दो पैसे की हाड़ी गयी, कुत्ते की जात पहचानी गयी

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पुण्य प्रसून और केजरीवाल का अन्तरंग वीडियो कल से नेट पर वायरल हो रहा है. शायद एक लंबे साक्षात्कार के बाद की बातचीत को इसमें चुपके से फिल्मा लिया गया है.  इसमें मोटे तौर पर प्रसून निर्देश लेते दिख रहे हैं कि क्या दिखाया जाय और किसे कितना दिखाया जाय.

 paid_news (2)इस क्लिप्स ने सबूत भले दे दिया हो लेकिन कोई नई बात नही है इसमें. अन्य बड़े कहे जाने वाले मीडिया पेशेवरों की तरह ही प्रसून का चरित्र भी शुरू से खराब रहा है.  अभी कुछ दिन पहले ही एक फोटो भी नेट पर खूब जारी हुआ था जिसमें आआपा की कोर टीम के साथ अकेले में गलबहियां कर ‘अनैतिक संबंध’ का पाप बटोर रहे थे पुण्य.

इससे पहले भी छत्तीसगढ़ की एक संदिग्ध रिपोर्टिंग कर गोयनका पुरस्कार कबार चुके हैं ये. मुझे तब भी पूरी आशंका थी और आज भी है कि नक्सलियों द्वारा दिए गये इनपुट को अपने शब्दों में उतार सीधे स्टोरी कर ली गयी थी तब भी.

फिर पुण्य ही क्यूँ? आशुतोष ने ढके-छुपे ‘व्यवसाय’ करने के बाद अब खुलेआम लाइसेंसी ‘धंधा’ शुरू कर दिया है.  इससे पहले एक टेप में आपने वीर संघवी को नीरा के तलवे चाटते सुना ही होगा.  बरखा दत्त किस तरह राडिया की नौकरी कर रही थी ये भी उसी टेप से ज़ाहिर हुआ था. और भी दर्ज़नों देह तब भी वस्त्रहीन हुए ही थे.

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कुछ दिन पहले ही सौ करोड़ की ‘फिरौती’ वसूलते भी एक ऐसे ही दुकानदार को और देखा था आपने, जेल भी गए थे बेचारे. तो आखिर क्या किया जाय? कुछ भी मत कीजिये. बस इस मुख्यधारा कहे जाने वाले बिचौलियों पर भरोसा करना छोड़ दीजिये.

कोर्पोरेट मीडिया की खबर को बस विज्ञापन समझिये. और कोई बात नहीं. हाँ… सोशल मीडिया किस तरह मुख्यधारा मीडिया के रूप में स्थापित हो इसकी जुगत भिड़ाते रहिये. आज न कल ज़रूर सफल होंगे.

आआपा के अस्तित्व में आने से भी मीडिया के बहुत सारे सारे चेहरे बे-नकाब हुए हैं. इसे एक उपलब्धि ही समझिये. दो पैसे की हाड़ी गयी, कुत्ते की जात पहचानी गयी.

……………पंकज कुमार झा अपने फेसबुक वाल पर

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