दैनिक भास्कर रिपोर्टर पर हमला से शीघ्रतम पर्दा उठाए राजगीर पुलिस

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राजनामा.कॉम। नालंदा जिले  के  राजगीर नगर पंचायत  क्षेत्र  में एक हिन्दी दैनिक से जुड़े रिपोर्टर पर कथित हमला की खबर जितनी सुर्खियों में है, इस मामले को लेकर उतनी ही तरह-तरह की  शंका आशंका चर्चाओं का बाजार भी गर्म है।  

कुंड क्षेत्र राजगीर निवासी प्रमोद कुमार पिता श्री श्रवण कुमार ने 20 अक्टूबर,2018 को थानाध्यक्ष सूचनार्थ प्रतिलिपि अनुमंडलीय पुलिस पदाधिकारी से जान-माल की सुरक्षा प्रदान करने संबंधित आग्रह आवेदन में लिखा है कि…… 

“मैं हिन्दी दैनिक भाष्कर अखबार प्रेस रिपोर्टर हूं। मैं दिनांक 19 अक्टूबर,2018 को शाम करीव 8.40 बजे अंबेदकर चौक कुंड पर निकट अवस्थित महाकवि जयशंकर प्रसाद स्मृति भवन के पास ब्लैक रंग पलसर सवार दो अज्ञात व्यक्ति ने, जो गाड़ी चला रहा रहा था, बोला कि तुम प्रमोद कुमार प्रेस रिपोर्टर हो। तुमने ही घायल लड़का को अस्पताल पहुंचाया था।

इतना सब बोलने के बाद अपने कमर के पास से रिवाल्वर निकालने लगा और मुझे जान मारने की कोशिश किया। तो मैं वहां से किसी तरह से अपना जान बचाकर भागा।

महाकवि जयशंकर प्रसाद स्मृति भवन में घुसकर मुख्य द्वार को लगा दिया और में जब हल्ला-गुल्ला किया तो वो दोनों व्यक्ति मकदूम कुण्ड रोड के तरफ भाग निकाला।”

इधर, आश्वस्त सूत्रों के अनुसार जब पुलिस अफसर ने इस शिकायत आवेदन को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला तो मामला काफी संवेदनशील बन गया है।

सीसीटीवी खंगालने के वक्त पुलिस अफसर के साथ मौजूद जानकारों का कहना है कि रिपोर्टर ने जिस समय जान मारने के प्रयास की घटना का जिस तरह से जिक्र किया है, फुटेज में नजारा उससे बिल्कुल उलट है।

सीसीटीवी फुटेज प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले रिपोर्टर प्रमोद वहां आया। वह धर्मशाला में न जाकर वहीं पर एक छोटी सी चाय की दुकान में जाकर बैठ गया। इसके करीब 2-3 मिनट बाद दोनों बाइक वाला आया और उसी दुकान में बैठा।

उसके 9 मिनट के बाद दोनों बाइक वाला निकला और हाथ से कुछ ईशारा करते हुये बाइक चला गया। उसके 2 मिनट बाद प्रमोद भी दुकान से निकला और अपनी बाइक पर बैठ कर चला गया।

सीसीटीवी फुटेज प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसके पहले का दृश्य था कि एक बाइक वाला आया मकदूमपुर कुंड की ओर से आया। होटल के वगल में बाइक खड़ा किया। फिर उधर से रिपोर्टर प्रमोद आया और वह चाय दुकान (होटल) में चला गया। बाइक वाला बाहर ही खड़ा था। फिर कुंड तरफ से दो बाइक वाला आया और बाहर जो बाइक वाला खड़ा था, उससे बात किया।

उसके बाद दोनों चाय दुकान के अंदर गया। लेकिन शुरु से जो बाइक वाला खड़ा था, वह खड़ा ही रहा अपनी बाइक को लेकर। फिर पिछे से एक बाइक वाला आया और अपनी बाइक वहीं पर छोड़ दिया और पहले वाले वाइक पर सवार होकर चला गया।

इसके बाद अंदर चाय दुकान से निकल कर दो युवक अपनी बाइक से चले गए। उसके बाद प्रमोद भी चला गया।

इसके बाद की सीसीटीवी फुटेज बताता है कि 15-16 मिनट बाद दोनों बाइक वाला आया और एक बाइक वाला उतरा और पहले से खड़ा दूसरा बाइक लिया और साथ-साथ निकल गया।

बहरहाल, रिपोर्टर प्रमोद कुमार की राजगीर थानाध्यक्ष के नाम शिकायत और सीसीटीवी फुटेज की दास्तां में कहीं न कहीं कुछ राज अवश्य छुपे हैं।

ऐसे में पुलिस अनुसंधानक की जबावदेही अधिक बढ़ जाती है कि वे गंभीरतापूर्वक त्वरित पड़ताल कर सच्चाई सामने लाए। क्योंकि मीडिया जहां होती है, वहां राजनीति भी होती है। तरह-तरह की शंका-आशंकाएं भी पनपती है।

खासकर उस परिस्थिति में जब कोई मामला मीडिया की सुर्खियां बन जाए और सामने कहीं न कहीं भय के महौल की तस्वीरें बनने शुरु हो जाएं। क्योंकि राजगीर जैसे अति संवेदनशील पर्यटन क्षेत्र में एक बड़ा अखबार के रिपोर्टर पर हमला और जान मारने का प्रयास कोई छोटी घटना नहीं मानी जा सकती।

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