दस सालों तक सरकारी फाइलो में दबा रहा नालंदा का चंडी रेफरल अस्पताल

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वर्ष 2005 में ही मिल चुका था रेफरल का दर्जा, आरटीआई से हुआ खुलासा

नालंदा(जयप्रकाश नवीन)। “सुहागन हुई पर नहीं मिला सुहाग’,यह कहावत वर्षों से नालंदा के चंडी रेफरल अस्पताल पर सटीक बैठती है।दस सालों से राबडी और नीतीश सरकार के शासन में फाइलो में दबी रही रेफरल अस्पताल के शायद अब दिन बहुरेगे की संभावना बढ़ गई है ।     

chandu-phc1बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री डा0 रामराज सिंह की परिकल्पना 36 साल बाद साकार होने वाला है । उन्होंने जो रेफरल अस्पताल का सपना देखा था, अब वह जल्द  धरातल पर आने वाला है । पिछले 13 साल से जिस  रेफरल अस्पताल भवन में चंडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है ।अब वह विलोपित होगा और उसकी जगह चंडी रेफरल अस्पताल अस्तित्व में आएगा। जिस रेफरल अस्पताल की प्रतीक्षा चंडी के लोगों को थी उसे तो दर्जा मिले 11 साल से ज्यादा हो गया है । पिछले एक दशक से रेफरल अस्पताल सरकारी फाइलो  में दम तोड़ रही थी।जिसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत हुआ ।

चंडी के एक आरटीआई एक्टिविस्ट उपेन्द्र प्रसाद सिंह ने चंडी रेफरल अस्पताल से संबंधित सूचना की मांग नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद से मांगी थी।बाद में परिषद ने मामले को बिहार स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव को भेज दी।

अपर सचिव के द्वारा उपलब्ध जानकारी इस बात का भंडाफोड हुआ कि चंडी रेफरल अस्पताल को 2005 में ही मंत्रिमंडल से दर्जा प्राप्त है । 2005 में ही राज्य सरकार ने नवनिर्मित 15 रेफरल अस्पताल को मान्यता दी थी जिनमें चंडी रेफरल अस्पताल भी शामिल है ।साथ ही वितीय वर्ष 2005-2006 में 360 स्थायी पदों का सृजन भी स्वीकृत कर दिया गया था ।

चंडी रेफरल अस्पताल में सबसे पहली बहाली परिवार नियोजन के काउंसलर पद पर संगीता त्रिपाठी की 2012 में हुई थी।जबकि 8 अप्रैल को एक चिकित्सक अजय कुमार की बहाली हुई है।

21 अक्टूबर 1990 को 30 शय्या वाले चंडी रेफरल अस्पताल की आधारशिला तत्कालीन कृषि मंत्री नीतीश कुमार ने रखी थी ।जिसका गवाह  बिहार सरकार के स्वास्थ्य एवं संसदीय मंत्री रघुनाथ झा, जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह, कृषि राज्य मंत्री रामजीवन सिंह तथा स्थानीय विधायक हरिनारायण सिंह बने थे । हालाँकि इस अस्पताल की कल्पना पूर्व शिक्षा मंत्री डा0 रामराज सिंह की थीं ।वे इसे मूर्त रूप दे पाते उनका 1983 में असामयिक निधन हो गया ।

chandu-phc1985 में इनके रक्त बीज विधायक अनिल कुमार ने अपने पिता के सपने साकार करने में लग गए।उस समय बिहार के मुख्यमंत्री बिन्देश्वरी दूबे के पास चंडी रेफरल अस्पताल के निर्माण के लिए कृषि फार्म के पांच एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव लाया गया । इसी बीच पांच साल का वक्त गुजर गया। 1990 में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गयी।

