दैनिक हिन्दुस्तान का प्रसार संख्या में भी भारी जालसाजी

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राजनामा.कॉम (श्रीकृष्ण प्रसाद)। बिहार सरकार के वित्त अंकेक्षण विभाग पटना की प्रतिवेदन संख्या -195।2005 में पृष्ठ संख्या -0001058 में अंकेक्षक दल ने दैनिक हिन्दुस्तान के द्वारा डी0ए0वी0पी0।नई दिल्ली। को गलत सूचना देकर डीएवीपी  विज्ञापन दर प्राप्त करने का सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है ।

इस भंडाफोड़ ने प्रमाणित कर दिया है कि बिहार में किसी खास प्रभावशाली मंत्री और सरकारी पदाधिकारियों के संरक्षण में ही कोरपोरेट मीडिया यह घोटाला 2001 से आजतक लगातार करते आ रहा है ।

मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के समक्ष यह चुनौती है कि वे संरक्षणकर्ताओं के साथ-साथ अखबार के दोषी प्रबंधकों और संपादकों को जेल भेजने की मुकम्मल व्यवस्था करें ।इसके लिए मुख्यमंत्री को इस पूरे प्रकरण की जांच राज्य सरकार की दिलेर जांच एजेंसी को सौंप देनी चाहिए और जांच का मोनिटरिंग स्वयं मुख्य मंत्री करें ।

अन्यथा कोरपोरेट मीडिया सभी साक्ष्य को ही नष्ट कर देगा और सरकार को बदनामी का सामना करना पड़ सकता है ।

उंचा विज्ञापन-दर पाने के लिए हिन्दुस्तान ने प्रसार संख्या में भी जालसाजी की:अंकेक्षण रिपोर्ट खुलासा करती है कि -‘‘ यदि एक ही पंजीयन संख्या- 44348। 1986 पर मुजफफरपुर और भागलपुर केन्द्र ‘पंजीकृत‘ होते, तो संचिका में पंजीयन प्रमाण-पत्र की छायाप्रति, जो दिनांक 09-03-2004 का है और संचिका में पृष्ठ-133 पर है । उसमें मुजफफरपुर और भागलपुर केन्द्रों का अवश्य उल्लेख रहता, परन्तु उल्लेख नहीं है ।

इस प्रकार, डीएवीपी को गलत सूचना देकर और भागलपुर और मुजफफरपुर संस्करण। प्रकाशन को ‘स्वतंत्र‘ प्रकाशन बताकर दोनों केन्द्रों के लिए अलग-अलग डीएवीपी  विज्ञापन दर प्राप्त कर लिया ।‘

अंकेक्षण रिपोर्ट का यह अंश प्रमाणित करता है कि इस कांड के अभियुक्तों ने धोखाधड़ी और जालसाजी को हथियार बनाकर केन्द्र और राज्य सरकारों के राजस्व को लूटने में कोई प्रयास नहीं छोड़ा ।  

यह लूट बता रहा है कि पूरे देश में ‘प्रेस की आजादी‘ के नाम पर कोरपोरेट मीडिया सरकारी खजाने को लूटनेका सामूहिक खेल खेल रहा है और राज्य और केन्द्र सरकारों के मंत्रियों और विधायक और सांसदों पर आंख तरेरने का भी काम डंका की चोट पर करता आ रहा है ।

प्रसार संख्या में भी दैनिक हिन्दुस्तान ने जालसाजी का नया रिकार्ड कायम किया है । अंकेक्षण प्रतिवेदन खुलासा करता है कि -‘‘ प्रसार संख्या का जो उल्लेख डीएवीपी  विज्ञापन -दर की प्रति में किया जाता है,उसका भी सत्यापन विभाग के द्वारा नहीं किया जाना आश्चर्यजनक है ।डीएवीपी द्वारा निर्गत पत्र । दिनांक 31-01-2003। में 01-10-2002 से पटना के लिए अलग विज्ञापन दर 207 रूपया 40 पैसा में प्रसार संख्या 2,07,939 अंकित है । यह अंकेक्षण में प्रस्तुत एबीसी प्रमाण-पत्रों से मेल नहीं खाता है ।‘‘

अंकेक्षण प्रतिवेदन आगे खुलासा करताहै कि –‘‘ झारखंड विभाजन के पूर्व कुल प्रसार संख्या 3,28,642 अंकित है जो नवम्बर,2000 के पूर्व का है । जनवरी,2002 से जून,2002 की ए0वी0सी0 रिपोर्ट में पटना का अलग प्रसार संख्या मात्र 1,51,698 है ।तब, 01-10-2002 से पटना का 207 रूपया 40 पैसा विज्ञापन -दर में प्रसार संख्या 2,07,939 दर्शाना भी संदेहप्रद लगता है । ‘‘

