नीतिश के अहं को मिली बेलगाम IAS शासन की चुनौती

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रांची/पटना/मुकेश भारतीय। आज रांची से प्रकाशित समाचार पत्रों में भी बिहार  से जुड़ी  लीड खबर है…. “हम आईएएस बिहार में सुरक्षित नहीं हैं, सीएम के मौखिक आदेश नहीं मानेगें”। यह फरमान जारी करते हुये बिहार आईएएस एसोसिएसन ने आगे कहा है कि बिहार में आईएएस अफसर डरे रहते हैं। किसी भी फैसले के वक्त अंदेशा या खतरा रहता है कि कहीं गलत न मान लिया जाए। एसोसिएसन ने बीएसएससी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आईएस सुधीर कुमार को ईमानदार बताते हुये कहा है कि एसआईटी उनके पूरे परिवार को टारगेट कर रही है। उधर बासा यानि बिहार प्रशासनिक सेवा एसोसिएसन ने भी सरकार से पूछा है कि बीएसएससी के सचिव परमेश्वर राम पेपर लीक मामले में कैसे दोषी मान लिये गये।

उल्लेखनीय है कि पेपर लीक मामले में बीएसएससी के सचिव परमेश्वर राम के बाद अध्यक्ष सुधीर कुमार भी गिरफ्तार हुये। इसके पहले सुधीर के भाई एवं पटना वुमेंस कॉलेज के भूगोल विषय के प्रो. अवधेश कुमार, भाभी मंजू और भांजा आशीष भी गिरफ्तार हो चुके हैं। जिस तरह की सुचनाएं एसआईटी को हाथ लगी है, उस आलोक में सुधीर के पिता राधा प्रसाद भी दबोचे जा सकते हैं।

एसआईटी चीफ एवं पटना के एसएसपी मनु महाराज के अनुसार परीक्षा में बैठने वाले सुधीर के भांजे आशीष ने कुबूल किया है कि उसे लीक पेपर उसके नाना राधा प्रसाद ने दिया। फिर आशीष ने इसे बीएसएससी के आईटी मैनेजर नीति रंजन को भेजा और उसने दलालों को

इस प्रकरण में जांच जारी है। फलतः कौन दोषी है और कौन निर्दोष, कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन देश के प्रथम श्रेणी के अफसर ही जब जांच और न्याय प्रणाली पर उंगली उठाने लगेगें तो उनकी भद ही पिटेगी। आखिर वे बिहार में क्यों सुरक्षित नहीं हैं ? सिर्फ इसलिये कि ईमानदारी का चोला पहन कर उन्हें मनमानी करने की छूट नहीं है ? अचानक उनमें असुरक्षा भावना कैसे पनप गई। अगर परमेश्वर और सुधीर जैसों के मामले में ही सिर्फ सीबीआई जांच क्यों। आम जन को तो इससे काफी खुशी होगी कि बिहार में जितने भी आईएएस हैं, उन सारों की कुडंलियों की एक साथ जांच हो जाये।

जनता जानती है कि उनकी गाढ़ी कमाई से ये आईएएस लोग अव्वल दर्जे का वेतन सुविधा ग्रहण ही नहीं करते बल्कि उनके विकास योजनाओं में भी जम कर लुट-खसोंट मचाते हैं। शायद ही उनके कदम गाहे-बेगाहे भी गांव, गली, खेत, खलिहान आदि में पड़ते हों। ऐसे अधिकारियों की चमड़ी नेताओं से भी मोटी हो गई है।

ठीक है कि आप सीएम तक के मौखिक आदेश नहीं मानोगे, लेकिन इतना तो आम जनता का सबाल बनता ही है कि आईएएस लोग कितने काम लिखित में करते हैं। विधायिका और कार्यपालिका के विशेषाधिकार में विसंगतियां हो सकती है लेकिन, सब कुछ कोरा नहीं हो सकता।

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