बैजू बाबाः वेतन सन्मार्ग से, सेवा न्यूज-११ की

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रांची सन्मार्ग के संपादक बैजनाथ मिश्र का एक पावं सन्मार्ग में दूसरा न्यूज-११ में है. वे जितना समय सन्मार्ग में देते हैं उससे ज्यादा  न्यूज-११ को. वह भी डंके की चोट पर.वे प्रतिदिन ११ बजे रिपोर्टरों की मीटिंग के लिए सन्मार्ग आते हैं लेकिन न कोई स्टोरी प्लानिंग होती है और न ही अखबार की समीक्षा.न छूटी हुई ख़बरों पर कोई चर्चा न दूसरे अख़बारों  से कोई तुलना. बैजू पूरे समय बाबा की आत्मप्रवंचना चलती रहती है. रिपोर्टर हाँ में हाँ  मिलाने को विवश रहते हैं. अंत में वे सिर्फ सबसे पूछ लेते हैं की वे आज क्या फ़ाइल करेंगे. फिर सभा विसर्जित कर बैजू बाबा न्यूज-११ निकल जाते  हैं.

न्यूज-११ ने उन्हें एक स्कार्पियो गाडी दे रखी है. इसके अलावा क्या सुविधाएं प्राप्त हैं कोई नहीं जानता. शाम को बाबा शिव की बूटी का सेवन  कर आते हैं और अपने चेंबर में बैठ कर टीवी देखते रहते हैं. कुछ ब्रेकिंग न्यूज आने पर चेंबर से निकल कर बता देते हैं फिर टीवी देखने लगते हैं. साधे सात बजते-बजते उठकर न्यूज-११ के लिए निकल जाते हैं. चोरी-छुपे नहीं बाजाप्ता ऐलान करके. लीड क्या बनेगा.किस खबर को
कितनी जगह देनी है इससे उन्हें कुछ लेना-देना नहीं रहता.उनकी शेखी को जो तल्लीनता से नहीं सुनता या असहमत नज़र आता है वह उनकी नज़रों में खटकने लगता है. उसकी छुट्टी कर दी जाती है.

उनकी इस आदत के कारण न्यूज एडिटर अविनाश ठाकुर ने हाल में आजिज आकर सन्मार्ग छोड़ दिया. पूरा डेस्क खली हो गया है. अब रिपोर्टरों को उप संपादक का काम करने के लिए कहा जा रहा है. अखबार के मालिक प्रेम मीडिया लाइन के आदमी नहीं हैं इसलिए उन्हें पता नहीं है की सम्पादक का काम क्या होता है. बैजू बाबा इसका पूरा लाभ  उठाते हैं और टीवी देखने और शेखी बघारने के एवज में 50 हज़ार  रूपये का वेतन ले लेते हैं.

स्टाफ चाहते हैं कि कोई ढंग का सम्पादक आये और उन्हें कुछ सीखने का मौका मिले लेकिन डाइरेक्टर प्रेम से यह बात कहे कौन यह  समस्या है. बाबा को पता चलेगा तो तुरंत उसकी छुट्टी हो जाएगी.

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One comment

  1. (धन्यवाद मुकेश भारतीय जी!
    बैजू बाबा की खबर अच्छी रही. पत्र जगत की तल्ख़ सच्चाइयां उजागर करने के
    लिए आपका साईट एक लोकप्रिय मंच बन चुका है. इसके जरिये पत्रकारिता में आ
    रही विकृतियों पर कुछ लगाम तो लगता ही है. )

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