1990 के चुनाव में अनिल सिंह को हार का सामना करना पड़ा ।और उनकी जगह जनता दल से जीतकर आए हरिनारायण सिंह रेफरल अस्पताल के शिलान्यास का श्रेय ले गए। 21अक्टूबर 1990 को इसकी आधारशिला रखी गई थी। कुछ सालों में ही रेफरल अस्पताल बनकर तैयार हो गया था । लेकिन राजनीतिक झंझावत में अस्पताल फंसा रहा । अस्पताल असामाजिक तत्वों का अड्डा बनकर रह गया था । देख रेख के अभाव में अस्पताल खंडहर बनता जा रहा था ।

डा0 रामराज सिंह की स्मृति दिवस 4दिसम्बर 2001 को पूर्व विधायक अनिल सिंह ने आनन -फानन में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री शकुनी चौधरी के हाथों उद्घाटन करा जनता के लिए अस्पताल खोल दिया । तब स्वास्थ्य मंत्री ने भरोसा दिलाया था कि रेफरल अस्पताल में सारी अत्याधुनिक सुविधाएँ शीघ्र बहाल कर दी जाएगी । चंडी रेफरल अस्पताल भवन में ही चंडी पीएचसी को शिफ्ट कर दिया गया था ।तबसे अबतक चंडी रेफरल अस्पताल अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रहा था।

चंडी रेफरल अस्पताल के प्रति  जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और अकर्मण्यता को देखकर जनता मायूस होने लगी थी।इस अस्पताल को लेकर जनता सारी उम्मीद खो चुकी थी।तभी एक आरटीआई एक्टिविस्ट उनके लिए मसीहा बन कर आए।

उन्होंने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से  चंडी रेफरल अस्पताल से संबंधित सूचना मांगी। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् ने 26 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार को चंडी रेफरल अस्पताल से संबंधित सूचना निर्गत करने का निर्देश दिया ।

बिहार स्वास्थ्य सेवा के अपर निदेशक सह लोक सूचना पदाधिकारी डॉ विनय स्वरूप ने सारी सूचना नालंदा सिविल सर्जन को सौंप कर सूचना आवेदक को देने का निर्देश दिया । सिविल सर्जन ने कार्यालय के ज्ञापांक 2400 बिहारशरीफ, दिनांक 01-07-2016 के तहत सारी सूचना प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रेफरल अस्पताल को प्रेषित कर दी।

काफी जद्दोजहद के बाद एक लम्बी लड़ाई के बाद तत्कालीन बिहार सरकार के सचिव दीपक कुमार के द्वारा महालेखाकार तथा वित विभाग को पत्रांक 119(10)दिनांक 05जून 2006 के पत्र से इस बात का खुलासा हुआ कि वित्तीय वर्ष 2005-2006 में राज्य के 14 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पूर्व से सृजित पदों को प्रत्यार्पण करते हुए शून्य रूपये के व्यय पर गैर योजना अन्तर्गत 15 नवनिर्मित रेफरल रेफरल अस्पतालों और उनके कुल 360 स्थायी पदों का दिनांक 01-03-2005 से सृजन की घटनोत्तर स्वीकृति राज्य सरकार ने प्रदान की है।

राज्य सरकार ने उस समय मढौरा, टिकारी,मैरवा ,नासरीगंज,पंडौल,मधेपुर,चंडी, राघोपुर,रूपौली,सहित 15 रेफरल अस्पताल को स्वीकृति प्रदान की थी ।जिसकी अधिसूचना राज्य सरकार ने विकास आयुक्त, वित विभाग, सचिव योजना एवं विकास विभाग, प्रमंडलीय आयुक्त, जिला धिकारी, सिविल सर्जन, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, संबंधित कोषागार को भेजी गई थी ।

बावजूद सभी पदाधिकारी रेफरल अस्पताल की स्वीकृति फाइल पर कुंडली मार कर बैठे रहा ।फिलहाल चंडी रेफरल अस्पताल में वर्ष 2012 में संगीता त्रिपाठी को परिवार नियोजन परामर्शी पद पर पदस्थापित किया गया था ।

फिलहाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जगह रेफरल अस्पताल का बोर्ड तो लगा दिया गया है ।लेकिन अभी भी नालंदा सिविल सर्जन की उदासीनता से  रेफरल अस्पताल की मंजिल काफी दूर दिख रही है ।

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