देखिये राजगीर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी कर रहे हैं कैसा खेला !

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज। बिहार में सर्व साधारण की शिकायतों का एक निश्चित समय-सीमा में समाधान कराने के उद्देश्य से 5 जून, 2016 से लोक शिकायत निवारण अधिनियम लागू किया गया है। इस कानून से सभी आवेदकों को 60 कार्य दिवसों में उनकी शिकायतों की सुनवाई, उसके निवारण का अवसर तथा उस पर निर्णय की सूचना प्राप्त होने का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है।

लेकिन यदि हम राजगीर अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण कार्यालय और पदस्थ पदाधिकारी की बात करें तो सब बेमानी लगती है। यहां लोक शिकायत निवारण व्यवस्था को मजाक बना कर रख दिया गया है।

एक आरटीआई के अनुसार यहां करीव सौ मामले ऐसे हैं, जिसमें कोई लोक प्राधिकार कभी उपस्थित ही न हुआ और उस संबंध में कोई निर्णय जारी नहीं किये गये। यहां दर्जनों मामले ऐसे हैं, जिसे देख कर लगता है कि यहां कोई सिस्टम नाम का कोई चीज ही नहीं है। लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को कोई ज्ञान नहीं है या फिर वे लोक प्राधिकारों के आगे नतमस्तक हैं। उनसे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती।

अभी राजगीर लोक शिकायत निवारण प्राधिकार में एक परिवाद चल रहा है। इस परिवाद का संक्षिप्त विवरण है- राजगीर थाना कांड संख्‍या- 28/17 के सूचक द्वारा फर्जी आरोप लगाये जाने के विरूद्ध 420 एवं 211 के तहत त्‍वरित कार्रवाई सुनिश्चित कराने हेतु।

यह परिवाद को मार्क्‍सवादी नगर, वार्ड नं0- 9, राजगीर, डाकघर- राजगीर, प्रखण्ड- राजगीर , अनुमंडल- राजगृह, जिला- नालंदा निवासी अखिलेश राजवंशी की शिकायत पर दर्ज हुआ है।

अखिलेश राजवंशी ने बिहार सरकार के प्रधान सचिव और गृह विभाग के सचिव से लिखित शिकायत की थी कि वीरायतन के ईशारे पर पुलिस-प्रशासन की एक बड़ी टीम ने बिना किसी आदेश-निर्देश के न सिर्फ गरीबों के घर उजाड़ने की कोशिश की, बल्कि दर्जन भर लोगों पर रंगदारी मांगने आदि का फर्जी मुकदमा भी दर्ज कर दिये गये। जबकि जिस जमीन पर गरीब लोग वर्षों से बसे हैं, वह सरकारी वन भूमि की जमीन है, उसे वीरायतन हर हाल में हड़पना चाहती है।

अखिलेश राजवंशी की उक्त शिकायत को राजगीर लोक शिकायत निवारण कार्यालय में भेज दिया गया। उसके बाद पदस्थ अधिकारी मृत्युंजय कुमार ने जो रवैया अख्तियार किया है, वह काफी चौंकाने वाले हैं।

बिहार सरकार की अधिकृत वेबसाइट http://lokshikayat.bihar.gov.in के अनुसार ” अनन्य संख्या- 527310128081700947 स्थिति- सुनवाई जारी आवेदन की तिथि- 28/08/2017 सुनवाई की तिथि- 22/09/2017 11 AM, इसके साथ तिथि-16/09/2017, आदेश का प्रकार- Adjourn, आदेश का विवरण: लोक प्राधिकार ने समय की मांग की है।, तिथि-09/09/2017 आदेश का प्रकार- Adjourn, आदेश का विवरण: लोक प्राधिकार ने समय की मांग की है।“ दर्शा रहा है।

सबाल उठता है कि लोक प्राधिकार ने समय की मांग की है…इसमें लोक प्राधिकार  कौन है? उस लोक प्राधिकार का जिक्र क्यों नहीं किया गया है?

तिथि 22.09.2017 को क्या सुनवाई हुई और लोक प्राधिकार की स्थिति क्या रही तथा अगली सुनवाई तिथि क्या है,  इसका जिक्र अभी तक क्यों नहीं किया गया है?

जाहिर है कि राजगीर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी इस वाद को लेकर एक बड़ा खेला कर रहे हैं और यह उनका कोई पहला खेला नहीं है, ऐसे अनेक खेलों की पुष्टि सरकारी वेबसाइट के अध्ययन के बाद साफ उजागर होती है।

इस संबंध में एक्सपर्ट मीडिया न्यूज द्वारा संपर्क साधने पर राजगीर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने कहा कि लोक प्राधिकार राजगीर डीएसपी और राजगीर सीओ हैं। वे ही समय की मांग कर रहे हैं। परिवादी को सब कुछ बता दिया गया है। लेकिन जब उनसे पुछा गया कि वेबसाइट में वाद को लेकर सब कुछ स्पष्ट क्यों नहीं किया गया है ? इस सबाल पर चुप्पी साध गये।

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