……तो मीडिया में घुसे इस ‘भेड़िए’ की पोल न खोलता !

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अपने फेसबुक वाल पर कोल्हान के वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार…✍

राजनामा.कॉम। एक ऐसा इंसान जो खुद को पत्रकारों का हितैषी बताकर सरकारी तंत्र की आंखों में धूल झोंककर खुलेआम घूम रहा है। कभी रांची तो कभी दिल्ली, तो कभी जमशेदपुर में मुंह छिपाकर घूमता रहता है।

खुद को पत्रकारों का हितैषी बतानेवाला ये इंसान भेड़िया से कम नहीं। झारखंड के लगभग सभी जिलों के आंचलिक और शहरी पत्रकारों को इस इंसान ने चूना लगाया है। इसके पीड़ित आज भी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।

संगठन के नाम पर सब्जबाग दिखाकर टॉफी की तरह JJA नामक फर्जी संगठन में पोस्ट देता है और खुद महंथ बना बैठा रहा है। रांची के कुछ सीनियर जर्नलिस्ट से अपना भेड़िया वाला रूप छिपाकर उन्हें अपने साथ मिलाकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उठना- बैठना भी शुरू कर दिया है।

यहां तक कि द रांची प्रेस क्लब के कॉन्फ्रेंस हॉल में भी इसने किराया देकर बैठक करने की हिमाकत की और द रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारियों की सहमति से। जबकि द रांची प्रेस क्लब के सभी अधिकारी इसके करतूतों से अवगत रहे हैं।

कल यह अपने चाटुकारों के साथ पवित्र तिरंगा के नाम पर संवेदना लूटने का घिनौना कृत्य किया है। जमशेदपुर एसआईटी ने इसे संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के नाम पर अरेस्ट किया था जहां आज भी इसका मामला चल रहा है।

ये पत्रकारिता का चोला ओढ़कर रंगीन सियार बनकर लोगों को गुमराह कर रहा है। एडमिनिस्ट्रेशन, जर्नलिस्ट और राजनेता को सावधान रहने की जरूरत है।

अगर इस संदिग्ध के हाथों में तिरंगा नहीं होता तो इसके भेद नहीं खोलता। मगर इसने तिरंगा का अपमान किया है। इसलिए जरूरी था। ये लाल चौक पर क्या तिरंगा फहराएगा, पहले तिरंगा के सौदा करने का कलंक तो अपने दामन से मिटा ले।

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