निर्भया गैंगरेप डॉक्यूमेंट्री: असल मुद्दा क्या है?

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टीवी चैनलों, अख़बारों और संसद में निर्भया पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज़ डॉटर’ पर शंकाओं और आपत्तियों का बहुत शोर हो रहा है। पर कहीं ये सुनाई नहीं दे रहा कि इस फ़िल्म से उठनेवाला मूल सवाल क्या है?

bbc_nirbhayaजिन सवालों पर बहस हो रही है वो कुछ यूं हैं।  क्या इस डॉक्यूमेंट्री से दुनिया में भारत की छवि ख़राब हो सकती है?  

फ़िल्म में बलात्कार के दोषी के इंटरव्यू को इजाज़त कैसे दी गई?  क्या इस फ़िल्म को बैन करना सही है?

पर ये कोई नहीं पूछ रहा कि अगर कोई फ़िल्म एक बार फिर कुछ ऐसे पुरुषों की सोच सामने लाती है जो बलात्कार जैसी हिंसा को अपने मन में सही ठहराते हैं, तो ये सोच हमारे समाज में कितनी गहरी है?  और इसको बदलने के लिए सरकार, पुलिस और समाजसेवियों की कोशिशों में क्या कमी है?

दिसंबर 2012 से बार-बार, बलात्कार और महिलाओं की सुरक्षा पर बात हो रही है। इसमें गर्व भी महसूस किया जा रहा है कि मुद्दे पर नज़र तो है। पर वाजिब सवाल उठाने और मुद्दे की पेचीदगियां समझने से क्यों लोग कतरा रहे हैं? (बीबीसी)

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