‘धूर्त्तपुरुष’ की राह पर ‘युगपुरुष’ ?

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namo_ministerश्री नरेन्द्र मोदी जी की जीत से लगा थ कि वे भारतीय राजनीति में ‘युगपुरुष’ के रूप में अवतरित हुए हैं । प्रधानमंत्री के पद पर शपथग्रहण के पश्चात उनके द्वारा दिया गया श्लोगन- “अच्छे दिन आने वाले हैं” से भारतीय जनता जबरदस्त उत्साहित थी। किंतु शपथग्रहण के एक डेढ महीने बाद ही उनके और उनकी सरकार के निर्णयों ने उन्हें अर्श से फर्श पर ला पटका है। जिसे युगपुरुष कहा जा रहा था, वह तो वास्तव में” धूर्त्तपुरुष ” निकला।

 मनमोहन सरकार के मंहगाई और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर चुनाव जीतने वाली मोदी सरकार के जनता से किकिए गए सारे कसमें-वादे अबतक झूठ ही साबित हुए हैं। तकरीबन डेढ महीने के भीतर ही मोदी सरकार ने आमलोगों का अच्छा खासा जेब कतर डाला।

शपथग्रहण के महीना भर भी नहीं बीता था कि मंहगाई दर में एक प्रतिशत का उछाल आगया।पेट्रोल-डीजल के दाम बढा दिया गया। साग- सब्जियाँ और मंहगी हो गई। किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लेने वाले किसानों की कमर तोड दी गई।उन्हें अब 7% के बजाय 14% से अधिक ब्याज देना पडेगा। अब आमलोगों की सबसे सस्ती सवारी रेल का किराया भी बढा दिया गया।अगर कहीं राहत दी गई है तो वह है बिना सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर जिसे खास लोग ही इस्तेमाल करते हैं।लिहाजा आमलोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ।

 यहां मुझे अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी शिद्दत से याद आरहे हैं । जिन्होंने पूरे एलेक्शन कैंपेन के दौरान नरेन्द्र मोदी जी पर कारपोरेट घरानों के पैसे से चुनाव लडने का आरोप लगाते रहे।हालांकि जनता ने उनकी एक न सुनी।किंतु अब मोदी सरकार की वृद्धि नीति ने उनके आरोपों को प्रासंगिक बना दिया है।

 विश्वव्यापी मंदी के दौर में भी अर्थव्यवस्था को तटस्थ बनाए रखना, प्राप्रारंभिक शिक्षा को मूलाधिकार में शामिल करना, मनरेगा योजना का आरंभ, सूचना का अधिकार अधिनियम का प्रारंभ, शिक्षा का अधिकार अधिनियम का शुभारंभ तथा खाद्य सुरक्षा विधेयक का लाना, जैसे व्यापक, चिरस्थायी, दूरगामी, ऐतिहासिक और लोकोपयोगी कार्यों के बावजूद मनमोहन सरकार को जनता ने दर बदर कर दिया। मोदी जी को जनता ने अपना जनादेश मंहगाई और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ही दिया था।उम्मीद नहीं थी कि मोदी जी जनता का भरोसा इतनी जल्दी तोड देंगे।वे मंहगाई के लिए रासायनिक से लेकर जैविक उर्वरक तक का काम कर रहे हैं।

 जहाँ तक भ्रष्टाचार का सवाल है तो अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी के आरोपों को आगे बढाते हुए राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दूबे ने संभावना जताया है कि-“श्री मोदी के चुनाव कैंपेन में 2000 करोड रुपये खर्च हुए होंगे।यह पैपैसा जिस जिस ने दिया है वह सूद समेत वापस लेगा।इस स्थिति में मोदी सरकार घोटालों के सारे रिकॉर्ड तोड देगी और महंगाई आसमान छूने लगेगी।”

लिफाफा देखकर तो मजमून का पता चल ही रहा है । अगर यही हाल रहा तो युगपुरुष के रुप में अवतरित नरेन्द्र मोदी जी “धूर्त्तपुरुष” के रुप में याद किए जाएंगे।

yahiya

…………याहिन सिद्दकी अपने फेसबुक वाल पर

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