देखिये पटना की सड़क पर एसपी शिवदीप लांडे की ‘लंठगिरी’

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बिहार की राजघानी पटना के पटना के डाक बंगला चौराहे पर आज सुबह में सिटी एसपी शिवदीप लांडे ने जो फूहड़ ड्रामा किया है, उसे कोई सिंघमगिरी नहीं, अपितु लंठगिरी से अघिक कुछ नहीं कहा जा सकता है। इस मामले से संबधित वीडियो-ऑडियो देखने-समझने से साफ जाहिर होता है कि एसपी ने अपने इस भौंडेपन को भुनाने के लिये मीडिया के कैमरे का खुल कर दुरुपयोग किया है। 

कहते हैं कि यूपी पुलिस का सर्व चंद्र नामक इंस्पेक्टर पर आरोप था कि वह पटना के दो व्यापारी भाइयों से एक पुराने केस को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए पैसे मांग रहा था। इन दोनों भाइयों ने इसकी जानकारी सिटी एसपी शिवदीप लांडे को दी।

उसके एसपी की योजना के अनुसार  उक्त दोनों भाई ने यूपी से आए पुलिस इंस्पेक्टर को सुबह छह बजे डाक बंगला चौराहे पर बुलाया।

सुबह क़रीब सात बजे वह डाक बंगला चौराहे पर पहुंचा। तभी वहां भेष बदल कर खड़े सिटी एसपी ने वर्दी में आए आरोपी इंस्पेक्टर को पकड़ लिया और घसीटते हुए थाने ले गए।

बाद में मुरादाबाद पुलिस इंस्पेंक्टर सर्व चन्द्र को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया। ऐसे में सबाल उठना लाजमि है कि आखिर जब पर्याप्त सबूत नहीं थे तो इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। 

sp_lande_biharघटना का रोचक पहलु यह कि इस गिरफ़्तारी के दौरान मीडिया के कैमरे बुलाए लिये गये। बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मान रहे हैं कि पटना की सड़कों पर सिटी एसपी शिवदीप लांडे ने जिस तरह से पड़ोसी राज्य के पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया  उससे बचा जा सकता था। उनका कहना है कि घटनास्थल पर मीडिया खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की पहले से मौजूदगी इस पूरे प्रकरण पर सवाल खड़ा करती है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जिन पुलिसवालों को लांडे ने पूरी जनता के सामने गिरफ्तार किया, उसने अपने पूरे मूवमेंट की जानकारी पटना के कोतवाली पुलिस को दे रखी थी और उसके रहने का इंतजाम भी पटना के कोतवाली पुलिस ने किया था। इसलिए पूरा मामला मीडिया में बने रहने के लिए किए गए एक और स्टंट के अलावा कुछ नहीं।

इस मामले में यूपी के वरीय पुलिस अधिकारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया है। वहीं पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जीतेंद्र राणा ने लांडे से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।

दरअसल, मामला स्टेशनरी की दुकान चलाने वाले पंकज और दीपक नाम के दो भाइयों की है, जिनकी दुकान से वर्ष 2012 में सिम कार्ड बेची गई थी। इस सिम का इस्तेमाल मुरादाबाद में अपराध के एक मामले में किया गया था। 2012 से मुरादाबाद पुलिस की टीम पटना तफ्तीश के लिए आती रहती है।

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