देखिए गुमला में पुलिस,पत्रकार,नौकरशाह की नंगई !

Share Button

crupptionलिखा परदेश में रहना वतन को याद क्या करना, अगर बेदर्द हाकिम हो तो फरियाद क्या करना। जी हाँ, किसी शायर की ये पंक्तियाँ झारखण्ड ओर खासकर गुमला जिला के परिपेक्ष में सटीक बैठती हैं।

यहाँ का नेता, पत्रकार, नौकरशाह, या फिर पुलिस, कोई मामला सामने आया कि नहीं, बस हर कोई सुरसा की तरह मुहँ फाड़कर सामने आ जाता है। सारे लोग भ्रष्टाचारियों की स्तुति शुरू कर देते हैं। हर शक्स बहती गंगा में हाथ धोने के लिए आतुर दिखने लगता है।

ताजा वाकया भय और भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात झारखंड के गुमला जिले के समाजसेवी पत्रकार शंभु नाथ सिंह द्वारा न्यायालय में दायर एक वाद से सम्बंधित है। जिसमें छात्रवासों की मरम्मत व रंगाई-पुताई में 42 लाख 25 हजार रुपये गबन करने का आरोप है। कोई काम नहीं हुआ, परंतु पैसे की निकासी कर ली गयी।

इस मामले में कोर्ट ने गुमला थाना को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की अनुसंधान करने का आदेश दिया है।  कोर्ट ने जिन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। उनमें झालको के एरिया मनेजर आर पी राय, माइनर एरिगेसन के इंजिनियर अमरेन्द्र कुमार (जो वर्तमान में माइनर एरिगेसन चाईबासा में पोस्टेड हैं), सुरेश झा , अमर रविदास, शंकर तिवारी,  जिला कल्याण पदाधिकारी श्री मति मधुमती कुमारी, कलर्क दिलीप कुमार, ठेकेदार सुधीर कुमार सिंह, तथा सुचना जन संपर्क विभाग के निदेशक शामिल हैं।

 इन सभी अभियुक्तों के खिलाफ आई पी सी की धारा 406,409,467,468, 420,120 (B) /34 के तहत F.I.R दर्ज करने का आदेश माननीय C.J.M. Cort दोरा दिया गया है।

पर इस मामले में अब गुमला पुलिस ने अपना खेल शुरू कर दिया है | तक़रीबन 16 -17 दिन के बाद भी अभी तक F.I.R दर्ज नहीं किया गया है, जो सीधे सीधे कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।

कहते हैं कि पुलिस के दलाल होली के नाम पर अभियुक्तों से संपर्क साध रहे है। वे सरेआम बोली लग रही है। हर तरफ मोलभाव का खेल जारी है।

गुमला में दर्ज अपराधिक मामलों में पुलिसिया अनुसंधान कैसे होता है, इसकी बानगी इसी से पता चलता है कि गुमला में मनरेगा की राशि का गवन का मामला डेढ़ दर्जन NGO पर मामले दर्ज हुए। पुलिस ने किसी की गिरफ़्तारी नहीं की।  सिर्फ एक को छोड़ कर जिसने सीधे DC से पंगा लिया था, इसलिए गिरफ्तार किया गया था। बाकी पुलिस के कमजोर अनुसंधान के कारण सभी को जमानत मिल गयी।

 इसी तरह 2011 में 15 करोड़ की लागत से बने 6 ब्रिज पहली बरसात में बह गए। F.I.R दर्ज हुआ पर यह जान कर हैरानी होती है कि चार साल में भी आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल नहीं हुआ है।

नतीजतन सभी आरोपी 19 अभियंता ओर ठेकेदारों को जमानत मिल गयी। अब आधे से अधिक अभियंता रिटायर हो चुके हैं ओर शेष ने मलाईदार जगहों पर पोस्टिंग करा ली है।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...