दैनिक प्रभात खबर का अमन तिवारी क्राईम रिपोर्टर है या क्राईम मैनजर !

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रांची। स्थानीय हिन्दी दैनिक प्रभात खबर का कोई सानी नहीं है। उसके क्रईम रिपोर्टर अमन तिवारी ने तो हद कर दी है। उसकी खबर देखने से लगता है कि या तो उसे पत्रकारिता का कोई बुनियादि ज्ञान नहीं है या फिर वह पुलिस-अपराधी के बीच लायजनिंग करता है। ऐसे ही रिपोर्टरों से पत्र और पत्रकारिता का स्तर गिर रहा है और एक पत्रकार को स्वंय को प्रेस कहने में हिचक होता है। जरुरत है कि अखबार अपने ऐसे संवादाताओं के विरुद्ध स्वच्छता अभियान चलाये।

मामला है कि विगत 22.08.2016 की सुबह करीब सवा आठ बजे ज्ञात-अज्ञात अपराधियों द्वारा बीआईटी ओपी के खालसा ढाबा के पास ऑटो से स्कूल जाने के क्रम में 14 वर्षीय आर्या कुमार का अपहरण करने का प्रयास किया गया था। अपनी मंशा में असफल रहने के बाद वे सब जान मारने समेत तरह-तरह की धमकियां देते हुये भागने में सफल रहे थे। आर्या कुमार राजनामा.कॉम के संचालक-संपादक मुकेश भारतीय का पुत्र है।

 घटना की जानकारी मिलने ही श्री भारतीय ने मामले की जानकारी बीआईटी थाना के प्रभारी पप्पु शर्मा को मोबाइल पर तत्काल दी और करीव साढ़े नौ बजे वे स्वंय घटना की लिखित सूचना बीआईटी थाना को दी। तब थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से संज्ञान लेते हुये घटना की पड़ताल की।

आर्या कुमार के आलावे उसके चार साथी, जो कि घटना के चश्मदीद गवाह हैं, उनका बयान लिया। फिर घटनास्थल का मुआयना किया और शाम करीब नौ बजे मामला दर्ज की। उसके कल होकर बीआईटी थाना के सहायक अवर निरीक्षक नारायण सिंह ने मुकेश भारतीय को मोबाईल पर बताया कि उन्हें मामले का अनुसंधानकर्ता बनाया गया है और सभी बच्चों से पुछताछ करना चाहते हैं। उनके बताये समय पर सभी बच्चे बीआईटी थाना पहुंचे और वे पुनः बयान दर्ज किया। सभी बच्चों ने वही सब बताया, जैसा कि थाना प्रभारी महोदय को बताया था। उसके सप्ताह भर बाद डीएसपी सदर विकास चन्द्र श्रीवास्तव ने सभी बच्चों का बयान लिया। डीएसपी को भी सभी वही सब बताया, जैसा कि थाना प्रभारी और अनुसंधानकर्ता सहायक अवर निरीक्षक को बताया था। उसके करीब 15 दिन बाद अनुसंधानकर्ता सहायक अवर निरीक्षक नारायण सिंह सभी प्रत्यक्षदर्शी गवाह बच्चों के घर पुलिस भरी जीप लेकर गये और बच्चों के अभिभावकों से मिले।

इसके महीना भर बाद अनुसंधानकर्ता सहायक अवर निरीक्षक नारायण सिंह इस मामले को लेकर नालंदा स्थित आरोपियों के गांव गये। वहां अनुसंधानकर्ता नारायण सिंह नालंदा पहुंचने की जानकारी सभी आरोपियों एवं मुख्य षंडयंत्रकारी को दे रखी थी। इतना ही नहीं वे मुख्य षंडयंत्रकारी की मोटरसाईकिल से ही जांच करने के क्रम में घुमते रहे और अपहरण के प्रयास में जिस वाहन का प्रयोग हुआ था, उसमें छेड़छाड़ करवा फोटो खिंचते हुये दो-चार चिन्हित लोगों का बयान लेकर लौट आये।

इस दौरान मुकेश भारतीय थाना प्रभारी और रांची सदर डीएसपी के सदैव संपर्क में रहे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे लेकिन, वे पुलिस जांच जारी रहने की बात करते रहे। समाचार लिखे जाने तक पुलिस जांच जारी है।

इसी बीच विगत 6 अक्टूबर को दैनिक प्रभात खबर को प्रमुखता से एक हैरान कर देने वाली खबर प्रकाशित हुई। इस खबर में अखबार के क्राईम रिपोर्टर अमन तिवारी जो कुछ लिखा है, उससे साफ जाहिर होता है कि उसने पुलिस और आरोपी अपराधी के बीच दलाली का काम करता है।

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दैनिक प्रभात खबर का क्राईम रिपोर्टर अमन तिवारी का फेसबुक चित्र

क्राईम रिपोर्टर अमन तिवारी ने लिखा कि “ओरमांझी के चकला निवासी  मुकेश भारतीय ने अपने पुत्र आर्या कुमार का बीआइटी मोड़ के समीप से अपहरण करने का आरोप लगाते हुए बीआइटी ओपी में 22 अगस्त को केस दर्ज कराया था. उन्होंने जिन लोगों का नाम इस केस में लिया था, उस दिन कोई भी घटना के दिन बीआइटी मोड़ के समीप नहीं थे. सभी आरोपी नालंदा (बिहार) के रहनेवाले हैं.  वे घटना के दिन अपने गांव में थे. 

