दीपक चौरसिया को लेकर दो खेमों में क्यों बंटे हैं पत्रकार?

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आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं……”

राजनामा.कॉम डेस्क। वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर दिल्ली के शाहीनबाग में हुए हमले को भले ही दो दिन गुजर चुके हों, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा अभी भी गर्माया हुआ है।

कुछ पत्रकारों ने जहां इस घटना की निंदा की है, वहीं कुछ इसके लिए दीपक चौरसिया को ही जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में मीडियाकर्मी एक सुर में आवाज बुलंद करते हैं, मगर यहां वह अलग-अलग खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं।

दरअसल, चौरसिया को ऐसे पत्रकार के रूप में देखा जाता है जो मोदी सरकार की नीतियों पर प्रहार नहीं करते, इसलिए जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में उन्हें निशाना बनाया गया, तो कई लोगों ने इसे साजिश की तरह से देखा, जिसमें कुछ पत्रकार भी शामिल हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर पत्रकार भी पक्ष-विपक्ष की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

‘इंडिया टुडे’ समूह के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने दीपक चौरसिया पर सवाल खड़े करने के लिए ‘द वायर’ की आरफा खानम शेरवानी को आड़े हाथों लिया है।

आरफा ने शाहीनबाग की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा था, ‘दीपक चौरसिया के साथ जो कुछ हुआ वह निंदनीय है, लेकिन यह पत्रकार या पत्रकारिता पर हमला नहीं है। सरकार के समक्ष नतमस्तक हो जाना पत्रकारिता नहीं होती। उत्पीड़ित समुदायों का गलत चित्रण पत्रकारिता नहीं कहलाती। एक पत्रकार के विशेषाधिकारों का दावा न करें, क्योंकि आप पत्रकार नहीं हैं’।

इसके जवाब में राहुल ने कहा, ‘बकवास तर्क। दीपक चौरसिया जैसी चाहें, वैसी पत्रकारिता रखने का अधिकार रखते हैं। यदि आपको पसंद नहीं तो न देखें। लेकिन एक पत्रकार पर सिर्फ इसलिए हमला करना क्योंकि आप उसकी बात को पसंद नहीं करते, पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग की असहिष्णुता को दर्शाता है’।  

इसी तरह महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाघले ने जहां घटना के लिए चौरसिया को कठघरे में खड़ा किया है, वहीं ‘डीडी न्यूज’ के एंकर अशोक श्रीवास्तव उनके पक्ष में उतर आये हैं। उन्होंने वाघले के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें लिखा है ‘दीपक चौरसिया पत्रकार नहीं हैं। इस बात की जांच होनी चाहिए कि वह शाहीनबाग किसी खास मिशन पर गए थे या नहीं’।

अशोक श्रीवास्तव ने इसे लेकर वाघले पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अपने जवाबी ट्वीट में कहा है ‘ये आदमी खुद को पत्रकार कहता है। आजकल सर्टिफिकेट बांट रहा है कि कौन पत्रकार है, कौन नहीं। मुझे इसने ब्लॉक कर दिया है, आप लोग पूछ लें कि कब सड़क पर नंगे होकर दौड़ लगाएंगे ये। 2019 के चुनावों से पहले इसने ट्वीट किया था कि मोदी जीते तो नंगा होकर सड़क पर दौडूंगा’।

इसके साथ ही श्रीवास्तव ने ‘द प्रिंट’ की पत्रकार जानिब सिकंदर को भी निशाना बनाते हुए लिखा है ‘ये @print से जुड़ीं पत्रकार हैं, जिसके आका @ShekharGupta हैं। इन्हें लगता है कि #ShaheenBagh में पत्रकारों की जो पिटाई “polite” तरीके से हुई। ये वो जमात है जो चाहती है कि इनके पक्ष में जो न बोले उसे लिंच कर दो, मार दो। ये बाबरी मानसिकता वाले पत्रकार हैं’।

कई अन्य पत्रकार भी इस मुद्दे पर अलग-अलग सोच प्रदर्शित करते सोशल मीडिया पर नजर आ रहे हैं।

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