अंकेक्षण प्रतिवेदन दैनिक हिन्दुस्तान की जालसाजी और धोखाधड़ी का और भी सनसनीखेज खुलासा करता है । उंचा विज्ञापन दर प्राप्त करने के लिए दैनिक हिन्दुस्तान प्रसार -संख्या में भी जालसाजी का नया-नया रिकार्ड बनाया है ।

अंकेक्षण प्रतिवेदन आगे खुलासा करता है कि –‘‘उल्लेखनीय है कि जनवरी,2001 से मार्च,2004 तक के प्रत्येक एवीसी रिपोर्ट । छः माही रिपोर्ट। कुल सात छः माही रिपोर्टों में से मात्र तीन छः माही एवीसी रिपोर्ट ही अंकेक्षण दल को दिखाया गया ।हिन्दुस्तान ने जनवरी से जून,2002 , जुलाई से दिसंबर,2003 और जनवरी से जून,2004 की ही एवीसी रिपोर्ट ही अखबार ने अंकेक्षण दल को दिखाया ।अखबार ने शेष चार छःमाही की एवीसी रिपोर्ट मांगने पर टाल-मटोल की नीति अपनाता रहा और रिपोर्ट अंकेक्षण-दल को नहीं उपलब्ध कराया ।‘

इस प्रकार, हिन्दुस्तान ने अंकेक्षण-दल को जनवरी से जून,2001, जुलाई से दिसंबर,2001, जुलाई से दिसंबर,2002 और जनवरी से जून,2003 की अवधि की प्रसार संख्या बतानेवाली एवीसी रिपोर्ट अंकेक्षण-दल को नहीं उपलब्ध कराया ।

अंकेक्षण प्रतिवेदन अपना मंतव्य देता है इस प्रकार कि –‘‘ऐसी परिस्थिति में अंकेक्षण दल पूर्णतः आश्वस्त है कि हिन्दुस्तान दैनिक ने मुजफफरपुर और भागलपुर संस्करणों।प्रकाशनों के लिए लगत ढंग से डी0ए0वी0पी0 विज्ञापन दर प्राप्त कर सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना पर दबाव बनाकर अवैध मुद्रण-केन्द्रों क्रमशः भागलपुर और मुजफफरपुर को स्वतंत्र प्रकाशन बताकर भुगतान प्राप्त किया जिसका विवरण इस प्रकार है ।‘‘

अंकेक्षण प्रतिवेदन के इस अंश के खुलासा के बाद दैनिक हिन्दुस्तान के आर्थिक अपराध की सभी पोल खुल जाती है । इस कोरपोरेट मीडिया को बिहार के विकास, जन-समस्या और अखबार में कार्यरत कर्मियों की खुशहाली से कोई लेना-देना नहीं है, वरन् इस मीडिया हाउस को जालसाजी और धोखाधड़ी के बल पर उंचा विज्ञापन दर प्राप्त करने के लिए हर कदम-कदम पर कुकर्म करना है और प्रेस की आजादी की छतरी का उपयोग करना है ।

भारतीय संसद के माननीयों से उम्मीद है कि वेलोग सामूहिक रूप में दैनिक हिन्दुस्तान और अन्य राष्ट्रीय दैनिकों के प्रसार संख्या और विज्ञापन घोटालों की जांच और दोषियों को सजा दिलानेके लिए संसद के अन्दर और संसद के बाहर कदम उठाएं ।

विश्व के सनसनीखेज 200 करोड़ रूपये के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटालेमें पुलिस अधीक्षक पी0 कन्ननके निर्देशन में समर्पित आरक्षी उपाधीक्षक अरूण कुमार पंचालर की पर्यवेक्षण रिपोर्ट में नामजद अभियुक्त मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष और ऐडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतीया, मुद्रक एवं प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव और स्थानीय संपादक बिनोद बंधु के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420।471 ।476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं 8।बी0।,14 और 15 के तहत लगाए गए सभी अभियोगों को प्रथम दृष्टया सत्य पाए जाने की घटना में बिहार सरकार के वित्त अंकेक्षण विभाग , पटना की वित्त अंकेक्षण रिपोर्ट -195।2005 की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है ।

इस अंकेक्षण रिपोर्टको मैं विश्व के इन्टरनेट पाठकों के समक्ष किस्तों में हू-बहू प्रकाशित करता आ रहा हूं ।इस रिपोर्ट के आधार पर ही मुंगेर के न्यायालय ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान रिपोर्ट न्यायालय को पेश करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था ।इसी रिपोर्ट को आधार मानकर पुलिस उपाधीक्षक अरूण कुमार पंचालर ने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में अभियुक्तों के विरूद्ध लगाए गए अभियोगों को प्रथम दृष्टया सत्य घोषित किया है ।

इस रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि दैनिक हिन्दुस्तान किस प्रकार जालसाजों का जालसाज है और यह अखबार सरकारी राजस्व को लूटने के लिए किस हद तक दादागिरी करता है और बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय की विभागीय संचिकाओं को नाच नचाता आ रहा है ?

मुंगेर से राजनामा.कॉम के लिये श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट।

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