आपके बोल से चिढ़ हो रही है सुशासन बाबू !

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nitish_antiनालंदा जिले का नगरनौसा-चंडी अंचल क्षेत्र सुशासन बाबू के नाम से मशहूर बिहार के सीएम नीतिश कुमार के गृह जिले की राजनीति का एक प्रभावशाली अंग माना जाता है। लेकिन यहां सुशासन का जो ताजा दृश्य सामने है, वह आम जनता की अंतरात्मा को अंदर तक झकझोर जाती है।

ऐसे तो यहां सुशसन के ढोल की पोल खोलने वाली सैकड़ों उदाहरण हैं लेकिन, मुझसे जुड़े ताजे मामले सीधे सुशासन बाबू पर ही सबाल खड़ा कर जाता है। क्योंकि मेरे द्वारा सीएम नीतिश कुमार से कई बार हर संभव माध्यमों द्वारा शिकायत भेजी गई लेकिन फोनिक आश्वासनों के सिवा कोई कार्रवाई नहीं हुई।

police_chandi_mukesh2 इन दिनों मैं झारखंड की राजधानी रांची में रह रहा हूं। हमेशा नालंदा अवस्थित गांव घर भी आता जाता रहता हूं। जनवरी,2015 में ही मैंने नगरनौसा अंचल के तात्कालीन सीओ दिव्या आलोक को लिखित आवेदन दिया।

मैनें अपने आवेदन में गांव के असामजिक तत्वों द्वारा अपनी पैत्रिक जमीन पर अतिक्रमण किये जाने की शिकायत करते हुए जमीन मापी करा कर सीमाकंण कराने की मांग की।

लेकिन इधर जैसे ही सीओ की मापी प्रक्रिया शुरु हुई, उधर विरोधियों द्वारा उक्त भूमि के एक हिस्से पर पक्का निर्माण कार्य शुरु कर दिया। इस दौरान मैंने सीओ को बिना नापी के निर्माण कार्य होने की सूचना दी।

हर बार नगरनौसा सीओ ने संबंधित चंडी थाना प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार को मापी होने तक वस्तुस्थिति कायम रखने के निर्देश देते रहे और थाना प्रभारी उस हर निर्देश को रद्दी की टोकरी में फेंकते रहे।

police_chandi_mukeshकरीव 3 माह तक यह सिलसिला चलता रहा। इस दौरान उक्त भूमि पर मकान की पक्की दीवार उठा ली गई। प्रथम एवं अन्य पक्षों के नीजि अमीनों की मौजूदगी में सरकारी अमीन की नापी के सीओ ने सीमांकण की कार्रवाई की गई।

उसके बाद एसडीओ, हिलसा कोर्ट में शिकायत की गई। एसडीओ ने मामले की सुनवाई करते हुए उक्त भूमि पर धारा 144 लगा दी और चंडी थाना प्रभारी को फैसला होने तक वस्तुस्थिति बनाये रखने के निर्देश दिए गए। एसडीओ के इस आदेश का पालन भी थाना प्रभारी ने नहीं किया और उसके हस्ताक्षर से कोर्ट को यह सूचना भेजी गई कि वहां 144 जैसी कोई स्थिति नहीं है और विवादित स्थल पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया है।

जबकि सच्चाई यह है कि धारा 144 लागू होने के दौरान विरोधी पक्ष ने चंडी थाना पुलिस के खुली संरक्षण और गांव के असमाजिक तत्वों की मदद से उक्त भूमि पर पक्का मकान की ढलाई कर ली गई।

उसके बाद मैंने हिलसा एसडीओ कोर्ट में पुलिस की रिपोर्ट को मनगढ़ंत और झूठी होने की चुनौती दी। उसके बाद हिलसा एसडीओ ने चंडी के सीओ राजीव रंजन को घटनास्थल पर जाकर त्वरित जांच रिपोर्ट देने को कहा। चंडी सीओ ने न सिर्फ उक्त मकान पर धारा 144 के दौरान पक्का मकान बना डालने की पुष्टि की बल्कि मौके पर निर्माण कार्य रहे कई राजमिस्त्री और मजदूरों को भी पकड़ा और उन्हें बतौर गवाह रिपोर्ट दर्ज की।

1चंडी, सीओ के इस रिपोर्ट के बाद विवादित स्थल पर दो चौकीदार तैनात कर दिए गए। फिर भी उक्त स्थल से छेड़छाड़ होते रहे। कई काम किए गए। चंडी सीओ के जांच के वक्त नव ढली मकान मे सेंटिंग के पटरे लगे थे। जिसे थाना प्रभारी ने वगैर किसी लिखित आदेश के अचानक चौकीदार को हटा कर दिनदहाड़े खुलवा दिया।

थाना प्रभारी के खुला संरक्षण का आलम यह है कि तमाम आदेश-निर्देश के बाबजूद समाचार प्रेषण तक उक्त जमीन के वोरिंग पर मनबढ़ू लोगों द्वारा अवैध बिजली के सहारे चोरी के मोटर पम्प चलाए जा रहे हैं।

अब देखना हैं कि नालंदा के डीएम, एसपी से लेकर सीएम तक की इस मामले पर बरती गई उदासीनता की चपेट में सुशासन और मेरे मामले का आलम क्या होता है।

फिलहाल एक तरफ इस प्रक्ररण में एसडीओ कोर्ट से तारीख पर तारीख मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ जातीयता की चरम पर एक चंडी थाना प्रभारी की गुंडागर्दी सर चढ़कर बोल रहा है।

मैंने अपने जान माल की रक्षा की गुहार एसपी डीएम तो दूर…सीधे सीएम से की है लेकिन दो-ढाई माह बाद भी उनके कानों में जूं तक नहीं रेंग रहे हैं। .……….. मुकेश भारतीय  

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