पुलिस ने घटनास्थल के समीप खालसा होटल के जग्गू सिंह और मो जुल्फान अंसारी का बयान लिया. उन्होंने घटना के बाबत अनभिज्ञता जाहिर की. तब पुलिस अधिकारियों को घटना के प्रति संदेह होने लगा. इसके बाद केस के अनुसंधानक को इस बिंदु पर जांच का आदेश दिया गया कि वे आरोपी के गांव जाकर उनके बारे में पता लगायें और उनके मोबाइल का टावर लोकेशन निकालें. जब आरोपियों के मोबाइल का टावर लोकेशन निकाला गया, तब लोकेशन नालंदा  ही मिला. इसके बाद पुलिस की टीम ने नालंदा जाकर अन्य लोगों से बयान लिया. तब पुलिस को पता चला कि घटना के दिन आरोपी अपने गांव नालंदा में ही थे. मुकेश भारतीय का विवाद गांव में जमीन को लेकर अपने चाचा से चल रहा है. इसलिए पुलिस ने अभी अपहरण का आरोपी किसी को नहीं बनाया है. पुलिस अधिकारी जल्द ही केस में अंतिम निर्णय लेनेवाले हैं, ताकि निर्दोष लोगों को अपहरण के आरोप से बचाया जा सके. ”

सबाल उठता है कि मामला की जब पुलिस अनुसंधान जारी है तो फिर उसे इस तरह की जानकारी कहां से मिली।

रिपोर्टर ने लिखा है कि “पुलिस की वहां टीम गई और वहां मुकेश भारतीय का चाचा से जमीन विवाद चल रहा है। इसीलिये पुलिस ने अभी तक अपहण का ओरोपी किसी को नहीं बनाया है। पुलिस अधिकारी जल्द ही केस में अंतिम निर्णय लेने वाले हैं, ताकि निर्दोष लोगों को अपहरण के आरोप से बचाया जा सके”

सच तो यह है कि वहां कोई पुलिस की टीम नहीं गई बल्कि अनुसंधानकर्ता नारायण सिंह चोरी छुपे गये और आरोपियों से ही सेटिंग कर लौट आये। मुकेश भारतीय के चाचा दिवंगत हो चुके हैं। पुलिस मामले की गहन पड़ताल कर प्रथामिकी दर्ज की है और अपहरण के प्रयास एवं अन्य आरोपों की धारायें लगा कोर्ट को सूचित कर चुकि है।

रिपोर्ट का यह लिखना कि “पुलिस अधिकारी जल्द ही केस में अंतिम निर्णय लेने वाले हैं, ताकि निर्दोष लोगों को अपहरण के आरोप से बचाया जा सके” आखिर इस तरह के न्यायिक टिप्पणी करने के अधिकार कहां से मिल गये ?

सबसे बड़ी बात कि रिपोर्टर ने खालसा ठाबा के जिस जग्गू सिंह और जुल्फान अंसारी का हवाला दिया है, वह बिल्कुल वेबुनियाद बाते हैं। एफआईआर दर्ज करने के पहने थाना प्रभारी ने घटनास्थल का मुआयना किया था। उस समय होटल के गार्ड ने बताया था कि घटना के समय होटल का गेट बंद था और वहां पर उस समय कोई नहीं था। एसे भी खालसा ढाबा 11-12 बजे के बाद ही खुलता है। फिर देर रात तक बिना लाईसेंस का शराब-शबाब-कबाब का अवैध कारोबार करने वाला मामले में कहां से कूद गया। नालंदा से रांची आकर किसी का अपहरण करने का प्रयास करना और असफल होने पर जान मारने की धमकी देकर फरार के के मामले में स्थानीय तौर पर जग्गू सिंह सरीखे कारोबारी की तो नहीं है?

अब रही बात जुल्फान अंसारी की तो वह आर्या कुमार के अपहरण के प्रयास और जान मारने की धमकी देने के मामले का एक साथी गवाह छात्र है। थाना प्रभारी मामला दर्ज करने के पहले और दूसरे दिन अनुसंधानकर्ता जमादार नारायण सिंह और सप्ताह भर बाद रांची सदर डीएसपी विकासचंद्र श्रीवास्तव बयान ले चुके हैं। उसके एक पखबारा बाद जुल्फान के घर अनुसंधानकर्ता दल-बल धमक दे चुके हैं।

बहरहाल, पुलिस ने अब तक न तो उक्त मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी की है और न ही न्यायालय में कोई जांच रिपोर्ट ही सौंपी है। ऐसे में दैनिक प्रभात खबर के समाचार लेखक-क्राईम रिपोर्टर अमन तिवारी की भूमिका पुलिस और आरोपी अपराधियों के बीच दलाली करने से इतर कुछ नजर नहीं आता।

 

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