नही तो मीडिया को खारिज कर देगी जनता !

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क्याcorporate_media-494x356 देश की मेनस्ट्रीम मीडिया निष्पक्ष है ? क्या पत्रकार सच और झूठ में भेद कर पा रहे हैं ? क्या अखबारों में छपी सभी ख़बरें तथ्यपरक हैं ? क्या बड़े मीडिया संसथान सरकार के प्रपंच से मुक्त है ? क्या पत्रकार कभी स्वतंत्र हो सकते हैं ?

दुनिया के जाने माने एडिटर जॉन पिल्गर का मानना है कि आज के दौर में राजनीतिक अराजकता, युद्ध और कलेश के लिए मेनस्ट्रीम मीडिया ही प्रमुख रूप से जिम्मेदार है.

वह कहते हैं कि अमेरिका के दो बड़े अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट की झूठी और भ्रामक ख़बरें इराक हमले का कारण बनी.
“इन दोनों अखबारों ने अपने न्यूज़ कैंपेन में बार बार दोहराया कि सद्दाम हुसैन ने ईराक में परमाणु हथियार छिपा रखें है. दोनों अख़बार के खोजी पत्रकारों ने इराक में परमाणु बम होने की कभी पुष्टी नही की.

दोनों अख़बारों के इस झूठे प्रचार ने ईराक पर हमले का अमेरिका में माहौल सा बना दिया ,” ये बात जॉन पिल्गर ने अपने एक लेख में कही है.

अगर न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट जैसे बड़े अखबार इराक को लेकर तथ्यपरक रिपोर्टिंग करते तो इराक पर कभी हमला न होता और 10 लाख बेगुनाह लोगों की मौत न होती. ये युद्ध अगर ना होता तो आज ISIS जैसे खौफनाक आतंकी संगठन का वहां जन्म न होता.
जॉन पिल्गर कहते हैं कि आज का दौर मीडिया का दौर है.

सरकारें गिराने बनाने से लेकर ग्रह युद्ध और कारपोरेट समझौतों तक में मीडिया किसी न किसी का पक्ष ले रही है. बिना किसी ताकत से हाथ मिलाये मीडिया चल नही सकती .

जॉन की तरह कई नामी गिरामी पत्रकारों का मानना है की मीडिया को आज प्रपंच और सत्ता के प्रचार के युग में प्रोएक्टिव रोल अदा करना है.” मीडिया का ज्वलंत मुद्दों पर ख़ामोश या तटस्थ रहना भी गलत है. अगर सच लिखने की जगह मीडिया उस पर चुप है तो इस चुप्पी को आप झूठ समझें,” एक रूसी बागी का कहना है.

पत्रकार जॉन पिल्गर के मुताबिक अमेरिका हो या हिंदुस्तान मेनस्ट्रीम मीडिया को सत्ता का एजेंट नही जनता के एजेंट का रोल निभाना होगा .अगर ऐसा नही हुआ तो जनता ही मीडिया को खारिज कर देगी.

deepak

……. Deepak Sharma अपने फेसबुक वाल पर।

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