एसपी ने दिया दुर्गा पूजा पंडालों में जरुरी आपात उपकरण रखने के निर्देश

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नालंदा (संवाददाता)। दुर्गापूजा के अवसर पर बनाये जा रहे भव्य पंडालो के पूजा समिति एवं पंडाल निर्माणकर्ता अग्नि सम्बंधित उपकरण पंडालो में अवश्य रखे।दुर्गा पूजा और मुहर्रम को लेकर पुलिस खास एहतियात बरत रही है।

नालंदा एसपी कुमार आशीष ने जिले के सभी पूजा समितियों एवं निर्माणकर्ताओ से सॉर्ट सर्किट,पटाखों से आग लगने से बचाव के लिए खास ध्यान रखने का निर्देश दिया है।

एसपी कुमार आशीष ने बताया कि पूजा समिति एवं पंडाल निर्माण कर्ता मुख्य रूप से पूजा पंडाल के निर्माण में फायर रिटोरडेंट सेल्युसन कपडे का उपयोग करे,पंडालो में तीन द्वार रखा जाये, बिजली के तारो को कपडे अथवा त्रिपाल के संपर्क में नही रखे,पंडालो में फ्यूज सर्किट ब्रेकर लगाया जाये,हवन की व्यवस्था पंडाल से बाहर एव् थोड़ी दुरी पर किया जाये,अगरबत्ती ज़मीन पर ही जलाने की व्यवस्था किया जाये,पंडालो में 4 ड्रम पानी,4 मग,4 बालू से भरी बाल्टी,2 वाटर CO2 एवं डाई केमिकल पावडर रखे,पंडालो में मुख्य रूप से अपने नजदीकी फायर ब्रिगेड की मोबाइल या पीएनटी नंबर को तीन -चार स्थानो पर तख्ती में लिखकर टांग दे,पंडाल के इर्द-गिर्द पटाखा नही छोड़े।आपसी भाई-चारे के साथ मिलकर सौहार्द पूर्ण माहौल में माता रानी की पूजा करे।

दुर्गा पूजा समिति एवं पूजा समिति एवं पंडाल निर्माण कर्ता के लिए आवश्यक निर्देश 

पंडाल के निर्माण में फायर रिटोरडेन्ट सोल्युशन में उपचारित किया हुआ कपडे का प्रयोग करे,क्योंकि ऐसे कपड़ो में आग जल्दी नही लगती है।

पंडालो में कम से कम तीन द्वारा अवश्य रखे एक सामने और दो पार्स्व में हो।

बिजली के तारो को त्रिपाल एवं कपडे के संपर्क में नही रखे,तार को पीबीसी कंड्यूप पाइप के अंदर से ले जाये।

पंडालो में बिजली की व्यवस्था हेतु विशेष रूप से मोटे एवं नए तारो का उपयोग करे।

प्रत्येक पंडालो के लिए आवश्यक रूप से फ्यूज सर्किट ब्रेकर लगाया जाये तथा उन तारो में उपयोग होने वाले लोड को 7 एम्पीयर से अधिक क्षमता का तार नही रखे,इसके लिए पंडाल निर्माणकर्ता अपने नजदीकी विधुत विभाग अभियंता से परामर्श ले ले एवं विधुत विभाग अभियंता से पंडालो का जाँच करवा ले।

हवन की व्यवस्था पंडाल से बाहर एवं थोड़ी दूरी पर सुरक्षित स्थानों पर करे।

अगरबत्ती जलाने की व्यवस्था जमींन पर करे,कपडे से बने मंच एवं पंडाल से अलग रखे।

प्रत्येक पंडालो में पानी से भरा चार ड्रम,चार बाल्टी,चार मग एवं दो वाटर CO2 एवं डाइ केमिकल पावडर,अग्निशामक यंत्र आकाशमीकता से निपटने के लिए रखे।

सास्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन अनुमति प्राप्त कर खुले स्थान पर करे,पंडालो के तीन और खुला रखे,यदि पंडालो को घेरने की आवश्यक्ता आती है तो प्रत्येक 15 फीट पर एक “निकास द्वार” अवश्य रखे।आयोजक बैठने की व्यवस्था ऐसी करे की निकास द्वारा का मार्ग अवरुद्ध ना हो।

पंडाल में घेरा बनाते समय इस बात का ध्यान रहे की आपात कालीन स्थति में अग्निशामक वाहन के रास्ते को अवरुद्ध ना किया जाये,अर्थात अग्निशामक गाड़ी को आने-जाने में परेशानी ना उठानी पड़े।

बच्चो के अभिभावक अपने बच्चो को भीड़-भाड़ वाले इलाको में पटाखा छोड़ने ना दे।आसमानी तार,लारी पटाखा सहित दुर्घटना होने वाली पटाखा छोड़ने नही दे।अपने घरों में अधिक मात्रा में पटाखा नही रखे।अगर बच्चा पटाखा फोड़ने की ज़िद करे तो घर के सदस्य साथ रहे या बिलकुल फोड़ने ना दे।

पंडाल या अस्थाई निर्माण स्थल पर अग्निशाम सेवा का आपात-कालीन नंबर-101 या स्थानीय अग्निशामक का नंबर तख्ती पर लिखकर पंडालो के हरेक कोनो में टांग दिया जाये।

अनुज्ञप्तिधारी पटाखों के बिक्रेता कम-से-कम दो वाटर CO2 तथा दो डी0सी0पी0 (9 लीटर क्षमता) का पोर्टेबुल अग्निशामक यंत्र अवश्य रखे,जिसके संचालन की जानकारी उन्हें खुद हो,साथ में अपने दुकानों में दो ड्रम पानी भी रखे ताकि आपातस्थिति में दुर्घटना से निपटा जा सके।अग्निशामक यंत्र का सर्वेक्षण सहायक प्रमंडलीय अग्निशामक पदाधिकारी से भी पर्व के पहले अवश्य करवा लिया जाये।

नालंदा एसपी कुमार आशीष ने कहा कि मेला से पहले सभी आयोजकगण तकनिकी सलाह के लिए नजदीकी फायर स्टेशन के सहायक प्रमंडलीय अग्निशामक पदाधिकारी से संपर्क कर सलाह अवश्य ले।

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