नालंदा एसपी ने जागरण रिपोर्टर को भेजा जेल, अखबार ने बताया निजी मामला

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पटना। बिहार में पुलिस-प्रशासन की नजर में पत्रकारों की कोई औकात नजर नहीं दिख रही है। खगड़िया में जहां सोनभद्र एक्सप्रेस एक पत्रकार को डीएस से मामूली शिकायत करने पर डीआरपीओ की गाली-गलौज के साथ जान मारने की धमकी मिली है वहीं, नालंदा जिले में पुलिस ने एक खबर को प्रसारित और साझा करने के आरोप में एक पत्रकार पर मुकदमा कर दिया और फिर एक अपराधी की तरह पकड़ कर जेल भेज दिया। यह दीगर बात है कि उस पत्रकार को माननीय न्यायालय से जमानत मिल गई है।

खबर है कि हिलसा अनुमंडल के दैनिक जागरण के रिपोर्टर सुशील पांडेय को एक घटना को व्हाट्सएप पर शेयर किया तो मीडियाई छवि के योद्धा एसपी कुमार आशीष के सीधे निर्देश पर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का मुकदमा दर्ज कर दिया गया और बाद में हिलसा पुलिस ने उसे पकड़ कर जेल भेज दिया।

उधर नालंदा से ईटीवी न्यूज चानल के रिपोर्टर (स्ट्रींगर) अभिषेक कुमार को भी बिहारशरीफ में पाकिस्तानी झंडा फहराने की खबर को प्रमुखता से प्रसारित करने पर पुलिस के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा।

चिंता की बात है कि रिपोर्टर सुशील पांडेय को जेल भेजने के मामले में उसके अखबार दैनिक जागरण ने यहह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि रिपोर्टर का यह निजी मामला है। इसे मामले को लेकर किसी भी अखबार में एक लाइन की खबर तक नहीं छपी। इससे नालंदा में एक पश्रकार की हालत कमजोर की मौग, सबकी भौजाई सरीखे हो गई है।

कहा जाता है कि जिले में कई स्वंयभू पत्रकार उपर से अपने साथी पत्रकार का मनोबल बढ़ाते हैं तो दूसरी तरफ अंदरुनी तौर पर पुलिस प्रशासन को उकसाने का काम करते हैं। नतीजतन पुलिस प्रशासन की दमनकारी नीति को यहां काफी बल मिल रहा है।

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