दूसरा आर्थिक सुधार है मोदी का यह नोटबंदी !

Share Button

यह प्रधानमन्त्री मोदी का देश में नया समाजवाद लाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। अभी कई इलाको में पालिका , नगर पालिका में बीजेपी की जीत को इसी रूप में देख सकते है। नोटबंदी से आम लोगो को परेशानी बहुत ज्यादा है लेकिन लूट की कमाई पर समाज में बड़े होने होने का दम्भ भरने वाले लोगो से आम लोग परेशान है। आम लोग इसी वजह से बीजेपी के चोर और भ्रष्ट नेता को भी जीत दिला रहे है। इसकी सर्जरी बाद में हो सकती है।

 अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ लेखक पत्रकार  'अखिलेश अखिल '
अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ लेखक पत्रकार ‘अखिलेश अखिल ‘

बीजेपी नोटबंदी का फैसला बीजेपी का कतई नहीं है। कोई मान भी नहीं सकता है। मोदी जी चुकी बीजेपी की राजनीति करते है इसलिए बीजेपी वाले अभी अपनी सरकार के इस फैसले पर बाहें चढ़ा रहे हो लेकिन बीजेपी में किसी नेता की इतनी औकात नहीं है कि वह इस तरह के फैसले ले सके। माया मोह से विरक्त पीएम मोदी ही ऐसा कर सकते थे और उन्होंने किया भी। देश से कालाधन निकल जाए , बेईमान नाश हो जाए , दलाल संस्कृति पर रोक लग जाए यह भला कौन नहीं चाहता।

आखिर इसी संस्कृति ने तो देश को बर्बाद किया है। ऊंच नीच की खाई पैदा की है और गैरबराबरी का वातावरण पैदा किया है। संसदीय राजनीति में शामिल कोई भी राजनितिक दल यह स्वीकार नहीं कर सकता की उसने और उनके लोगो ने कभी कालाबाजारी नहीं की है और देश को नहीं लुटा है। क्या बीजेपी वाले यह स्वीकार करेंगे की उन्होंने घुस नहीं लिया है ?

क्या बीजेपी वाले यह मान सकते है कि वे सत्य और अहिंसा के पुजारी है। क्या वे कोई गवाही देने को तैयार है कि हनुमानजी की लंगोटी पहनकर केवल राम भक्ति में लीन रहे है ? और अगर ऐसा है तो वे ये भी बताये कि उनकी राजनीति कैसे चलती है ? उनके चुनाव खर्च कहा से आते है ? उनका परिवार किस धन पर पोषित और पल्लवित होता है ? उन्हें यह भी बताना होगा कि वाजपई जी की सरकार में जितने घोटाले हुए उसके पीछे किनका हाथ था ? या घोटाले हुए ही नहीं ? फिर किसने किये ?

बीजेपी वाले यह भी बताये कि १९९१ के बाद की नई आर्थिक नीति का विरोध तो आप लोग खूब कर रहे थे। देश बिक जाने की बात कर रहे थे , स्वदेशी की राजनीति से समाज त्रस्त था। डंकल से लेकर गैट के विरोध में इसी संसद में क्या क्या नाटक नहीं हुए। लेकिन नई आर्थिक नीति का लाभ सबने उठाया। क्या कांग्रेस वाले और क्या बीजेपी वाले और तमाम गिरोह वाले , सबने खुले बाजार व्यावस्था में खूब डुबकी लगाईं। उनके लोगो ने , उनके दलालो ने , उनके कार्यकर्ताओ ने खूब लुटा।

कांग्रेस और अन्य राजनितिक पार्टी तो पहले से ही बदनाम रही है। उसके बारे में ज्यादा कुछ क्या कहा जा सकता है। इसलिए यह मोदी जी है जो आर्थिक सुधार को फिर से पटरी पर लाने में तुले हुए है। इस खेल में कोई भाजपाई शामिल नहीं है। इस नोटबंदी से जितना दर्द कालाधन रखने वाले कांग्रेसियो , से लेकर अन्य दलों को है उतना ही दर्द उन भाजपाइयों को भी है कम्बल ओढ़कर घी पीते है। नोटबंदी को लेकर बीजेपी का बनिया लॉबी ही ज्यादा परेशान है।

तो कहानी ये है कि नोटबंदी का खेल पुरे मन से मोदी जी लागू करे। देश की जनता यह खेल भी देख ले। नरसिंहा राव की नीति का खेल भी देश ने देखा था। विरोध भी हुआ लेकिन देश का जितना विकास और लूट पिछले २० सालो में सबने किया , कभी देखा नहीं गया। उदारीकरण के अब २५ साल हो गए है। एक बार उसकी समीक्षा तो होनी ही चाहिए।

उदारीकरण के रास्ते के छिद्र को भरना तो पडेगा। मोदी की यह नीति किसी पार्टी , या ख़ास लोगो को चाहे जितना प्रभावित करे लेकिन आम लोगो को अगर इस नीति का दशांक भी लाभ मिल जाए तो इसे दूसरी आर्थिक सुधार के रूप में देखा जा सकता है।

संसदीय राजनीति में कोई भी राजनितिक दल ईमानदार नहीं है। जब नेता ही गलत हो तो उनके अमले -जमले चोर उचक्के होंगे ही। इस नॉट बंदी का राजनीति पर भी असर पडेगा। बीजेपी की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है। हो सकता है कि इस नोटबंदी से बीजेपी को कुछ ज्यादा ही घाटा हो जाए।

या यह भी हो सकता है कि यही नोटबंदी मोदी को और ताकत दे दे। बीजेपी फिर सता में आ जाए। और ऐसा नहीं भी हुआ तो याद रखिये इस देश का बहुत कुछ बदल जाएगा। मोदी सुधार इतिहास के पन्नो में दर्ज हो जाएगा। नोटबंदी को लेकर जो भी परेशानियां देश में उत्पन्न है उसे शीघ्र ख़त्म करने की जरुरत है।

जनता से बढ़कर राजनीति नहीं हो सकती। और एक बात और जो भाड़े के भक्त अभी सामने दिख रहे है उनका देश से कुछ लेना। पिछले २५ साल के लूट में सबसे ज्यादा हाथ इन्ही का रहा है।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...