सुशासन का सचः लिखंत कुछ, बकंत कुछ और करंत कुछ !

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नालंदा जिला में कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन का ताजा आलम यह है कि नीचे से उपर तक सब अपनी डफली अपना राग अलापते हैं। उनमें लिखंत कुछ, बकंत कुछ और करंत कुछ वाली कहावत कूट कूट कर भरी है।
nitish_antiजिले के हिलसा अनुमंडल के नगरनौसा अंचल के चंडी थाना में लोदीपुर गांव में जारी एक जमीन विवाद मामले में अक्षरशः ऐसा ही प्रतीत होता है। इस मामले में

थाना पुलिस इंचार्य, सीओ से लेकर न्यायालय लगा कर विवाद निपटारा करने के ढिंढोरे पीटने वाले एसडीओ तक मिले हुए नजर आते हैं।

भूमि या अन्य विवादों के एक छोटे से मामले को, जिसे सहज ढंग से मिनटों में सुलझाया जा सकता है, उसे वे लोग अपनी काली कमाई का जरिया बनाने के लिए तिल का ताड़ बना डालते हैं और विवाद में उलझे पक्षों का अवैध शोषण शुरु कर देते हैं।

राजनामा.कॉम के पास जिस तरह के सबूत उपलब्ध हुए हैं, वे चीख-चीख कर प्रमाणित करते हैं कि हिलसा अनुमंडल के कानून व्यवस्था के प्राथमिक तीनों स्तर के अधिकारी हमाम में साथ खड़े नंगे हैं। चाहे वह नगरनौसा अंचल के सीओ दिव्या आलोक, चंडी थाना के वर्तमान पुलिस इंचार्य धर्मेंन्द्र कुमार हो या फिर हिलसा अनुमंडल के वर्तमान एसडीओ अजीत कुमार सिंह। सबने मिल कर अपने स्तर से कानून व्यवस्था और न्याय की धज्जियां उड़ा कर रख दी।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय की पैत्रिक जमीन पर गांव के असमाजिक तत्वों के द्वारा धारा-144 के दौरान पक्का मकान बना दिया गया है और फिलहाल एसडीओ कोर्ट में सारे मामले पर लालफीताशाही हावी है। वहां सब कुछ ऐसा चल रहा है कि माननीय का दामन भी बचा रहे और लालशाही का फीता भी।

इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलु यह है कि चंडी थाना प्रभारी ने अपने रसुख पॉवर से जमीन कब्जा करा कर पक्का मकान बनाने का ‘ठेका’ ले लिया था। उसने प्रारंभ में सीओ के हर निर्देश को ठेंगा दिखाते रहा, उसके बाद एडीओ के आदेशों को रद्दी की टोकरी में फेकता रहा।

सीओ की लाचारी या ‘रहस्यमयता’ का आलम यह रहा कि वे थाना प्रभारी की मनमानी के आगे नतमस्तक नजर आए। एक दण्डाधिकारी की भूमिका का निर्वाह करने वाले एसडीओ की हालत भी अब तक कुछ इतर नहीं दिखी है या दिख रही है।

बहरहाल मुकेश भारतीय की पैत्रिक जमीन पर धारा-144 के बीच पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से निर्मित अवैध मकान से पूरी सेंटिग खोल ली गई है और असमाजक तत्वों द्वारा मनमानी जारी है।

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