धन्य है  रे भैया, झारखंड का पर्यटन विभाग !

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रांची से प्रकाशित “हिन्दुस्तान” समाचार पत्र के रांची लाइव नामक पृष्ठ पर एक रिपोर्ट छपी है। रिपोर्ट है – “फिल्म सिटी की ओर झारखंड ने बढ़ाया पहला कदम”।  इस रिपोर्ट में राज्य के पर्यटन, कला –संस्कृति और युवा कार्य विभाग और उसके सचिव अविनाश कुमार की जमकर आरती उतारी गयी है।

film-city_ranchiइस आरती में मुख्यमंत्री रघुवर दास को भी शामिल किया गया है, यह कहकर कि जो अविनाश कुमार ने फिल्मसिटी पर रिपोर्ट बनायी है, उस रिपोर्ट को सीएम ने स्वीकृति दे दी है, गर ऐसा है तो यकीन मानिये, राज्य में फिल्म उद्योग का भट्ठा बैठ जायेगा और इस राज्य में फिल्म निर्माण, पर्यटन, कला संस्कृति और युवाओं के सपनों का श्राद्ध हो जायेगा। श्राद्ध की तैयारी भी प्रस्ताव में बहुत अच्छे ढंग से कर ली गयी है। 

कमाल है, अभी फिल्म नीति बनी नहीं, और गुपचुप तरीके से झारखंड फिल्म शूंटिग रेगुलेशन – 2015 का निर्माण और सीएम की स्वीकृति तथा हिन्दुस्तान अखबार में आज इस पर रिपोर्ट बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। आखिर कौन लोग हैं, जो राज्य में फिल्म उद्योग को फलने – फूलने नहीं देना चाहते हैं, उसका काला चिट्ठा है आज के हिन्दुस्तान अखबार की यह रिपोर्ट।

अब हम बात करते हैं, आज अखबार में छपी रिपोर्ट की, जिसका हम अक्षरशः आपरेशन करेंगे। अखबार ने छापा हैं कि अविनाश कुमार द्वारा बनाये गये प्रस्ताव में वर्णित हैं कि फिल्म शूटिंग से संबंधित कार्यों को देखने के लिए पर्यटन विभाग के सचिव को नोडल आफिसर बनाया जायेगा।

मेरा मानना हैं कि आप ही प्रस्ताव बनाओ, और आप ही प्रधान बन जाओ, ये आप कर सकते हैं, पर सच्चाई ये हैं कि भारत सरकार से लेकर, विभिन्न राज्यों के राज्य सरकार तक फिल्मों से संबंधित सारे कार्य सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ही देखता है,  गर आपको नहीं विश्वास हैं तो जाकर भारत सरकार का आफिसियल वेबसाइट या तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश या किसी भी राज्य का आफिसियल वेबसाइट देख सकते है।

अखबार ने लिखा है कि जिस किसी भी व्यक्ति को फिल्म निर्माण करनी होगी, उसके लिए एक आवेदन विभाग को देना होगा, आवेदन के साथ शुल्क भी तय होगा, जो वापस नहीं होगा।15 दिनों के अँदर संबंधित व्यक्ति को विभाग की ओर से सूचित किया जायेगा कि फिल्म शूटिंग की इजाजत है या नहीं।

मेरा मानना हैं कि जहां आज तक कोई फिल्म बनाने नहीं आया, जहां किसी ने झांकने तक की कोशिश नहीं की, वहां माहौल बनाने के पहले, माहौल बिगाड़ने की इजाजत उक्त अधिकारी को किसने दे दी? क्या आपके यहां राज खोसला के परिवार के लोग, बी आर चोपड़ा के लोग, यश चोपड़ा के लोग, राजकपूर के परिवार के लोग, राजश्री प्रोडक्शन्स, रामोजी राव से जूड़े आदि फिल्म निर्माण की हस्तियां आपके यहां हाथ जोड़कर आवेदन देने के लिए, वह भी शुल्क के साथ, वह भी कि आप शूटिंग की इजाजत देंगे या नहीं, मन में भाव रखकर आवेदन करेंगी कि आप की अपेक्षा वह उन राज्यों में अपना फिल्म निर्माण करेंगी, जहां की सरकारों ने सुविधाओं का पिटारा खोल दिया हैं।

कमाल हैं एक तरफ आप दिल्ली और अन्य शहरों में उद्योग धंधे राज्य में खुले इसके लिए व्यापार मेला में प्रतिभागी के रुप में भाग ले रहे हो, और यहां जब अवसर खुलने की बात हो रही हैं तो जो यहां आने की सोच रहे हैं, उनसे अपनी आरती उतरवाने की सारी योजनाओँ को मूर्त्तरुप देने में लगे हो, कमाल हैं भाई तुम्हारी सोच की। फिल्म निर्माण से जूड़ी हस्तियां तुम्हारे 15 दिन के इंतजार की अपेक्षा इंडोर या आउटडोर शूटिंग के लिए हैदराबाद या अन्य फिल्म सिटी में अपना आशियाना नहीं ढूंढेंगी क्या। ये बातें तुम्हें समझ में क्यों नहीं आती।

अखबार ने लिखा हैं कि प्रस्ताव में शूटिंग का शुल्क विभाग तय करेगा। एक सप्ताह से अधिक शूटिंग चलाने पर प्रतिदिन दस हजार रुपये देना होगा, इसके अलावा अगर सुरक्षा के लिहाज से पुलिस की जरुरत हैं, तो उसका शुल्क अलग होगा।

आश्चर्य हैं रे भाई, आप मुंह पर खुब अच्छे-अच्छे कंपनी का पाउडर और तेल मल लीजिये, एक भी फिल्म निर्माता आपके यहां इस प्रकार की नीति रखेंगे तो नहीं आयेगा, क्योंकि कई राज्य सरकार इस प्रकार की सुविधा मुफ्त में मुहैया करा रही हैं। जिसने भी इस प्रकार की नीति बनायी हैं, उसकी सोच पर मुझे तरस आता हैं, आज हमें ये भी पता लग गया कि क्या कारण हैं कि पर्यटन झारखंड में पिछड़ गया, अरे जहां इस प्रकार के अधिकारी होंगे, उस राज्य का तो भगवान ही मालिक है।

krishna bihai

……वरिष्ठ पत्रकार कृष्णबिहारी मिश्र के ब्लॉग पत्रकारिता का सच से साभार।    

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