दूसरे विनोद सिंह के बदले मुझे जेल जाना पड़ा !

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male_mla (1)2005 में विधायक के रूप में विधानसभा में मेरा पहला सवाल जमशेदपुर के घाटशिला से जुड़ा था।

जहाँ एक व्यक्ति की हत्या के जुर्म में पुलिस ने तीन आदिवासियों को अम्पा सोरेन कान्दू सोरेन व् अन्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

बाद में पता चला की उस व्यक्ति की हत्या हुई ही नहीं थी। वह घर से बाहर चला गया था। मेरे सवाल उठाने पर पीडितो को मुआवजा मिला।

2010 में मैंने विधानसभा एक सवाल उठाया था लोहरदग्गा जिला में एक आदिवासी युवक को सिर्फ हमनाम होने की वजह से पुलिस ने दूसरे अपराधी के बदले जेल भेज दिया।

male_mla (2)मेरे सवाल उठाने पर उसे मुआवज़ा मिला व् अधिकारी निलंबित हुआ। यूं तो झारखंड में इस तरह के सैकड़ो उदाहरण ज्यादती के मिलेंगे। और फिर अंततः मुझे भी इस स्थिति से गुजरना पड़ा।

पिछले दिनों मुझे भी कोडरमा जेल में 2 दिन गुजारना पड़ा। जिस मसले में मुझे जेल जाना पड़ा। मैं उस वक्त घटनास्थल पर नहीं था।

तत्कालीन कोडरमा आरक्षी अधीक्षक ने भी कहा था कि माले विधायक विनोद सिंह पर मुकदमा नहीं है। व् पुलिस इन्स्पेक्टर ने भी घटना के वक्त अखबार में ऐसा ही वक्तव्य दिया था। लेकिन इसके बावजूद पिछले दिनों मेरे नाम से वारंट जारी किया गया और मुझे जेल जाना पड़ा।

एक मित्र के सौजन्य से पुराने अखबार की कटिंग भी सलंग्न है।

………निवर्तमान झारखंड विधानसभा के माले विधायक विनोद सिंह अपने फेसबुक वाल पर

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