प्रभात खबर ने छापी बेवुनियाद खबर

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झारखंड की राजधानी रांची से प्रकाशित दैनिक प्रभात खबर के संवाददाता ने राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक की गिरफ्तारी  को  लेकर  बिल्कुल  असत्य और वेबुनियाद खबर लिखी है। उसने राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक पक्ष लेना तो दूर वादी की शिकायत और थाना में दर्ज प्राथमिकी को भी समाचार का आधार नहीं बनाया, जो स्पष्ट प्रमाणित करता है कि इस सुनियोजित षडयंत्र में कहीं न कहीं शामिल रहा है।

इसका एक मात्र कारण है कि राजनामा डॉट कॉम दैनिक प्रभात खबर की पत्रकारिता को लेकर भी कई खबरें प्रसारित कर चुका है। और कहते हैं न कि शातिर खिलाड़ी कभी खुद सामने आकर लड़ाई नहीं लड़ता बल्कि दूसरे के कंधे पर बंदुक रख कर शिकार को मुआता है। लगता है कि वह भी पवन बजाज के साथ मिल कर कुछ ऐसे ही भूमिका का निर्वाह करता दिख रहा है ।

दैनिक प्रभात खबर में “ रंगदारी के आरोपी को जेल ” शीर्षक से प्रकाशित खबर और एक अखबार के मालिक की थाना में लिखित शिकायत व प्राथमिकी की प्रति को गौर से पढ़िये। आपको पता चल जायेगा कि समाचार लेखन का आधार या तो कल्पना मात्र है या फिर शाजिस।

राजनामा डॉट कॉम का दावा है कि कभी भी साइट या उसके संचालक-संपादक द्वारा यह सूचना प्रसारित नहीं किया गया है कि पवन बजाज किसी प्रसिद्ध व्यवसायी की हत्या में शामिल रहे हैं। हां, एक खबर में यह जिक्र अवश्य है कि उन पर उस हत्या का आरोप लगा है। जिसकी जांच में आगे क्या हुआ, यह पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों की गर्त में है।

सबसे बड़ी बात कि दैनिक प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश जी और स्थानीय संपादक विजय जी बखूबी जानते हैं कि राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक मुकेश भारतीय तो दूर कोई भी आदमी एक बड़े ब्रांड के अंग्रेजी अखबार के दफ्तर में 15 लाख की रंगदारी मांगने जा सकता है ? वह भी खबर छपने के बाद। अगर जा सकता है तो उस समय उस अखबार के दफ्तर में दर्जनों पत्रकार-गैर पत्रकारकर्मी लोगों के बीच बैठ कर प्याज छिलने के बजाय पवन बजाज जैसे प्रभावशाली व्यवसायी ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी ?

रही बात पवन बजाज के एक प्रसिद्ध व्यवसायी की हत्या में आरोपी होने की तो दैनिक प्रभात खबर के साथ अनेक समाचार पत्रों में इस बाबत प्रमुखता से समाचार प्रकाशित हो चुके हैं।

दरअसल, दैनिक प्रभात खबर का लक्ष्य मीडिया, राजनीति, ब्यूरोक्रेटस, कॉरपोरेट्स को अपनी मुठ्ठी में रख कर अपनी मातृ कंपनी उषा मार्टिन ग्रुप का हित साधना है। यदि उषा मार्टिन कंपनी के अब तक के इतिहास और गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की जाये तो एक “ बड़ा खेला ” का यूं ही पर्दाफाश हो जायेगा।

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