से मानव श्रृंखला बनाए जाने की कवायद शुरु हो चुकी है। पर इस बार की मानव श्रृंखला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए अग्निीपरीक्षा और चुनौती साबित हो सकती है।

बीते वर्ष 21 जनवरी को शराबबंदी के खिलाफ बनाए गए 11,292 कि.मी की लंबी मानव श्रृंखला ने इस मामले में एक नया विश्व रिकार्ड बनाया था। तब राज्य में महा गठबंधन की सरकार थी और कांग्रेस और राजद जदयू के साथ थे पर इस बार स्थितियां विपरीत हैं।

पिछली बार राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद सहित राजद और कांग्रेस के हाई लेबल से ग्रासरुट तक के नेता और कार्यकर्ताओं ने इस मानव श्रृंखला में अपनी भागेदारी निभायी थी।

पर इस बार राजद, कांग्रेस के साथ साथ राज्य भर के लगभग ढाई लाख वैसे नियोजित शिक्षक जो अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं इसमे भाग नहीं लेंगे।

बीते वर्ष इस मानव श्रृंखला में राज्य के दो करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागेदारी निभायी थी। तब इस मानव श्रृंखला की फोटोग्राफी इसरो के उपग्रह और सेटेलाइट से की गई थी।

बीते वर्ष इसरो के एक उपग्रह ने राज्य के छह जिलों सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पटना, जहानाबाद और गया से गुजरते हुए इस फोटोग्राफी कर मानव श्रृंखला को ऐतिहासिक बना दिया था।

बीते वर्ष मानव श्रृंखला के दौरान श्रृंखला में शामिल शिक्षक सिगरेट का कश भी लेते दिखे थे। आगामी 21 जनवरी को आयोजित मानव श्रृंखला में इस वर्ष शराबबंदी के अलावा दहेज प्रथा और बाल विवाह का भी मुद्दा रहेगा।

बहरहाल अब आगामी 21 जनवरी की शम होते-होते यह पता चल जाएगा कि राज्य में छठी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार का राजनीतिक ग्राफ चढ़ा है या धीरे-धीरे उतर रहा है।

मानव श्रृंखला के मामले में अगर बिहार अपना ही बनाया विश्व रिकार्ड नहीं तोड़ता है तो स्पष्ट हो जाएगा कि नीतीश कुमार का ग्राफ नीचे की ओर जा रहा है।

हालांकि राज्य के सभी विभागों के अधिकारी इसे सफल बनाने की कवायद में अभी से ही सभी स्कूलों, संस्थाओं और समाजिक संगठनों से पत्राचार में जुटे हुए हैं।

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