…..तो भारत के लोग सिर्फ उड़ ही रहे होते !

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pandeyसंत के स्वप्नों का सम्मान इस देश की विशेषता रही है ……. रामकृष्ण परमहंस तो स्वप्नों के सागर ही थे ……… नरेन्द्र नाथ के बारे में उन्होंने स्वप्न देखे और उनका नरेन् विवेकानंद बन गया…...
………..नोबेल पुरस्कार विजेता रोमां रोलां ने भगवान रामकृष्ण और स्वामी विवेकानन्द की जीवनी लिखी और विस्तृत रूप से इन दोनों महापुरुषों के स्वप्नों का वर्णन किया है ……..स्वप्नों की भाषा से अपतिचित लोगों को इस जीवनियों को पढ़ना चाहिए……….. वाल्मीकि रामायण में त्रिजटा द्वारा देखा गया स्वप्न ,, महाभारत में अर्जुन द्वारा स्वप्न में भगवान शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त करने का स्वप्न – इन्हीं स्वप्नों से भारत बना है….
………यही स्वप्न, अमरीका और पश्चिम के दूसरे देशों को यहाँ ले आते हैं……….किसी राज्य में कितनी फैक्ट्री लगी हुई है और कितना पैसा है — इससे भारत की गरिमा नहीं बढ़ती …….

भारत की गरिमा श्री राम , श्री कृष्ण, बुद्ध , महावीर और चाणक्य से विवर्धित और सुगन्धित होती है…. दुनिया के दूसरे देशों से लोग गुजरात और बिहार फैक्ट्रियां और कारखाने देखने नहीं आते बल्कि इन महापुरुषों के स्वप्नों के भारत का दर्शन करने आते हैं…….
...अगर स्वप्नों के आधार पर भारत का मज़ाक उड़ने लगे तो अब तक तो भारत और हम भारत के लोग सिर्फ उड़ ही रहे होते.
…. मगर हम हैं ,, इसी धरती पर हैं और लोलुप लोगों के अभियानों और उनके द्वारा संतों और भारतीय संस्कृति का मज़ाक उड़ाने की गैरजिम्मेदार हरकतों के बावजूद रहेगे ……………..

किसी संत ने स्वप्न देखा,,, किसी जिला प्रशासन ने प्राथमिक संकेत सकारात्मक पाते हुए खुदाई शुरू की तो क्या यह किसी पक्ष द्वारा अपने प्रतिपक्षी पर आक्रमण का एक शस्त्र बनना चाहिए ??…..

.और जो लोग ऐसा कर रहे हैं वे जानते हैं कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं……. मगर ये बातें अब उन लोगो को भी जाननी चाहिए जिनके दम पर ये लोग ऐसा दम भरते हैं....

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