नालंदा में गजब हो गया, अंतिम सुनवाई के दिन लोशिनिका से रेकर्ड गायब, मामला राजगीर मलमास मेला सैरात भूमि का

Share Button

नालंदा (वरीय संवाददाता)। जी हां, शनिवार 17 जून  2017 को  नालंदा में गजब हो गया। शायद बिहार का पहला मामला हो कि जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, नालंदा के कार्यालय से प्रथम अपीलवाद अन्यन संख्या- 999990124121637691/1A का  दस्तावेज  रहस्यमय ढंग से गायब हो गया। फलस्वरूप इस वाद की सुनवाई आज नहीं हो सकी।

मालूम हो कि राजगीर के चर्चित मलमास मेला सैरात भूमि  के अतिक्रमण से संबंधित अपील वाद की सुनवाई आज होनी थी। सैरात भूमि के 73 एकड़ में से करीब आधे भू भाग पर अतिक्रमण है। परिवादी पुरुषोत्तम प्रसाद और परिवाद अंचलाधिकारी ,राजगीर , लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी , नालंदा के कार्यालय में ससमय उपस्थित हुए। लेकिन संचिका नहीं होने के कारण इस वाद की सुनवाई नहीं हो सकी।

जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने परिवादी को बताया कि रेकर्ड नहीं मिल रहा है।

इस संबंध में रेकर्ड के कस्टोडियन के विरुद्ध कार्रवाई की बात तो दूर, स्पष्टीकरण तक नहीं पूछा गया है।

जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय से दस्तावेज गायब होने का यह पहला मामला केवल नालंदा का नहीं बल्कि बिहार का है।

परिवादी पुरुषोत्तम प्रसाद ने इस घटना की लिखित शिकायत नालंदा जिलाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, पटना, गृह विभाग के प्रधान सचिव, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को मेल से भेजकर कार्रवाई की मांग की है। पुरुषोत्तम प्रसाद को आशंका है कि अतिक्रमणकारियों के मेल में आकर दस्तावेज को गुम किया गया है।

बता दें कि  राजगीर के आरटीआई एक्टिविस्ट पुरुषोतम प्रसाद ने नालंदा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष अनन्य वाद संख्या- 999990124121637691/1ए दायर किया था, जो, अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजगीर के फैसले से असंतुस्ट विषयगत है।

इस वाद की सुनवाई का के बाद 07 मई, 2017 अन्तरिम आदेश आदेश कुछ इस प्रकार है…..

अभिलेख उपस्थापित। परिवादी उपस्थित। लोक प्राधिकार अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजगीर के प्रतिनिधि अंचल अधिकारी राजगीर का पत्रांक 732 दिनांक 05.5.2017 द्वारा प्रतिवेदन प्राप्त। उपस्थित अपीलार्थी ने वताया कि अंचल अधिकारी राजगीर Departmental Examination के कारन बाहर गए है। उन्होंने अपने पत्रांक 732 दिनांक 05.05.2017 के आलोक में प्रतिवेँदित किया है कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजगीर के पारित आदेश के आलोक में अंचल अमीन की नापी प्रतिवेदन के प्राप्ति उपरांत विधिवत अतिक्रमण वाद चलाकर अतिक्रमन वाद में प्रपत्र १ में सुचना निर्गत किया गया है , जिसकी सुनवाई दिनांक 25.05.2017 है । प्रतिवेदन का अवलोकन किया। अंचल अधिकारी पर शास्ति अधिरोपित का पर्याप्त आधार बनता है। परन्तु उपस्थित अपीलार्थी ने उन्हें एक और अवसर प्रदान किये जाने का अनुरोध किया। तदालोक में लोक प्राधिकार के प्रतिवेदन के आलोक में दिनांक 27.05.2017 तक लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजगीर के आदेश का अनुपालन कर प्रतिवेदन देना सुनिश्चित करेंगें। अभिलेख दिनांक 27.05.2017 को स्वयं भी उपस्थित रहेगें ।

लेकिन, सुनवाई से संबंधित रेकर्ड के गायब होने के मामले ने लोक शिकायत निवारण व्यवस्था पर एक बड़ा सबाल खड़ा कर दिया है। यह साफ तौर पर स्पष्ट करता है कि राजगीर मलमास मेला की सैरात भूमि के अतिक्रमणकारी भू-माफियाओं के हाथ बहुत लंबे है और उसके सामने प्रशासन के करींदे काफी बौने।

इस मामले को लेकर वादी पुरुषोतम प्रसाद ने नालंदा जिलाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, पटना, गृह विभाग के प्रधान सचिव, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को भेजे शिकायत में लिखा है कि जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष दायर अनन्य वाद संख्या-999990124121637691/1ए के आलोक में अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी चेतनारायण राम द्वारा बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम 2015 की धारा-8 के तहत राजगीर अंचलाधिकारी के विरुद्ध शासित अधिरोपन की कार्रवाई करते हुये एक माह के भीतर वाद का निष्पादन करने का आदेश दिया गया था, जिसका अनुमंडल प्राधिकार सह अंचलाधिकारी राजगीर ने नहीं किया था। उसके उपरांत यह मामला विषयाकिंत प्रतम अपीलीय प्राधिकार के कार्यालय में चल रहा था। इस वाद की अंतिम सुनवाई दिनांकः17.06.2017 को तय की गई थी, लोकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। वादी को यह बताया गया कि वाद से संबंधित रेकार्ड नहीं मिल रहे हैं।

अब सबाल उठता है कि चंद दिनों के भीतर वाद से जुड़े रेकर्ड को भ्रष्टाचार के कौन से दीमक चाट गये और इस शासनिक माफियागिरी के पिछे किन लोगों का कॉकस काम कर रहा है।

Share Button

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.